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मुनक्का खाकर बच्चे हो रहे मनोरोगी

6 वर्ष पहले
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देव कुण्डल इंदौर

शराब, भांग, गांजा जैसे नशीले पदार्थों की बिक्री के लिए व्यापारियों को लाइसेंस लेना अनिवार्य है, पर इंदौर सहित पूरे प्रदेश में पान की दुकानों पर बिना लाइसेंस भांग की गोलियां (मुनक्का) की बेरोकटोक बिक्री हो रही है। कम कीमत और आसानी से उपलब्ध होने के कारण हर उम्र के लोग नशे के लिए इनका सेवन कर रहे हैं। मुनक्का की लत लगने से बच्चे सर्वाधिक दुष्परिणाम भुगत रहे हैं।

बाणगंगा स्थित पागलखाने और अंकुर रिहेब में मानसिक रोगी हो चुके भंगेड़ी बच्चों का भी इलाज हो रहा है। बच्चों में याददाश्त जाने के साथ ही कई तरह की बीमारियां भी हो रही हैं। इसके चलते इनको इलेक्ट्रिक शॉक भी देने पड़ते हैं। बिक्री रोकने के जिम्मेदार विभागों (खाद्य एवं औषधि एवं आबकारी) के अफसरों की अनदेखी के चलते शहर का नौनिहाल पढ़ने-लिखने की उम्र में नशे के दलदल में फंसता जा रहा है। बच्चों को इस दुष्चक्र से निकालने के लिए गरीब परिजन को मोटी रकम खर्च करना पड़ रही है, फिर भी उनके ठीक होने की गारंटी नहीं रहती है, क्योंकि वे फिर मुनक्का लेने लगते हैं। चिकित्सकों के मुताबिक यदि कोई व्यक्ति 15 वर्ष की उम्र से भांग का सेवन करने लगता है तो उसमें मानसिक विकार होने की संभावना 4 गुना ज्यादा बढ़ जाती है।

सभी पानवाले बेचते
मुझे यह नहीं पता कि मुनक्का से बच्चों को कितना नुकसान होता है। यह गोली तो अमूमन सभी पान वाले बेचते हैं। यदि हानि पहुंचती है तो सरकार ने बिक्री बंद करवा देना चाहिए।  जमनाप्रसाद, पान की दुकान का मालिक

पाचक का लाइसेंस
पान की दुकानों पर मिलने वाली मुनक्का का लाइसेंस उसको बनाने वाले आयुर्वेदिक पाचक औषधि के रूप में लेते हैं। हम कंटंेट की जांच करवाएंगे।  कमलेश सोलंकी, आबकारी अधिकारी

बिजली के शॉक
 मुनक्का से युवावर्ग तबाह हो रहा है। इसके सेवन से बच्चों में पागलपन बढ़ रहा है और उन्हें बिजली के शॉक तक दिए जा रहे हैं। महाराष्ट्र में मुनक्का की बिक्री पर प्रतिबंध है।  नीतू शर्मा, अध्यक्ष, आश्रयसेवा ट्रस्ट

बच्चे शुरुआत में अपने साथियों के कहने से कभी कभार मुनक्का खाने लगते हैं। कुछ समय बाद हर दिन एक गोली खाने लगते हैं और फिर 10-10 गोली प्रतिदिन की आदत तक हो जाती है। भांग के शिकार मरीजों को ठीक करने में चिकित्सकों को भी काफी मशक्कत करना पड़ती है।  डॉ. सुरेश अग्रवाल, इंचार्ज, अंकुर रिहेब सेंटर

मुनक्का की बिक्री पर कोई रोक नहीं होने से हर उम्र के लोग इसका सेवन करते हैं। इसके सेवन से लोग पागलपन का शिकार हो रहे हैं। मनोचिकित्सालय में नशे के कई रोगी भर्ती होते हैं। किशोरावस्था में इसके सेवन से मानसिक विक्षिप्त होने सहित कई खतरे रहते हैं।  डॉ. रामगुलाम राजदान, अधीक्षक, मानसिक रोग चिकित्सालय

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