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चार मालिक बदले, दो मंजिलें टूटकर नई बनीं, फिर भी निगम को नजर नहीं आई सरवटे की सबसे ऊंची जानलेवा इमारत

News - 10 लोगों की जान लेने वाली एमएस होटल की इमारत के मालिक चार बार बदल चुके थे। यहां अवैध तरीके से निर्माण कार्य रात में...

Dainik Bhaskar

Apr 02, 2018, 05:20 AM IST
चार मालिक बदले, दो मंजिलें टूटकर नई बनीं, फिर भी निगम को नजर नहीं आई सरवटे की सबसे ऊंची जानलेवा इमारत
10 लोगों की जान लेने वाली एमएस होटल की इमारत के मालिक चार बार बदल चुके थे। यहां अवैध तरीके से निर्माण कार्य रात में होता था। दो मंजिल और बनने के बाद वह सरवटे क्षेत्र की सबसे ऊंची बिल्डिंग बन गई थी, लेकिन निगम के अफसरों को नजर नहीं आया। हादसे के बाद से होटल संचालक शंकर परवानी फरार है। उस पर धारा 304 के तहत गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया गया है।

उधर भोपाल से बचाव दल के मौके पर पहुंचने से पहले ही मलबा रविवार सुबह तक उठा लिया गया था। प्रशासन ने हादसे में मृत लोगों के परिजन को दो-दो लाख रुपए मुआवजा देने की घोषणा की है। सीएम शिवराज सिंह चौहान ने घटना की उच्च स्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं। इसके लिए उन्होंने एक समिति गठित की है, जिसे 7 दिन में जांच पूरी करने को कहा है।

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शंकर परवानी होटल मालिक



1. होटल मालिक रात में करता था अवैध निर्माण

दिन में सरवटे बस स्टैंड के आसपास ट्रैफिक ज्यादा रहता है, इसलिए होटल मालिक शंकर परवानी ने अवैध निर्माण रात में किया। दिन में काम करने पर अवैध निर्माण नजर में भी आ सकता था। जर्जर हो चुकी होटल पर धीरे-धीरे काम करवाकर उसने दो मंजिल और तान दी थी।

2. बगैर पिलर की होटल, दीवारें थीं खोखली

स्थानीय रहवासियों का कहना है कि एमएस होटल की बिल्डिंग बरसों पुरानी थी। उस समय पिलर बनाकर निर्माण नहीं होता था। मोटी-मोटी दीवारें बनाकर बिल्डिंग बनाई जाती थी। दीवारें खोखली हो चुकी थी।

3. होटल संचालक नहीं लेते निर्माण की परमिशन

सरवटे बस स्टैंड के आसपास कोई भी होटल संचालक या दुकानदार ने नई बिल्डिंग बनाने के लिए परमिशन नहीं ली है, जबकि सबके प्रतिष्ठान नए हो चुके हैं। नई परमिशन लेने पर उन्हें पार्किंग के लिए प्लॉट का 50 फीसदी हिस्सा पार्किंग के लिए छोड़ना पड़ता।









इतना हिस्सा छोड़ने पर निर्माण के लिए जगह कम बचती। इसलिए ज्यादादार होटल संचालकों ने पुरानी बिल्डिंग की मरम्मत करवा ली। कुछ ने निगम से मरम्मत के लिए परमिशन ली, जबकि कुछ ने बगैर परमिशन ही यह काम करवा लिया।



होटल में जमीन से छत तक हो रहा था अवैध काम फाइल 1 के साथ

बूढ़ी बिल्डिंग के बेसमेंट से लेकर छत तक तक होटल मालिक ने अवैध निर्माण कर रखा था। बेसमेंट का उपयोग नगर निगम के नियमों के अनुसार केवल पार्किंग के सिवाय कुछ नहीं किया जा सकता, लेकिन होटल मालिक ने अवैध तरीके बेसमेंट बनाने के बाद उसमें सामान रखना शुरू कर दिया। यही नहीं दो मंजिल अवैध बनाने के बाद बची हुई छत पर भी सामान रखा रहता था। इस तरह अवैध निर्माण से लदी होटल में सामान का भार भी था। बगैर पिलर की बिल्डिंग में बेसमेंट बनाने का काम होटल संचालक परवानी ने आसानी से कर लिया था। उसने अंदर खुदाई के बाद कब कर ली और काम पूरा कर लिया, यह पड़ोस के दुकानदारों को भी पता नहीं चला। निगम की यह बड़ी लापरवाही थी कि जर्जर बिल्डिंग में पहले बेसमेंट खोदकर बना लिया गया और पता नहीं चला।



- मरम्मत के लिए कभी आवेदन नहीं दिया

निगम में नई बिल्डिंग परमिशन के अलावा मरम्मत के लिए भी नक्शा पास कराना पड़ता है, लेकिन परवानी ने कभी मरम्मत कराने के लिए निगम में आवेदन नहीं किया। बेसमेंट के अलावा दो नई बिल्डिंग बगैर अनुमति के ही तान दी गई।





ईंट-चूने की जुड़ाई से बनी थी होटल

एमएस होटल का निर्माण लोड बैयरिंग स्ट्रक्चर से हुआ था। इसमें सीमेंट कांक्रीट के बजाय ईंट-चूने का ज्यादा प्रयोग होता है।



होटल मालिक ने पार्टिशन कर बना दिए थे छोटे-छोटे कमरे

रहवासी व व्यापारियों ने बताया पूरी होटल गर्डर फर्शी की बनी थी। उस पर दो मंजिला अतिरिक्त बनाकर होटल मालिक ने कमरों में भी पार्टीशन कर छोटे-छोटे कमरे बना दिए थे। कुछ दिन पहले होटल के पीछे प्लॉट पर खुदाई होने से होटल के पिछले हिस्से में पानी भरा गया था। इससे उसकी नींव कमजोर हो गई थी। चूहों ने होटल के बेसमेंट में बिल बनाकर काफी खोखला कर दिया था। होटल में अनैतिक गतिविधियां भी चलती थीं।

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मलबा हटाने की जल्दी, चढ़ा दी आठ जेसीबी, शवों को नुकसान

निगम को होटल गिरने के बाद मलबा हटाने की इतनी जल्दी थी कि आठ जेसीबी मलबे पर चढ़ा दी थी। जबकि किसी को पता नहीं था कि मलबे के अंदर कितने लोग दबे हुए हैं। एक शव सबसे आखिरी में तो ऐसा निकला था जिसे पोटली में बांधकर एमवाय अस्पताल पहुंचाया गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने इतने जेसीबी चलाने पर एतराज भी जताया था।







जेसीबी से लोगों के दबने, गंभीर घायल होने का भी डर था।



- बचाव दल आया तब तक मलबा हट चुका

जिला प्रशासन, होमगार्ड द्वारा सालभर आपदा से बचाव के लिए अभ्यास किया जाता है। लेकिन होटल गिरने के बाद रेसक्यू के रूप में बड़ी लापरवाही देखने को मिली। भोपाल से एक बचाव दल मौके पर आता उसके पहले मलबा उठ चुका था। स्थानीय लोग, निगम के अमले ने दो लोगों को जिंदा निकाला। जेसीबी से मलबा हटने के बाद जो लोग निकले वह सब मर चुके थे।

रविवार सुबह तक सारा मलबा उठा लिया गया।

पान वाले की बात मान सतर्क हो जाते तो बच जाती 10 जिंदगी

होटल एमएस की दीवार दिन में ही धंस गई थी। इस बारे में एक पान दुकान संचालक प्रमोद जैन ने होटल मालिक को आगाह भी किया था। समय रहते उसकी बात पर गौर किया जाता तो 10 जिंदगियां बच जातीं। होटल मालिक परवानी के खातीवाला टैंक स्थित घर पर पुलिस पहुंची तो पता चला वह प|ी और दो लड़कों के साथ घर पर ताला लगाकर भाग गया है।

भीतर ही भीतर दो मंजिलें तोड़कर बना दी, बीओ, बीआई को पता भी नहीं चला

4. सरवटे जैसा व्यस्त इलाका ही चूक गया

नगर निगम में नक्शा मंजूरी, अवैध निर्माण रोकने के लिए खतरनाक भवनों की निगरानी के लिए जोन स्तर पर बिल्डिंग अफसर, बिल्डिंग इंस्पेक्टर नियुक्त हैं, इनके अधीन जोन का पूरा स्टाफ रहता है। सरवटे बस स्टैंड जैसे इलाके में इनमें से किसी को नहीं दिखा कि होटल की इमारत जर्जर हो रही है।

5. निगम की सर्वे सूची में होटल नहीं आई

हर साल मानसून के पहले जोनवार पुराने भवनों का स्ट्रक्चरल सर्वे होता है। खतरनाक भवनों की सूची में ये होटल क्यों नहीं आई। ये दूसरी बार अनंत चतुर्दशी के समय भी होता है, तब भी अफसरों की नजरों से कैसे चूक गई।

6. इतना बड़ा निर्माण अछूता रह गया

गली-मोहल्ले के छोटे से निर्माण में बीओ, बीआई नोटिस देने पहुंच जाते हैं, चार मंजिला इमारत में ऊपरी दो मंजिलें तोड़कर फिर से बनाई, तल मंजिल पर बदलाव होते रहे, मटेरियल आया, पर किसी ने नोटिस तक नहीं दिया।

7. मालिक बदले, फिर भी नजरअंदाज किया

40 साल में इसके चार-पांच बार मालिक बदले। हर बार रजिस्ट्री के बाद निगम के संपत्तिकर विभाग में नामांतरण हुआ होगा। तब अफसरों ने नक्शे, निर्माण को लेकर जांच नहीं की।

8. शिकायत का इंतजार करते रहे

निगम के अनुसार सामने वाली दिलीप होटल की कई शिकायतें हुईं,लेकिन एमएस होटल की कोई नहीं।

निगम में होटल की फाइल ही नदारद मिली

रविवार को दिनभर की मशक्कत के बाद जैसे-जैसे 40 साल तक का रिकॉर्ड मिला, जिसमें अंतिम बार प्रॉपर्टी डॉ. पहाड़िया के नाम पर दर्ज होने और संपत्तिकर शंकर पारवानी के नाम से जमा होने का जिक्र है। उसके बाद तीन बार इसके सौदे हुए। निगम सोमवार सुबह रिकॉर्ड रूम खोलकर एमएस होटल की फाइलें निकालेगा।

मलबे में चली गई लाखों रुपये से भरी एटीएम मशीन, पुलिस ने की जब्त

मलबे के साथ आईसीआईसीआई बैंक की एटीएम मशीन भी एक ट्रक में चली गई थी। मलबा लोखंडे ब्रिज के यहां ट्रक से खाली करवाया तो उसमें मशीन नीचे गिरी। सूचना पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और मशीन जब्त कर लाई।







पुलिस ने घटना के तत्काल बाद ही बैंक अधिकारियों को संपर्क कर एटीएम मशीन मलबे में दबने की सूचना दे दी थी तो वे भी मौके पर पहुंच गए थे। बताते हैं मशीन में 4 से 5 लाख के करीब कैश था। जो नगर निगम कर्मचारियों की सूझबूझ से सुरक्षित हो गया।

जब हादसा हो गया तब नगर निगम ने तोड़े दो जर्जर मकान

एमएस होटल ढहने के बाद नगर निगम को कागजों में छिपे दो जर्जर मकान नजर आ गए। ये मकान ऐसे थे जिनकी दीवारें जेसीबी के पंजा लगाते ही गिर गईं। निगम हर साल बारिश से पहले जर्जर मकान चुन तो लेता, लेकिन उन्हें खाली नहीं कराता न ही ढहाता। अब एमएस होटल हादसे के बहाने पूरे शहर में खतरनाक घोषित मकानों को गिराने का कह रहा है।







रिमूवल अधिकारी वीरेंद्र उपाध्याय के मुताबिक रविवार सुबह ढहाए दोनों मकानों में से एक जी प्लस टू था और दूसरा जी प्लस वन। दोनों मकान होटल से सटकर बने थे और इन्हें शनिवार रात खाली करवा लिया था। पिछले साल निगम ने इन्हें जर्जर मकानों की श्रेणी में डाल बारिश से पहले खाली करने का बोल दिया था।

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