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बोलने की कला में निखार लाने के लिए की भाषण प्रतियोगिता

विश्व पटल पर महात्मा गांधी सिर्फ एक नाम नहीं अपितु शांति और अहिंसा का प्रतीक हैं। उनके बारे में प्रख्यात...

Dainik Bhaskar

Feb 01, 2018, 02:10 PM IST
बोलने की कला में निखार लाने के लिए की भाषण प्रतियोगिता
विश्व पटल पर महात्मा गांधी सिर्फ एक नाम नहीं अपितु शांति और अहिंसा का प्रतीक हैं। उनके बारे में प्रख्यात वैज्ञानिक आइंस्टीन ने कहा था कि -"हज़ार साल बाद आने वाली नस्लें इस बात पर मुश्किल से विश्वास करेंगी कि हाड़-मांस से बना ऐसा कोई इंसान भी धरती पर कभी आया था।' गांधीजी पर इस तरह के विचार वामा साहित्य मंच की भाषण प्रतियोगिता में कहे गए।

ये रहे विनर्स

गांधीजी की पुण्यतिथि पर इस प्रतियोगिता में मंचकी सदस्याओं ने इसी मिले-जुले रोचक और गंभीर विषय समाहित किए गए। वैजयंती दाते, वसुधा गाडगिल और वीनिता शर्मा की टीम ने इसका संयोजन किया। इस प्रतियोगिता का मकसद सदस्याओं में वक्तृत्व कला में निखार लाना है। विषय भी सरलतम रखे गए थे। जो कुशल वक्ता हैं उन्हें गंभीर विषयों की पर्ची उठानी थी और जो प्रथम प्रयास कर रहे हैं उन्हें रोचक और मजेदार विषयों की पर्चियों के ढेर से एक पर्ची का चयन करना था।पूर्व अध्यक्ष पद्मा राजेंद्र, सचिव ज्योति जैन ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रासंगिकता पर अपने विचार व्यक्त किए। निर्णायक पद्मा राजेंद्र और ज्योति जैन थी। भाषण प्रतियोगिता में पहला पुरस्कार निधि जैन, दूसरा पुरस्कार बबिता काडकिया और तीसरा पुरस्कार शोभा प्रजापति को दिया गया।

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