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हाईराइज और ग्रुप हाउसिंग की प्रकृति एक जैसी ही है सरकार दोनों की गलत व्याख्या कर रही : याचिकाकर्ता

शहर में प्रस्तावित व निर्माणाधीन हाईराइज, ग्रुप हाउसिंग में घनत्व की अनदेखी के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर शासन का...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 02:10 PM IST

शहर में प्रस्तावित व निर्माणाधीन हाईराइज, ग्रुप हाउसिंग में घनत्व की अनदेखी के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर शासन का जवाब आने के बाद बुधवार को याचिकाकर्ता ने एक रिजाॅइंडर हाई कोर्ट में पेश किया। इसमें कहा है कि हाईराइज और ग्रुप हाउसिंग की प्रकृति लगभग एक जैसी ही है। सरकार इसकी गलत व्याख्या कर रही है। भूमि विकास नियम में मल्टी फ्लैट सिस्टम को भी ग्रुप हाउसिंग माना गया है। ग्रुप हाउसिंग में भी घनत्व के प्रावधान लागू होते हैं, जबकि शासन ने अपने जवाब में ग्रुप हाउसिंग पर घनत्व के पैमाने लागू नहीं होने की बात लिखी है। गुरुवार को हाई कोर्ट में इस याचिका पर सुनवाई होगी।

अंतरिम आदेश खत्म करने की मांग

नगर तथा ग्राम निवेश विभाग ने हाई कोर्ट के द्वारा जारी किए गए अंतरिम आदेश को खत्म करने की मांग की है। शासन ने अपने जवाब में लिखा है कि इस याचिका को समाप्त किया जाना चाहिए। भूमि विकास नियम के प्रावधानों की गलत व्याख्या कर याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता के वकील रवींद्र सिंह छाबड़ा ने शासन के जवाब पर प्रति उत्तर पेश कर आपत्ति दर्ज कराई है। हाई कोर्ट की डिविजन बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश हैं कि शहर में हाईराइज, ग्रुप हाउसिंग का निर्माण बिल्डर अपने जोखिम पर जारी रख सकते हैं। इस याचिका का जो भी निर्णय होगा, वह उन पर प्रभावी रहेगा।

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