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शिक्षा के साथ संस्कारों का होना आवश्यक है- सिंह

News - भास्कर संवाददाता | आलीराजपुर गायत्री परिवार का शिक्षा आंदोलन हम सभी के लिए अनुकरणीय है। भारतीय संस्कृति ज्ञान...

Dainik Bhaskar

Apr 02, 2018, 03:40 AM IST
शिक्षा के साथ संस्कारों का होना आवश्यक है- सिंह
भास्कर संवाददाता | आलीराजपुर

गायत्री परिवार का शिक्षा आंदोलन हम सभी के लिए अनुकरणीय है। भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा से विद्यार्थियों के सामान्य ज्ञान में वृद्धि होती है। जिले के विद्यालयों, छात्रावासों और आश्रमों में भी बाल संस्कार शालाओं के संचालन के प्रयास किए जाएंगे। जिससे विद्यार्थियों में समय का सदुपयोग, स्वच्छता, नियमितता और जागरूकता आ सके। भावी पीढ़ी के निर्माण में गायत्री परिवार द्वारा संचालित बाल संस्कार शालाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। विद्यार्थियों में शिक्षा के साथ ही संस्कारों का होने भी आवश्यक है।

यह बात गायत्री शक्तिपीठ में आयोजित बाल संस्था शाला के जिला स्तरीय प्रशिक्षण के अवसर पर सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग सतीशसिंह ने कही। प्रशिक्षण कार्यक्रम में गायत्री परिवार के प्रांतीय प्रतिनिधि डाॅ. शिवनारायण सक्सेना ने कहा कि प्रथम पाठशाला माता-पिता है। वे संस्कारित होंगे तो बच्चे संस्कारित होंगे। वर्तमान परिस्थिति में बच्चों की गतिविधियों पर माता-पिता का ध्यान देना आवश्यक है। भावी पीढ़ी के निर्माण में माता-पिता और शिक्षक की समान भूमिका है। आधुनिकता का मकड़जाल बच्चों के मस्तिष्क पर सुसंस्कारों की नहीं वरन कुसंस्कारों की छाप छोड़ रहा है। ऐसे समय में संस्कारों का साहित्य आवश्यक है। माता-पिता पर बच्चों के क्रिया कलापों को उत्कृष्ट बनाने की जवाबदेही है।

कार्यक्रम

गायत्री शक्तिपीठ में बाल संस्था शाला का जिला स्तरीय प्रशिक्षण आयोजित, 40 आचार्य व दीदीयों को किया गया प्रशिक्षित

प्रशिक्षण में बालकों में दिव्य गुणों का विकास, लक्ष्य भेदना, संस्कृति का ज्ञान जैसे विषय शामिल किया

गायत्री शक्तिपीठ में बाल संस्कार शाला का प्रशिक्षण शिविर में मौजूद महिलाएं।

शिक्षा आंदोलन जिला प्रभारी मधुबाला शर्मा ने बाल संस्कार शाला के प्रशिक्षण में बालकों में दिव्य गुणों का विकास, लक्ष्य भेदना, संस्कृति का ज्ञान, स्वाध्यायी, स्वावलंबी, स्वयंसेवी, कार्यकौशल बढ़ाना, शालीन व्यक्तित्व गढ़ना जैसी महत्वपूर्ण अवधारणाओं के विषय में प्रशिक्षणार्थी आचार्यों व दीदीयों का दिया। कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथियों का स्वागत रुपचंद टवली और गीता राठौड़ ने किया। देवमंच पर दीप प्रज्ज्वलन कर प्रशिक्षण का शुभारंभ सहा. आयुक्त सिंह और सहा. संचालक महेंद्र गोयल ने किया। प्रज्ञागीत की प्रस्तुति वंदना वाणी ने दी। आलीराजपुर, जोबट, चंद्रशेखर आजाद नगर, सोंडवा, नानपुर के 40 आचार्य व दीदीयों को प्रशिक्षित किया गया। अभा ब्राह्मण महासभा की उपाध्यक्ष पूर्णिमा व्यास, पार्षद सुनीता मेहता, योग शिक्षक निरंजन मेहता, सिंधु कावले, प्रतिभा पंचोली, ज्योति ठाकुर, उपस्थित थे। प्रशिक्षण को रोचक बनाने व बाल एकांकी प्रदर्शन व्यवस्था में प्रेमलता चौहान, मालती वाणी, किरण कोदे, सेवंता वाणी, नेहा वाणी, सोनल गणावा, ममता वाणी, ललिता चौहान का सहयोग रहा। संचालन शक्तिपीठ व्यवस्थापक संतोष वर्मा ने किया।

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