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हत्या से चार गुना ज्यादा रेप के मामले, 46% केस में घर में घुसकर दुष्कर्म

76 फीसदी ज्यादती की शिकार वही महिलाएं बनी हैं जो या तो घर में रहती थीं या उनके पास स्थायी रोजगार नहीं है।

Dainik Bhaskar

Feb 09, 2018, 07:09 AM IST
Four times more  cases miss behave with women

इंदौर. घर में ही बहू-बेटियां सुरक्षित नहीं हैं... यह हम नहीं, बल्कि पुलिस कह रही है। रेप के बढ़ते मामलों को देखते हुए पुलिस ने पहली बार एक साल में हुए 1086 मामलों में बारीकी से विश्लेषण किया तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। यह विश्लेषण ऐसी सोच रखने वालों को भी एक आईना दिखा रहा है जो ज्यादती और छेड़छाड़ से बचने के लिए महिलाओं को घर में ही रहने की नसीहत देते हैं, क्योंंकि इन मामलों में 76 फीसदी ज्यादती की शिकार वही महिलाएं बनी हैं जो या तो घर में रहती थीं या उनके पास स्थायी रोजगार नहीं है।

- 46 फीसदी दुष्कर्म महिला के घर में ही हुए। इंदौर जोन के 8 जिलों मंे हत्या का प्रतिशत 0.82 है, लेकिन ज्यादती का प्रतिशत इससे 4 गुना 2.35 प्रतिशत है। आर्थिक, सामाजिक व उम्र के अनुसार विश्लेषण कर पुलिस ने 2017 में हुए 1086 प्रकरणों का विश्लेषण किया। इसमें पीड़िता के साथ आरोपी की भी वैवाहिक स्थिति, आरोपी और पीड़िता का व्यवसाय, पीड़िता और आरोपी की आयु, आरोपी का पीड़िता से संबंध, आरोपी का अापराधिक रिकॉर्ड, ज्यादती का वास्तविक कारण, घटनास्थल का प्रकार और घटना के समय को आधार बनाकर पड़ताल की गई।

96 फीसदी का पहले नहीं था रिकॉर्ड
- 96 प्रतिशत आरोपियों का कोई पूर्व रिकॉर्ड नहीं था। कुल 1388 आरोपियों में से 4 आरोपियों का पूर्व में ज्यादती, 9 आरोपियों का छेड़छाड़, 3 आरोपियों का गंभीर अपराध और 32 आरोपियों का साधारण अपराध का रिकाॅर्ड मिला। स्पष्ट है कि इस अपराध का अापराधिक पृष्ठभूमि से कोई संबंध नहीं है।

14% आकस्मिक उत्तेजना के मामले
एक फीसदी केस बदला लेने के लिए हुए, जबकि 14 फीसदी केस आकस्मिक उत्तेजना में हुए। 34 फीसदी अपराध शादी का झांसा देकर व 30 फीसदी नाबालिग को भगाकर ले जाने के कायम हुए। अपराध के घटनास्थल का वर्गीकरण बता रहा है कि लगभग आधे अपराध (46 प्रतिशत) घर के अंदर ही घटित हुए हैं। 35 प्रतिशत अपराध सुबह 10 से शाम 4 के बीच हुए, 35 प्रतिशत अपराध शाम 4 से रात 10 बजे के बीच हुए।

2017 में हुए 1086 मामलों की जांच में सामने आए आंकड़े

केस 1 : शादी का झांसा देकर किया दुष्कृत्य

तीन महीने पहले कनाड़िया पुलिस ने एक युवती की शिकायत पर युवक के खिलाफ ज्यादती का केस दर्ज किया। युवक शादीशुदा था। वह शादी का झांसा देकर युवती के साथ लिव इन रिलेशनशिप में रहा। त्योहार पर युवती घर गई तो वह घर खाली कर भाग गया। मामला एक अपार्टमेंट का है। 25 वर्षीय युवती की शिकायत पर पुलिस ने नीतेश पटेल निवासी देवास पर केस दर्ज किया। युवती की इंदौर में एमसीए करते हुए नीतेश से मुलाकात हुई थी।

केस 2 : ममेरी बहन को ब्लैकमेल करता था
जून 2017 में चंदन नगर पुलिस ने 17 वर्षीय किशोरी (ममेरी बहन) की शिकायत पर इंजीनियरिंग छात्र गोलू उर्फ आकाश को पकड़ा। वह तीन साल से ब्लैकमेल कर ज्यादती कर रहा था। युवती के जहर खाने पर हुआ खुलासा।

केस 3 : रिश्तेदारों ने किया सामूहिक दुष्कर्म
राजंेद्र नगर पुलिस ने चार माह पूर्व 20 वर्षीय महिला की रिपोर्ट पर कमलेश लोधी और सुरेंद्र लोधी के खिलाफ गैंगरेप का केस दर्ज किया। दोनों महिला के रिश्तेदार हैं। उसे घुमाने रीजनल पार्क ले गए थे।

नौकरीपेशा सिर्फ 1 फीसदी शिकार
- सरकारी, प्राइवेट व स्थायी नौकरी कर रही महिलाओं में सिर्फ 1 फीसदी ज्यादती का शिकार बनीं। साफ है कि यदि महिलाओं को स्वावलंबी बनाने की कोशिश हो तो परिदृश्य बदल सकता है।

परिचित पर भरोसा कैसे करें?
- 52 प्रतिशत आरोपी सगे-संबंधी, रिश्तेदार, रहवासी, सहकर्मी, सहपाठी या व्यावसायिक रूप से पीड़िता से संबंधित रहे। 10 फीसदी आरोपी परिवार के, 24 फीसदी अन्य रिश्तेदार और 66%पड़ोसी रहे हैं।

आरोपियों की आयु 19 से 25 के बीच
- आरोपी की आयु को वर्गीकृत कर विश्लेषण करने से स्पष्ट है कि आधे से ज्यादा आरोपियों की उम्र 19 वर्ष व 25 वर्ष के बीच है। इस वर्ग को मार्गदर्शन की आवश्यकता है।

पीड़िताएं और आरोपी दोनों अविवाहित

- 77 प्रतिशत पीड़िताएं और 62 प्रतिशत आरोपी अविवाहित निकले। इनमें ज्यादातर मामले एेसे थे, जिनमें पीड़िता के नाबालिग होने और संबंध बन जाने के कारण रिपोर्ट हुई।

सुधार कैसे :

- सरकारी व गैर सरकारी संस्थानों को इस वर्ग में अपराध एवं आयु की प्राथमिकता के संबंध में जागरूक कर इस पर नियंत्रण किया जा सकता है।

जागरूकता से ही बचाई जा सकती हैं महिलाएं
- एडीजी इंदौर जोन अजय शर्मा ने बताया कि बलात्कार के कारणों में सामान्य अापराधिक न्याय विज्ञान से अलग हटकर सामाजिक जागरूकता, साक्षरता, स्वावलंबन एवं समय रहते मनोवैज्ञानिक खोखलेपन का परिवार में ही निराकरण करने से संख्यात्मक रूप से समाज के घिनौने चेहरे का प्रदर्शन करने वाले अपराध के आयामों पर नियंत्रण किया जा सकता है।

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