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मुआवजा प्रस्तावित कर दिया तो उसे भुगतान माना जाएगा : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की खंडपीठ ने जमीन अधिग्रहण के बाद मुआवजे के संबंंध में अहम फैसला दिया है।

Danik Bhaskar | Feb 09, 2018, 06:59 AM IST

इंदौर . सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की खंडपीठ ने जमीन अधिग्रहण के बाद मुआवजे के संबंंध में अहम फैसला दिया है। शीर्ष अदालत ने भूमि अधिग्रहण अधिनियम (2013) की धारा 24 को परिभाषित करते हुए कहा है कि अधिग्रहण के बाद संबंधित संस्था ने मुआवजा देना प्रस्तावित कर दिया है तो उसे भुगतान करना माना जाएगा। अधिग्रहण करने वाली संस्थाएं मुआवजा देने के लिए नोटिस, अधिसूचना जारी करती हैं, लेकिन जमीन मालिक इसकी अनदेखी कर मुआवजा लेने नहीं आते। बाद में अदालतों में अधिग्रहण को चुनौती देते हैं।

- जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस आदर्शकुमार गोयल व एक अन्य जज की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया है। याचिकाकर्ता शैलेंद्र समेत 54 लोगों की याचिका पर यह फैसला आया है। इंदौर विकास प्राधिकरण, एकेवीएन समेत विभागों की योजनाओं में जमीन अधिग्रहण किया गया था।मुआवजा नहीं मिलने को आधार बनाकर याचिकाएं दायर की गई थीं।

हाई कोर्ट से याचिकाएं खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की गई थी। आईडीए की स्कीम-140 व अन्य योजनाओं के प्रभावित लोगों ने अर्जी लगा रखी थी।

निरस्त हो चुकी स्कीम पर फैसला लागू नहीं
- आईडीए की कई योजनाएं रद्द हो चुकी हैं। इसके बावजूद आईडीए द्वारा जमीन मालिकों को मुक्त नहीं किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला ऐसी योजनाओं पर लागू नहीं होगा।
मुआवजे पर भी असर नहीं
- फैसले से मुआवजे पर कोई असर नहीं पड़ेगा। परेशानी केवल इतनी है कि जमीन मालिक नए अधिग्रहण नियम के हिसाब से पैसा मांग रहे हैं, जबकि आईडीए ने 2013 के पहले कई योजनाओं में मुआवजे के लिए सूचना जारी की थी।