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पुलिस के पास 10 % महिला फोर्स, पर फील्ड में 1 % भी नहीं, पहरे और गश्त से बचती हैं

इंदौर पुलिस में कहने को करीब 10 प्रतिशत महिला फोर्स उपलब्ध है, मगर नाइट ड्यूटी, संतरी पहरा, हेड मोहर्रिर जैसी ऐसी ड्यूट

Dainik Bhaskar

Jan 02, 2018, 05:57 AM IST
Police force 10% female force guard from guard and patrol

इंदौर. इंदौर पुलिस में कहने को करीब 10 प्रतिशत महिला फोर्स उपलब्ध है, मगर नाइट ड्यूटी, संतरी पहरा, हेड मोहर्रिर जैसी ऐसी ड्यूटी में महिलाएं नजर नहीं आतीं। यह ड्यूटी आरक्षक से एएसआई तक की महिला अधिकारियों की होती हैं। यहां महिला और पुरुष का लिंगभेद दिखता है, मगर एसआई से लेकर एसपी तक महिलाएं पुरुषों के बराबर, कंधे से कंधा मिलाकर ड्यूटी करती हैं। फील्ड में गश्त बढ़े तो शहर में महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों में कमी हो सकती है।

- भास्कर ने थाना प्रभारियों, सुपरवाइजनिंग अधिकारियों के पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज के ट्रेनर्स और अधिकारियों से बात की तो विरोधाभासी बातें सामने आईं। फील्ड की पुिलस का कहना है महिला आरक्षकों को सही ट्रेनिंग ही नहीं मिलती, इसलिए वे आराम पसंद ड्यूटी चाहती हैं। सख्ती करने पर शिकायत की धमकी देती हैं। जबकि ट्रेनिंग कॉलेज का दावा है कि यहां महिलाओं से संतरी पहरे के साथ नाइट ड्यूटी भी करवाई जाती है। इसमें उनका प्रदर्शन पुरुषों से भी बेहतर होता है।

33 प्रतिशत फील्ड ड्यूटी कैसे होगी?
- मप्र पुलिस की भर्ती में 33 % महिला आरक्षण है। इसका मतलब पुलिस की ड्यूटी में 33 प्रतिशत का भार महिलाओं के कंधों पर होगा। व्यवहारिकता इससे बिलकुल उलट है। इंदौर के सभी थानों में 2 से 5 तक महिला बल है।

- भास्कर ने जिले के सभी 44 थानों से जानकारी निकाली तो पता चला एक भी थाने में महिला आरक्षक या प्रधान आरक्षक नाइट ड्यूटी नहीं करती। संतरी पहरा और हेडमोहर्रिर का काम भी नहीं किया जाता। यह सारी ड्यूटी पुलिस महकमे में कठिन मानी जाती हैं।

सारी छुटि्टयां चाहिए, शिकायत की धमकी

- थाना प्रभारियों ने बताया महिला आरक्षक, प्रधान आरक्षक और एएसआई हमेशा आराम की नौकरी चाहती हैं।

- पहले तो यह जिले में पोस्टिंग होने के बाद ही लूप लाइन में ड्यूटी लगवा लेती है, जिन्हें थाने भेजा जाता है वे काम से बचने के बहाने ढूंढ लेती हैं।
- तबीयत खराब हो रही है, घर में मेहमान आ रहे हैं, हम रात 10 बजे बाद नहीं रुकेंगे सहित महिला आरक्षकों द्वारा अलग-अलग बहाने बताए जाते हैं।
- अधिकारियों का कहना है कि महिला आरक्षकों को सही ट्रेनिंग नहीं मिलती। वे ड्यूटी से बचने के बहाने ढूंढती रहती हैं।

ट्रेनिंग में तो जज्बे से नाइट ड्यूटी व जंगल कैम्प

- पीटीसी एसपी मनीषा पाठक सोनी ने कहा ट्रेनिंग में महिला और पुरुष में कोई फर्क नहीं है। जितनी कठिन ट्रेनिंग पुरुष आरक्षक को करना होती है उतनी ही महिला आरक्षक करती हैं।
- हम उन्हें बताते हैं कि पुलिस की नौकरी आपने स्वेच्छा से चुनी है इसलिए कोई रियायत की उम्मीद नहीं करें।
- महिलाओं को परिवार का दायित्व भी निभाना है तो हम सिखाते हैं कि इसके लिए वे परिवार और ससुरालवालों का बैकअप रखें।
- नाइट ड्यूटी, संतरी पहरा, जंगल में नाइट कैम्प, फायरिंग सहित सारे टास्क महिलाएं बखूबी पूरा करती हैं। पता नहीं समाज में उन्हें क्या मानसिकता से देखा जाता है जो वे काम नहीं करतीं।

महिला पुलिस पर सख्ती करने के साइड इफैक्ट...

- ऐसा नहीं है कि महिला आरक्षकों को ड्यूटी में छूट हर अधिकारी देते हैं। कुछ अधिकारियों ने सख्ती दिखाई लेकिन उन्हें इसका साइड इफैक्ट झेलना पड़ा। संतरी ड्यूटी लगाई पड़ी फटकार: करीब डेढ़ साल पहले रावजी बाजार थाने के टीआई ने महिला आरक्षक को संतरी ड्यूटी पर लगाया था। 3-4 दिन बाद ही खबर पूरे महकमे में फैल गई। टीआई की मंशा थी कि उन्हें शाबाशी मिलेगी मगर उल्टा सीनियर अधिकारियों ने फटकार लगा दी।

- एएसआई मेरे पीछे पड़े हैं: मल्हारगंज के एक एएसआई का कुछ महीने पहले दूसरे थाने तबादला कर दिया गया। कारण यह था कि उन्होंने एक महिला आरक्षक की ड्यूटी पहरे पर लगा दी थी। महिला आरक्षक ने आला अधिकारियों से शिकायत कर दी कि एएसआई उनके पीछे पड़े हैं।

एसआई और सीएसपी करती हैं गश्त
- जूनी इंदौर थाने की एक महिला आरक्षक ने एक साल में 4 माह छुट्टी ले ली। अधिकारी नहीं कुछ बोल सके जबकि इसी थाने की एक एसआई रात में 1 बजे तक गश्त करती हैं। जिला फोर्स में 3 महिला टीआई व 3 डीएसपी भी फील्ड में पोस्टेड हैं।

नया बल मिलेगा, व्यवस्था सुनिश्चित होगी
- डीआईजी हरिनारायणाचारी मिश्र का कहना है जिले में महिला पुलिस के लिए विशेष रियायत का प्रावधान नहीं, बराबरी से ड्यूटी करना है। महिलाएं ड्यूटी नहीं कर रही तो यह गलत है। हमें नया महिला बल मिलने वाला है। व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे।

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