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ग्रुप हाउसिंग, हाईराइज का निर्माण बिल्डर अपनी रिस्क पर करें : कोर्ट

हाईराइज बिल्डिंग के निर्माण में घनत्व के पैमाने की अनदेखी को लेकर दायर की गई जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने अंतरिम फैसला सु

Bhaskar News | Last Modified - Nov 11, 2017, 06:06 AM IST

  • ग्रुप हाउसिंग, हाईराइज का निर्माण बिल्डर अपनी रिस्क पर करें : कोर्ट
    इंदौर.हाईराइज बिल्डिंग के निर्माण में घनत्व के पैमाने की अनदेखी को लेकर दायर की गई जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने अंतरिम फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा इनका निर्माण बिल्डर फिलहाल अपने जोखिम पर ही करें। इस जनहित याचिका का जो निर्णय होगा वह इन पर प्रभावी रहेगा। वहीं हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसी हाई राइज बिल्डिंग में थर्ड पार्टी (संपत्ति खरीदने वाले, शोरूम लेने वाले, बैंक मॉर्टगेज) की भी जिम्मेदारी है कि वह पहले निर्माण के बारे में वेरीफिकेशन कराएं, हाईकोर्ट से भी अनुमति लें।हाईकोर्ट ने शासन को छह सप्ताह में विस्तृत जवाब और शपथ पत्र देने के लिए कहा है।
    - जस्टिस पीके जायसवाल, जस्टिस वेदप्रकाश शर्मा की डिविजन बेंच ने यह फैसला दिया है। हाईकोर्ट ने गुरुवार को याचिका पर सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था। शुक्रवार को अंतरिम आदेश जारी किया गया।
    - हाईकोर्ट ने अंतरिम फैसले में कहा है कि जिन बिल्डर को पूर्व में हाईराइज, ग्रुप हाउसिंग बनाने की परमिशन नगर तथा ग्राम निवेश विभाग से मिल गई है वह काम तो जारी रख सकते हैं, लेकिन जोखिम उनका रहेगा।
    यह है मामला
    - याचिका इस आधार पर दायर की गई है कि इंदौर में हाईराइज निर्माण के नक्शों को मंजूर करते वक्त रिहायशी घनत्व के पैमाने को ध्यान में नहीं रखा गया है। उदाहरण के तौर पर एक हेक्टेयर जमीन पर 125 लोग रह सकते हैं, लेकिन अनुमति इससे ज्यादा लोगों के रहने के हिसाब से दी गई है। शासन ने ही इसके नियम बनाए हैं और वही इसका पालन नहीं कर रहा।
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