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सुरेश इंजीनियरिंग वर्क्स: प्लास्टिक मशीन मैन्युफैक्चरिंग में सबसे अव्वल

क्वालिटी को सदैव सर्वोत्तम स्थान देने वाली इस कंपनी ने कम खर्च में हाईक्वालिटी मशीनों के निर्माण में अपनी पहचान बनाई है।

Dainikbhaskar.com | Last Modified - Nov 11, 2017, 09:53 AM IST

    • मशीन, जिसने सदियां बदल दीं और हमारी लाइफ स्टाइल भी। इन्हें बनाने वाले अक्सर याद किए जाते हैं क्योंकि उन्होंने इंसानी जीवन को सरल और सहज बनाया है। हालांकि 18वीं शताब्दी तक मशीनों के निर्माण में हाथी दांत का प्रयोग होता था, लेकिन महंगा और दुर्लभ होने के कारण नई तकनीक की जरूरत महसूस की जाने लगी। सन् 1868 में जॉन वेस्ली हयात ने प्लास्टिक मटेरियल जिसे सेल्यूलाइट भी कहा जाता है, की खोज की। बीते 40 से 50 वर्षों में आधुनिक ऑटोमैटिक यंत्र की मदद से बाज़ार में कई हाईक्वालिटी प्रोडक्ट उपलब्ध हुए। ऐसी ही एक मशीन बनाने वाली कंपनी है सुरेश इंजीनियरिंग वर्क्स।
      इंदौर की सुरेश इंजीनियरिंग वर्क्स का नाम प्लास्टिक निर्माण के लिए वर्ल्डक्लास मशीनों के लिए आज पूरे देश और दुनिया में भी काफी जाना-पहचाना है। क्वालिटी को सदैव सर्वोत्तम स्थान देने वाली इस कंपनी ने कम खर्च में हाईक्वालिटी मशीनों के निर्माण के लिए अपनी अलग पहचान बनाई है। सुरेश इंजीनियरिंग वर्क्स के पास एक्सट्रूशन मशीन की लंबी रेंज है। अपने 40 साल के सफर में इस कंपनी में प्लास्टिक निर्माण की कई प्रभावशाली मशीनें ईजाद की हैं, जो कि प्लास्टिक प्रोसेस और ऑपरेशन में बेजोड़ हैं।

      आज हम आपको The Visionaries of Madhya Pradesh श्रृंखला में इसी कंपनी के जनक जमनालाल शर्मा और उनके बेटे कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर सुरेश शर्मा से मुलाकात करा रहे हैं। अपनी 40 साल की यात्रा को जिस तरह उन्होंने बयां किया, वो जानिए-

      जमनालाल शर्मा, डायरेक्टर सुरेश इंजीनियरिंग वर्क्स
      - हमारी जड़ें राजस्थान में हैं, लेकिन हमारे पिता महू में फोरमैन थे।
      - महू में ही पिता के साथ हम पहले छोटा मोटा इंजीनियरिंग का काम करते थे, फिर इंदौर आकर काम सीखा।
      - 1970 में हमने किराए की मशीन से शुरूआत की थी और धीरे-धीरे अपना काम बढ़ाया।
      - हम पहले प्लास्टिक की डाई बनाते थे बाद में स्कोप बढ़ाते गए और काम मिलता गया। अब चाइना से इम्पोर्ट करते हैं औऱ दूसरे देशों को एक्सपोर्ट भी।
      - हम अब अपनी टेक्नोलॉजी के हिसाब से नई मशीनें भी बनाते हैं।
      - जैसे जैसे टेक्नोलॉजी बदलती है, हम उसी हिसाब से अपनी डिजाइन में भी बदलाव लाते हैं।
      - हम जो मटेरियल यूज़ करते हैं, वो ग्रेडेड मटेरियल होता है।
      - हर मशीन कड़े क्वालिटी चेक से गुजरती है और उसका परफॉर्मेंस बेहतर से बेहतर बनाया जाता है।
      - हम कई ट्रायल के बाद ही उसे क्लाइंट को देते हैं ताकि उसे किसी तरह की शिकायत न हो।
      - मशीन डिलेवर करने के बाद भी हमारी सर्विस सबसे बेहतर है और यही वजह है कि हमारी कंपनी पर लोगों का भरोसा बना हुआ है।

      सुरेश शर्मा, एमडी सुरेश इंजीनियरिंग वर्क्स
      - पिता का अनुभव और हमारी कड़ी मेहनत को ही हमारी सफलता का श्रेय दिया जाना चाहिए।
      - पिताजी ने एक ही चीज़ सिखाई है- क्वालिटी से कभी कोई समझौता नहीं करना। हम हर छोटे-बड़े प्रोडक्ट में यही नियम अपनाते हैं।
      - हमारे ग्राहक 100 फीसदी संतुष्ट होने चाहिए, यही हमारा मकसद है।
      - हम कभी विज्ञापन में विश्वास नहीं करते, बल्कि एक संतुष्ट ग्राहक दूसरे 10 लोगों को हमारे बारे में बताए, यही कोशिश रहती है।
      - हम अभी ड्रिप एरिगेशन पर काम कर रहे हैं। उसे और बेहतर बनाने वाली मशीनरी पर हमारा फोकस है, जो इंटरनेशनल स्टैंडर्ड की हों लेकिन इकॉनमिक प्राइज़ में भी।
      The Visionaries of Madhya Pradesh सीरीज में हम आपकी उन शख्सियतों से मुलाकात कराते हैं, जिन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है। देश और दुनिया में मध्यप्रदेश का नाम रोशन किया है।
      वीडियो देखिए-सुरेश इंजीनियरिंग वर्क्स की सफलता यात्रा, उन्हीं के संचालकों की जुबानी
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