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जो मेडिकल कॉलेज बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम नहीं लगाएंगे, उन्हें मान्यता नहीं

Bhaskar News | Last Modified - Nov 06, 2017, 06:38 AM IST

कॉलेज बायोमेट्रिक अटेंडेंट सिस्टम नहीं लगाएंगे, उन्हें मान्यता नहीं दी जाएगी।
जो मेडिकल कॉलेज बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम नहीं लगाएंगे, उन्हें मान्यता नहीं
इंदौर.मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) ने डॉक्टरों की निगरानी के लिए मेडिकल कॉलेजों में बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम लागू किया है। इसके तहत यूनिक परमानेंट रजिस्ट्रेशन नंबर दिया जाएगा, लेकिन निजी मेडिकल कॉलेजों ने इस पर अमल नहीं किया है। अब एमसीआई यह नियम लागू कर रही है कि जो कॉलेज बायोमेट्रिक अटेंडेंट सिस्टम नहीं लगाएंगे, उन्हें मान्यता नहीं दी जाएगी।
इस बात के संकेत इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के प्रांतीय अधिवेशन में शामिल होने आईं एमसीआई की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. जयश्री बेन मेहता ने दिए हैं।
- उन्होंने कहा कि दूसरे फेज में डिजिटल वार्ड मोशन प्रोग्राम भी शुरू होगा। इसके तहत कक्षा, ओपीडी और वार्ड में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इससे पता लग सकेगा कि छात्रों को किस तरह पढ़ाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि क्रॉस पैथी को लेकर एमसीआई का रुख स्पष्ट है।
- आयुष डॉक्टरों को प्रशिक्षण देकर एलोपैथी लिखने की अनुमति देने का हम विरोध करते हैं। हम सरकार को लिखकर दे चुके हैं। अस्पताल में एलोपैथी, आयुर्वेदिक और होम्योपैथी ओपीडी शुरू करें। मरीज को स्वयं निर्णय लेने दें कि उसे कहां जाना है।
राज्य सरकार हर जिले में 50 सीटों का मेडिकल कॉलेज करें शुरू
- प्रदेश सहित देशभर में डॉक्टरों की कमी को दूर करने केे लिए एमसीआई नियमों में शिथिलता बरत रहा है। डॉ. मेहता ने बताया कि कॉलेजों को दोबारा मौका दिया जा रहा है कि वे पीजी सीट बढ़ाने के लिए आवेदन करें। जिन कॉलेजों की मान्यता को चार वर्ष हो गए हैं उन्हें पीजी पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए कहा जा रहा है।
- राज्य सरकार जिला स्तर पर 50 सीट का मेडिकल कॉलेज शुरू करें। उन्होंने यह भी कहा कि गांव में काम करने वाले डॉक्टर को शहरी डॉक्टर की तुलना में दोगुना वेतन मिलना चाहिए।
मप्र में एक रजिस्ट्रार के भरोसे काउंसिल
- ड्रग ट्रायल मामले में मप्र मेडिकल काउंसिल (एमपीएसी) ने डॉक्टरों पर कार्रवाई में लेतलाली की। इसके बाद मामला कोर्ट में गया। पीड़ित शिकायत करते हैं, लेकिन एमपीएमसी कोई कार्रवाई नहीं करती। डॉ. मेहता ने इस पर भी नाराजगी जताई कि 30 साल से यहां काउंसिल है, लेकिन एक रजिस्ट्रार के सिवा यहां कुछ नहीं है।
सालों बाद एक पीजी सीट मिली, वह भी संकट में
- एक तरफ एमजीएम मेडिकल कॉलेज प्रशासन एमबीबीएस और पीजी सीट अपग्रेडेशन की कोशिशों में है, लेकिन मौजूदा सीट की मान्यता को लेकर ही एमसीआई सवाल उठा रहा है। चार साल पहले माइक्रोबायोलॉजी विभाग में एक पीजी सीट पर एडमिशन की अनुमति मिली। एक छात्र कोर्स भी पूरा कर चुका, लेकिन एमसीआई ने डिग्री को रिक्गनाइज्ड नहीं किया है। निरीक्षण में कई खामी बताईं।
- एमसीआई ने इस एक सीट पर प्रवेश को मान्यता नहीं दी है। इसके बाद कॉलेज प्रशासन अब एक कम्प्लाइंस रिपोर्ट तैयार कर रहा है। हर बार की तरह इस बार भी सरकारी मंजूरी के आदेश की प्रतिलिपि लगाकर मान्यता मांगी जाएगी।
एमसीआई ने बताईं ये कमियां
- एसोसिएट प्रोफेसर की कमी।
- ट्यूटर की डिटेल्स नहीं बताई।
- पैरासाइटोलॉजी इनवेस्टिगेशन के लिए वर्कलोड कम होना।
- पब्लिकेशंस कम होना।
- विभागीय लाइब्रेरी में किताबों की संख्या कम होना।
- बीओडी इन्क्यूबेटर नहीं होना।
- डिपार्टमेंट का म्यूजियम नहीं होना।
- बायोसेफ्टी कैबिनेट नहीं पाया गया।
- फैकल्टी टेबल को किसी फैकल्टी मेंबर ने साइन नहीं किया।
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Web Title: jo medical college baayometrik atendens sistm nahi lgaaaengae, unhen maanytaa nahi
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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