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नी-इंप्लांट 90 हजार सस्ता, अस्पतालों ने सर्जन की फीस, ओटी चार्ज बढ़ा बराबर कर लिया मुनाफा

Bhaskar News | Last Modified - Nov 11, 2017, 06:36 AM IST

नी- इंप्लांट की कीमत 59 हजार कर दी, पर अस्पताल के पैकेज में इसका असर नहीं पड़ा है।
  • नी-इंप्लांट 90 हजार सस्ता, अस्पतालों ने सर्जन की फीस, ओटी चार्ज बढ़ा बराबर कर लिया मुनाफा
    इंदौर.केंद्र सरकार ने 3 माह पहले घुटना प्रत्यारोपण में लगने वाले इंप्लांट को प्राइज कंट्रोल के दायरे में ला कर डेढ़ लाख की औसत कीमत वाले नी- इंप्लांट की कीमत 59 हजार कर दी, पर अस्पताल के पैकेज में इसका असर नहीं पड़ा है। कीमत कम होने से सर्जरी के पैकेज में 50 हजार से 1 लाख तक की कमी होना थी पर इंदौर के अधिकतर अस्पताल पहले की ही तरह 2.50 से 4 लाख रुपए तक वसूल रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त के भाषण में हार्ट स्टेंट की तरह नी- इंप्लांट की कीमतों में भी कमी की बात कही थी। मंत्रालय ने दूसरे ही दिन इसकी औपचारिक घोषणा भी कर दी। प्राइज कंट्रोल के बाद 1.58 लाख की औसत कीमत वाले कोबाल्क्रोमियम जोड़ की कीमत 54 हजार 720 तो 2.5 लाख की कीमत वाले टाइटेनियम जोड़ की अधिकतम दर 76 हजार 650 तय कर दी गई, पर अस्पतालों ने सर्जन फीस, ओटी चार्ज व नर्सिंग फीस बढ़ा कर मुनाफा बराबर कर लिया।

    कमिशन के लिए देसी इंप्लांट पर जोर
    प्राइज कंट्रोल के बाद देसी-विदेशी इंप्लांट की कीमत लगभग समान हो गई है। विदेशी के मुकाबले देसी कंपनियां ज्यादा कमिशन देती हैं। इसलिए बड़ अस्पतालों के सर्जन अब देसी इंप्लांट लगाने पर ज्यादा जोर दे रहे हैं।
    एसेसरीज का खर्च अलग से ले रहे हैं
    पहले कंपनियां नी- इंप्लांट के साथ सर्जरी के लिए जरूरी एसेसरीज भी देती थीं। अब अस्पतालों के मुताबिक सर्जरी के दौरान विशेष तरह के सीमेंट के लिए 3 से 5 हजार रुपए लग रहे हैं। दूसरी एसेसरीज जैसे कोन, नट, फीबर आदि के लिए अलग से 40 हजार रुपए वसूले जा रहे हैं।
    कमिशन बंद, तो मरीजों पर बोझ
    प्राइज कंट्रोल के पहले केंद्र सरकार के सर्वे में 449% तक मुनाफाखोरी की बात सामने आई थी। इसका एक बड़ा हिस्सा (20 से 40) हजार रुपए सर्जन और अस्पतालों को मिलता था। कंपनियों ने अब कमिशन बंद या कम कर दिया है। अस्पताल अब इसकी पूर्ति मरीजों से कर रहे हैं।
    ट्रेड मार्जिन बढ़ाने के लिए दूसरे सामान का सहारा
    नेशनल फार्मासिटिकल प्राइजिंग अथॉरिटी (एनपीपीए) ने ट्रेड मार्जिन की सीमा 4 से 16 प्रतिशत तय की है। सप्लायर, अस्पताल इससे संतुष्ट नहीं हैं। जैसे- इंपोर्टर पहले 75 प्रतिशत तक तो डिस्ट्रीब्यूटर 100 प्रतिशत तक मुनाफा कमाते थे। हेंडलिंग चार्ज के रूप में अस्पतालों का हिस्सा अलग होता था। अब ज्यादा ट्रेड मार्जिन लेने के लिए अस्पताल सर्जरी के लिए जरूरी दूसरे ऐसे सामान का सहारा ले रहे हैं, जिन पर कई गुना ज्यादा एमआरपी होती है।
    ऑपरेशन एक, पैकेज अलग
    बॉम्बे हॉस्पिटल |
    -अस्पताल के सीएमओ ने बताया कि अस्पताल में एक पैर के 1 लाख 50 हजार रुपए लगेंगे और दोनों पैर के लिए यही चार्ज 3 लाख रुपए होगा।
    अपोलो
    -जानकारी देने के लिए मौजूद श्रद्धा के अनुसार 1.75 लाख एक पैर के व दोनों पैर के 3.10 लाख रुपए लगेंगे।
    सीएचएल
    -डॉ अभिजीत पंडित के अनुसार 1 घुटने के ऑपरेशन में 1.50 लाख और दोनों पैर के ऑपरेशन में 3 लाख तक व 20 हजार तक ऊपर हो सकता है।
    शेल्बी
    -अस्पताल के जिम्मेदार लोगों द्वारा बताया गया कि सामान्य वार्ड में एक घुटने के जोड़ के रिप्लेसमेंट का चार्ज 1 लाख 65 हजार रुपए है। दोनों पैर के लिए 3 लाख 35 हजार रुपए तक लगेंगे। यदि डॉ विक्रम शाह ऑपरेशन करेंगे तो 4.70 लाख रुपए से 4.90 लाख रुपए तक खर्च आएगा।
    मेदांता
    - यहां की संबंधित कर्मचारी शिवानी ने बताया कि एक घुटने के आॅपरेशन में 237500 व दोनों का चार्ज 317500 होगा। सभी खर्च जोड़ कर।
    एप्पल
    -अस्पताल के डॉ. ए.के. जींसीवाले के असिस्टेंट दानिश खान के अनुसार 1.75 से 2 लाख रुपए तक एक पैर का आैर दोनों का 3.50 से 3.75 लाख तक खर्च आएगा।
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Web Title: Ni-Implant 90 Thousand Cheaper, Hospitals Surge Surge Fees
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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