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प्रदेश में 7 नए मेडिकल कॉलेज खोलने की तैयारी, 700 से ज्यादा डॉक्टरों की जरूरत

कॉलेजों में छात्रों को पढ़ाने के लिए डॉक्टर्स (फैकल्टी) कहां से लाएंगे।

Bhaskar News | Last Modified - Nov 14, 2017, 06:57 AM IST

  • प्रदेश में 7 नए मेडिकल कॉलेज खोलने की तैयारी, 700 से ज्यादा डॉक्टरों की जरूरत
    इंदौर .प्रदेश में सात और देश में 56 नए मेडिकल कॉलेज एकसाथ शुरू होने हैं। मप्र सरकार वर्ष 2018 से प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने के दावे कर रही है, लेकिन अभी तक यह तय नहीं हो पाया कि इतने कॉलेजों में छात्रों को पढ़ाने के लिए डॉक्टर्स (फैकल्टी) कहां से लाएंगे। एमसीआई की शर्तों के मुताबिक अनुभवी प्रोफेसर्स और टीचर्स एकसाथ मिल पाना मुश्किल हैं। अब राज्य सरकार ने स्वास्थ्य मंत्रालय को चिट्ठी लिखी है कि नियमों को कुछ शिथिल किया जाए। खासकर असिस्टेंट प्रोफेसर केे लिए उम्र की सीमा और सीनियर रेसीडेंट का एक साल का अनुभव की बाध्यता। ताकि कम से कम इन पदों पर भर्ती की जा सके। वरना डॉक्टर्स प्रोफेसर तो दूर एसआर और असिस्टेंट प्रोफेसर मिलना मुश्किल होगा।
    - दतिया, खंडवा, छिंदवाड़ा, शिवपुरी में 100-100 सीट और विदिशा, रतलाम व शहडोल में 150-150 एमबीबीएस सीट के साथ मेडिकल कॉलेज शुरू किया जाएगा। इन्हें शुरू करने के लिए सरकार कोे कम से कम एक हजार डॉक्टर की भर्ती करना है।
    - मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) के नियमानुसार चार-चार साल के अनुभवी फैकल्टी ही एसोसिएट और असिस्टेंट प्रोफेसर बन सकते हैं। इतने कम समय में इतने अनुभवी डॉक्टर्स लाना मुश्किल है। जबकि राज्य सरकार ने एमसीआई को 3-3 लाख प्रति कॉलेज के हिसाब से फीस भी जमा करवा दी है।
    - एमसीआई की टीम नवंबर या दिसंबर में आकस्मिक निरीक्षण के लिए आ सकती है। रतलाम मेडिकल कॉलेज डीन डॉ. संजय दीक्षित ने बताया कि नियुक्तियां अभी नहीं की गई है। शासन स्तर पर प्रक्रिया चल रही है। इसमें थोड़ा समय लगना तय है।
    आसपास के राज्य कहीं आगे
    महाराष्ट्र, गुजरात सहित कई ऐसे राज्य हैं जहां एमबीबीएस की सीटों की संख्या मप्र की तुलना में चार गुना तक अधिक हैं। राज्य सरकार पदोन्नति के बजाय सीधी भर्ती पर विचार कर रही है। पर इतनी फैकल्टी लाना मुश्किल है। वर्तमान में सागर मेडिकल कॉलेज की मान्यता ही हर बार खतरे में पड़ जाती है। यहां अभी भी 30 से 40 प्रतिशत स्टाफ कम है।
    एक कॉलेज के लिए 111 डॉक्टर्स की जरूरत
    एक कॉलेज शुरू करने के लिए कम से कम 111 डॉक्टरों का स्टाफ चाहिए। नियमानुसार 132 असिस्टेंट, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर की जरूरत होती है। 80 जूनियर और सीनियर रेसीडेंट की जरूरत होती है। वहीं 45 रेसीडेंट डॉक्टर चाहिए। हालांकि शुरू में 65 टीचिंग डॉक्टर व 75 नर्सें और 40 टेक्नीशियन से भी काम चल सकता है।
    निरीक्षण से पहले संसाधन जुटाना मुश्किल
    - मप्र में पदोन्नति पर प्रतिबंध है। सरकार लेटरल एंट्री पर विचार कर रही है लेकिन इतने डॉक्टर मिलना मुश्किल है।
    - किसी भी कॉलेज के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है।
    - एमसीआई के निरीक्षण के पहले टेक्नीशियन, डॉक्टर, नर्स, उपकरण और फर्नीचर लाना मुश्किल है।
    - एमसीआई ने असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए 40 साल से कम उम्र और एक साल का एसआर का अनुभव अनिवार्य कर दिया है। जिससे परेशानी बढ़ गई है।
    - दरअसल प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर सीधी भर्ती का प्रावधान नहीं है, इसलिए चार-चार साल के अनुभव और पेपर प्रेजेंटेशन के आधार पर पदेन पदोन्नति देने पर विचार किया जा रहा है।
    - 65 साल से अधिक उम्र के फैकल्टीज को संविदा पर नियुक्ति देने पर सरकार विचार हो रहा है।
    महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा सीटें
    मध्यप्रदेश 1900
    राजस्थान 2400
    उत्तर प्रदेश 4624
    महाराष्ट्र 6995
    गुजरात 3830
    - स्वास्थ्य मंत्रालय से बात कर रहे हैं । इतने कॉलेजों को शुरू करने के लिए हमें अनुभवी डॉक्टरों की आवश्यकता है। अन्य राज्यों में भी नए कॉलेज शुरू हो रहे हैं। ऐसे में हमें वहां के डॉक्टर्स नहीं मिल पाएंगे।’
    -गौरी सिंह, प्रमुख सचिव
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