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हेल्थ विभाग ने यूज की आपत्तिजनक भाषा, डॉक्टर बोले- महिलाओं का अपमान

योजना के तहत इलाज भले ही स्त्री व पुरुष दोनों का होता है क्योंकि संतान न हो पाने का कारण सिर्फ स्त्री ही हो ऐसा तो है नह

​नीता सिसौदिया | Last Modified - Nov 17, 2017, 06:48 AM IST

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    इंदौर.‘मध्यप्रदेश राज्य बीमारी सहायता निधि योजना के तहत बांझपन से ग्रसित महिलाओं का उपचार करवाता है’ स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग अपनी योजना में इस तरह की आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल कर रहा है। योजना के तहत इलाज भले ही स्त्री व पुरुष दोनों का होता है क्योंकि संतान न हो पाने का कारण सिर्फ स्त्री ही हो ऐसा तो है नहीं। लेकिन विभाग महिला को केन्द्र में रख कर बांझ शब्द का इस्तेमाल कर रहा है।


    भास्कर ने विभाग के कई आदेश, नोटिफिकेशन और अन्य पत्रों में यह पाया। इस सहायता निधि के तहत कई बीमारियों का निजी अस्पतालों में इलाज करने पर मरीज को पैसा नहीं देना पड़ता, सरकार भुगतान करती है। जिन बीमारियों का इलाज इसमें होता है उसमें पिछले साल 21 वें नंबर पर नि:संतानता के मामलों में आईवीएफ के लिए मदद का भी प्रावधान किया गया, जिसके तहत 1.15 लाख रुपए तक मिलते हैं। इसका फायदा भी कुछ महिलाओं को मिला। इंदौर में अब तक कुल 316 महिलाओं को इस योजना के लिए चिन्हित किया गया जिनमें से 21 निजी अस्पताल में इलाज के लिए रैफर हुईं। कुछ मां बनीं। कुछ का इलाज जारी है। विशेषज्ञ कहते हैं विकलांग की जगह दिव्यांग शब्द को इसलिए लाया गया क्योंकि विकलांग शब्द शारीरिक कमजोरी को दर्शाता था, जिससे ग्रसित को मानसिक आघात पहुंचता था। बांझ भी ऐसा ही शब्द है। इसे लिखा जाना गलत है।

    ऐसा तो समाज ने भी नहीं कहा
    योजना का लाभ लेने वाली विजयलक्ष्मी बताती हैं कि मुझे समाज-परिवार ने कभी बांझ नहीं कहा। यह शब्द अपमानजनक है। सरकार ऐसा कहती है तो आश्चर्य और परेशान करने वाली बात हैै।


    अच्छा हुआ, यह बता दिया। बांझपन गलत शब्द है। हम इसे ठीक करवाएंगे।
    - रुस्तम सिंह, स्वास्थ्य मंत्री

    वैज्ञानिक दृष्टि से नि:संतान सही शब्द
    नि:संतान यानी इनफर्टाइल। इसका कारण पुरुष में भी हो सकता है और महिला में भी। वैज्ञानिक दृष्टि से महिला व पुरुष के इलाज के लिए नि:संतान सही शब्द है। बांझ शब्द का इस्तेमाल महिला को नीचा दिखाता है।
    - डॉ. हेमलता ढांढ, पूर्व प्रोफेसर एमजीएम मेडिकल कॉलेज

    मानसिक प्रताड़ना है ऐसे शब्द का उपयोग
    यह एक प्रकार का मौखिक अपशब्द है। यह नारी अस्मिता को प्रभावित करने वाला भी शब्द है। नि:संतान उपयुक्त शब्द है। बांझ शब्द का उपयोग एक तरह से मानसिक प्रताड़ना है। यदि परिवार के व्यक्ति द्वारा यह कहा जाता है तो महिला कानूनी सहायता भी ले सकती है।- अमर सिंह राठौर, वरिष्ठ अभिभाषक

    शब्द और सोच दोनों पर आपत्ति
    संतान न होने की शारीरिक बाधा किसी का दोष कैसे हो सकता है? ऐसे में बांझ शब्द से भी हमने काफी हद तक दूरी बनाई है। आज के दौर में न यह ताना मारना आसान है न कोई इसे सुनना बर्दाश्त करता है। जब पता है कि बांझ शब्द नहीं ताना है तो सरकार कैसे आंख बंद कर इसे इस्तेमाल कर सकती है? सवाल सिर्फ एक शब्द का नहीं मानसिकता का है। एक ऐसी मेडिकल कंडीशन जिसके इलाज में पति-पत्नी दोनों की जांच और उपचार होता है उसमें महिला को केन्द्र में रख कर इस शब्द का इस्तेमाल वह भी सरकार की तरफ से, शर्मनाक है। रात 2 बजे महिलाएं सड़क पर निश्चिंत होकर निकल सके इसके लिए शुरुआत तो मानसिकता बदलने से ही होगी, वही ठीक नहीं हो पा रही। बदलना ही होगा। शब्द भी, सोच भी।

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Web Title: Useful Language In Health Department Cheme
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