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  • A film should be made on the situation of the misdemeanors in jail, this will create fear among those who do so.

हाईकोर्ट में बोले महाधिवक्ता / जेल में दुष्कर्मियों के हालात पर फिल्म बनाई जाए, इससे ऐसा करने वालों में खौफ पैदा होगा

प्रतीकात्मक फोटो। प्रतीकात्मक फोटो।
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प्रतीकात्मक फोटो।प्रतीकात्मक फोटो।

  • हाईकोर्ट में एक केस की सुनवाई के दौरान ज्यादती जैसी घटनाओं पर महाधिवक्ता ने जताई चिंता

दैनिक भास्कर

Dec 13, 2019, 01:56 AM IST

इंदौर. ज्यादती के एक मामले में दोषी की फांसी की सजा यथावत रखने या नहीं रखने के मामले में हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने गुरुवार को सुनवाई की।  कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह बात भी उठी कि ज्यादती की घटनाएं हो रही हैं।

सजा भी मिल रही है, लेकिन ऐसी घटनाओं को रोका कैसे जाए? इस पर हाई कोर्ट ने भी पूछा कि क्या किया जा सकता है आप ही बताएं। हाई कोर्ट द्वारा इस मामले में नियुक्त न्यायमित्र अविनाश सिरपुरकर, अतिरिक्त महाधिवक्ता रवींद्रसिंह छाबड़ा ने कहा कि जिस तरह सिनेमा से पहले और टीवी पर सिगरेट के दुष्परिणाम पर शॉर्ट फिल्म दिखाई जाती है, ठीक वैसे ही दुष्कर्मियों को सजा मिलने के बाद उनकी हालत पर फिल्म बनाकर समाज में दिखाई जाना चाहिए। इस तरह के प्रयासों से ऐसी घिनौनी घटनाओं में कमी आ सकती है। दुष्कर्म जैसी घटनाओं को अंजाम देने वालों में खौफ पैदा होगा।

मुंहबोली भानजी से दुष्कर्म, हत्या के आरोपी को मिली फांसी की सजा पर सुनवाई पूरी
द्वारकापुरी क्षेत्र में मुंहबोली भानजी से ज्यादती और फिर हत्या करने वाले आरोपी हनी अठवाल को पिछले दिनों अपर सत्र न्यायाधीश सविता सिंह ने  फांंसी की सजा सुनाई थी। इस सजा की पुष्टि के लिए मामला हाई कोर्ट में आया था। हनी ने भी सजा निरस्त किए जाने की मांग की थी। हाई कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर सजा यथावत रखने या नहीं रखने पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। सरकार की ओर से कहा गया कि ट्रायल कोर्ट ने फैसले में कोई गलती नहीं की है। आरोपी ने रोती-बिलखती बच्ची से ज्यादती की और फिर वहीं मार डाला। सभी सबूत उसके खिलाफ थे। फांसी की सजा को यथावत ही रखा जाना चाहिए।

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