अपराध / राजस्थान का हिस्ट्रीशीटर है खुद को नेपाल के उपराष्ट्रपति का विशेष सलाहकार बताने वाला आरोपी

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से भी मिल चुके हैं आरोपी। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से भी मिल चुके हैं आरोपी।
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पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से भी मिल चुके हैं आरोपी।पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से भी मिल चुके हैं आरोपी।

  • प्रोटोकाॅल की कागजी प्रक्रिया का तरीका सीख धोखाधड़ी शुरू कर दी
  • पुलिस से कहा- 12 साल से सरकारी सुविधा का लाभ ले रहे थे, पहली बार पकड़ा गया

दैनिक भास्कर

Feb 02, 2020, 12:28 PM IST

इंदौर/उज्जैन. नेपाल के उपराष्ट्रपति का विशेष सांस्कृतिक सलाहकार बताने वाले आरोपी महावीर तोरडी और उसके बेटे कुलदीप व भाई प्रमोद शर्मा को 5 दिन की रिमांड पर पुलिस को सौंपा गया है। तोरडी जयपुर पुलिस का हिस्ट्रीशीटर है और धोखाधड़ी के दो मामले में एक साल से वहां की पुलिस पकड़ नहीं सकी। चौंकाने वाली बात यह है कि तोरडी राजस्थान पुलिस का वांटेड है लेकिन उसी से प्रोटोकाॅल के तहत पायलट वाहन की सुविधा लेता था। रिमांड मिलने के बाद आरोपियों के बारे में और जानकारी जुटाने के लिए पुलिस की एक टीम राजस्थान रवाना की गई है।

12 साल पहले नेपाल यात्रा में आया आइडिया
खुद को नेपाल के उपराष्ट्रपति का विशेष सांस्कृतिक सलाहकार बताने को लेकर मास्टर माइंड महावीर प्रसाद तोरडी से माधवनगर पुलिस ने पूछताछ की। उसने बताया 1984 से चोरी समेत अन्य अपराधों में लिप्त है, जेल भी जा चुका है। 12 साल पहले नेपाल घूमने गया था। वहीं पर कुछ सांस्कृतिक समरसता का बैनर देख यह ख्याल आया कि खुद ही इस नाम से संस्था बना ली जाए। इसके बाद तोरडी ने भारत-नेपाल सांस्कृतिक समरसता संस्था के माध्यम से लोगों के दल के साथ नेपाल यात्रा शुरू की। इसके चलते नेपाल सरकार से प्रशंसा पत्र ले लिए व फर्जी दस्तावेज तैयार कर भारत में सैकड़ों लोगों को संस्था का सदस्य बना लिया। प्रत्येक व्यक्ति से वह 72 हजार रुपए सदस्यता शुल्क लेकर उन्हें परिचय पत्र देता था। कई बार नेपाल जाने से वहां की बोली व रहन-सहन से परिचित हो गया था। लोगों के बीच खुद को नेपाल के उपराष्ट्रपति का सलाहकार बताकर फर्जी दस्तावेज से पुलिस प्रोटोकाॅल की सुविधा का लाभ लेने लगा था।


सरकारी सुविधाओं का देशभर में लाभ ले रहे थे
एएसपी रूपेश द्विवेदी ने बताया आरोपी चोरी व धोखाधड़ी में कई बार जेल जा चुके है। 12 साल से पुलिस के पायलट वाहन समेत अन्य सरकारी सुविधाओं का देशभर में लाभ ले रहे थे और पहली बार रंगेहाथों पकड़े गए। आरोपियों ने प्रोटोकाॅल का तरीका सीख लिया था। इसी वजह से मिनट टू मिनट कार्यक्रम का फर्जी पत्र तैयार कर लेते थे और जहां जाना होता, उस जिले की पुलिस को मेल करते जाते थे।


रिमांड मिलने के बाद टीम राजस्थान रवाना की
कोर्ट से आरोपियों का रिमांड मिलने के बाद एसएसपी सचिन अतुलकर ने एक टीम राजस्थान रवाना कर दी जो फर्जी दस्तावेजों की जानकारी जुटाएगी व जयपुर पुलिस से भी संपर्क करेगी। तोरडी के खिलाफ जयपुर के सीकर व डूंगरपुर थाने में धोखाधड़ी के दो केस दर्ज है जिसमें पुलिस उसे दो साल से तलाश कर रही थी लेकिन उसका पता व कोई पहचान संबंधी दस्तावेज नहीं मिलने से परेशान थी।

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