मप्र / शासन की मंजूरी में अटक जाते हैं भ्रष्टाचार के केस, यह अनिवार्यता खत्म हो



approval of the government, the case of corruption is inevitable.
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approval of the government, the case of corruption is inevitable.

  • क्यों भ्रष्ट अफसरों पर छापे के बाद कार्रवाई धीमी पड़ जाती है, क्यों केस चलता रहता है, यही जानने के लिए भास्कर ने पूर्व लोकायुक्त से की बात

Dainik Bhaskar

Jul 13, 2019, 04:23 AM IST

पीपी नावलेकर,  पूर्व लोकायुक्त मध्यप्रदेश . आय से अधिक संपत्ति या सरकारी काम में भ्रष्टाचार के मामलों में सरकार ना जाने क्यों अभियोजन की अनुमति नहीं देती? किसी अफसर, कर्मचारी के पास आय से अधिक संपत्ति है या नहीं? सरकारी काम में भ्रष्टाचार किया है या नहीं? यह कोर्ट तय करती है। सरकार के अनुमति नहीं देने से ईओडब्ल्यू, लोकायुक्त पुलिस के प्रकरण जबरन लंबित रहते हैं। जांच पूरी होने के बाद भी चालान पेश नहीं कर पाते। मैं जब लोकायुक्त था, तब भी सरकार को कई बार अभियोजन की स्वीकृति देने के िलए पत्र लिखे। कुछ मामलों में अनुमति मिल जाती, लेकिन कई मामले अटके रहते थे। 


ईओडब्ल्यू और लोकायुक्त पुलिस का स्टाफ वैसे ही बरसों से काफी कम है और काम बहुत ज्यादा। एेसे में जल्दी-जल्दी अनुमति मिले तो केस खत्म हो। वैसे अब वक्त आ गया है कि लोकायुक्त पुलिस को यह अधिकार मिलना चाहिए कि अभियोजन की अनुमति लिए बगैर भी केस चलाने दिया जाए।

 

सरकार को सिर्फ एक आदेश जारी करना है। सरकार इतना कर दे तो जो केस सालों से लंबित हैं, वह जल्दी ही निपट जाए। कई बार समय पर चालान पेश नहीं हो पाने के कारण भी आरोपी को जमानत का लाभ मिल जाता है। बगैर अभियोजन स्वीकृति के केस लगाने पर भी केस कमजोर होता है। अभियोजन की स्वीकृति मिलने के बाद भी अगले ही दिन संबंधित को जेल नहीं हो जाती। अभियोजन स्वीकृति की अनिवार्यता खत्म हो जाए तो लोकायुक्त पुलिस का डर भी भ्रष्टाचार करने वालों में रहेगा।   

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