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ईओडब्ल्यू का छापा / अब 15 करोड़ की जमीनें भी, नोटबंदी में रिश्तेदारों के नाम खाते खोल खरीदी राठौर ने



दिलीप सिंह चौहान दिलीप सिंह चौहान
असलम खान असलम खान
अभय राठौर अभय राठौर
मुकेश करोसिया मुकेश करोसिया
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दिलीप सिंह चौहानदिलीप सिंह चौहान
असलम खानअसलम खान
अभय राठौरअभय राठौर
मुकेश करोसियामुकेश करोसिया

  • निगम का शौचालय प्रभारी करोड़ों का आसामी, पहले दिन जांच में 15 करोड़ की संपत्ति सामने आई थी

Dainik Bhaskar

Oct 13, 2018, 12:47 AM IST

इंदौर.  ईओडब्ल्यू की कार्रवाई में पकड़ाए नगर निगम के असिस्टेंट इंजीनियर अभय सिंह राठौर ने नोटबंदी के बाद रिश्तेदारों के नाम खाते खोलकर इंदौर व आसपास 15 करोड़ की जमीनें खरीदी। भाई संतोष राठौर के नाम 12 लाख की एसयूवी भी खरीदी थी।

 

ईओडब्ल्यू की टीम को यूनियन बैंक, सिंडीकेट बैंक, आंध्रा बैंक, समेत 12 बैंकों में अभय और उसके रिश्तेदारों के कई खाते मिले हैं। अब तक जांच में मिली 15 करोड़ की संपत्ति के अलावा 15 करोड़ की जमीनें राठौर ने इंदौर और आसपास के जिलों में खरीदी हैं। सख्ती होने के बाद रजिस्ट्री में 20 प्रतिशत पैसा ही नकद दिया जा सकता है, बाकी ट्रांजेक्शन बैंक से होना अनिवार्य है। इस नियम को धता बताने के लिए राठौर ने रिश्तेदारों ने नाम बैंकों में खाते खुलवाए और फिर उनमें पैसा डालकर जमीनों के सौदे किए। बाद में इन खातों को बंद कर दिया गया। भाई संतोष ने 2016-17 के इनकम टैक्स रिटर्न में वार्षिक आय 3.27 लाख रुपए घोषित की। इतनी कम तनख्वाह होने के बावजूद उसने 12 लाख रुपए की एसयूवी फोर्स गुरखा कार दिसंबर 2016 में नोटबंदी के बाद खरीदी, जिससे स्पष्ट माना जा रहा है कि अभय राठौर ने ही अपना काला धन भाई के जरिए चलाया। 

 

एक आबकारी अधिकारी को दे रखी है काली सफारी : राठौर दूसरे अधिकारियों का काला धन भी मार्केट में चलाता रहा है। एक आबकारी अधिकारी उसका बहुत ही खास माना जाता है। वह राठौर के ही फ्लैट में सालों रहा और उसके पास ही राठौर ने अपनी काले रंग की टाटा सफारी दे रखी थी। बताया जाता है कि अभी भी उस अधिकारी के पास यह गाड़ी है।
 

भास्कर सवाल: महकमे बदल भ्रष्टाचार जारी रखने का मौका देते हैं निगम के अफसर, वर्कलेस क्यों नहीं कर देते?

 

असलम खान : 20 साल में अलग-अलग निगमायुक्तों ने इस पर लगाम कसने की कोशिश की, पर बाहर का रास्ता नहीं दिखाया। पहले सीबी सिंह और बाद में मनीष सिंह को तो यह आदेश निकालना पड़ा कि असलम खान नक्शा विभाग के आसपास किसी के साथ दिखा तो उसकी भी खैर नहीं।

 

अभय राठौर : ट्रैफिक घोटाला, ट्यूबवेल खनन, यशवंत सागर में पाइप बेचने, टैंकरों के किराए में गड़बड़ी की आधा दर्जन से ज्यादा शिकायतें, पर अफसरों ने एक बार भी कार्यमुक्त नहीं किया। जल यंत्रालय से विद्युत, स्वच्छता और जोन के काम देते रहे, जहां इस पर निगरानी और नियंत्रण दोनों नहीं था।
 

मुकेश करोसिया : बिलावली जोन में रिश्वतखोरी करते पकड़ाए करोसिया के खिलाफ भी  शिकायतें आ रही हैं। हाल ही में सीतलामाता बाजार के व्यापारियों ने तो इसके रवैये को लेकर दुकानें बंद कर दी थीं। अब भी इसके पास सीएसआई का प्रभार है, लेकिन अफसर इसे हटा नहीं रहे।
 

दिलीप सिंह चौहान : सवा दो करोड़ के ट्रैफिक घोटाले में फंसे चौहान के खिलाफ ईओडब्ल्यू और लोकायुक्त में अलग-अलग केस चल रहे हैं। बगैर टेंडर उपकरण खरीदी मामले में भी उन पर केस दर्ज है, लेकिन किसी भी स्तर पर चौहान के खिलाफ ठोस कार्रवाई आज तक नहीं हो सकी।
 

...और इन 5 को बचाया चालान की अनुमति न देकर

1. दिलीप सिंह चौहान : 1998 में सयाजी होटल मामले में दुकानें बनाने की गलत अनुमति देने पर केस दर्ज हुआ। 2009 से लोकायुक्त चालान की अनुमति मांग रही है।
2. हंसकुमार जैन : सुगनीदेवी जमीन मामले में 2011 में केस हुआ। तब से ही चालान की मंजूरी नहीं दी।
3. रजनीश पंचोलिया : 2014 में विद्युत विभाग के बिल पास करने में रिश्वत लेते पकड़ाए। मई 2014 से चालान की अनुमति नहीं मिली।
4. मोहनलाल शर्मा : 2014 में रिश्वतखोरी का केस, तब से ही चालान की अनुमति नहीं मिली।
5. राकेश मिश्रा : 1998 में सयाजी होटल मामले में केस दर्ज, 2009 से चालान की मंजूरी नहीं मिली।
 

सीधी बात

- आशीष सिंह, निगमायुक्त

सवाल- राठौर के खिलाफ इतनी गंभीर शिकायतें, फिर भी उसे अहम जिम्मा क्यों दे रखा था?
जवाब - राठौर के पास ऐसा कोई जिम्मा नहीं था, जिसमें आर्थिक अनियमितता की गुंजाइश रहे। 
सवाल- टैंकर, ट्यूबवेल समेत कई घोटालों में नाम था, फिर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
जवाब - मामले काेर्ट या संबंधित एजेंसी के पास लंबित हैं। फिलहाल उसे कोई ऐसा जिम्मा नहीं दिया गया था, जहां सिस्टम का किसी भी रूप में दुरुपयोग हो सके।

आशीष सिंह

 

मनीष सिंह, पूर्व निगमायुक्त

सवाल- निगम में भ्रष्टाचार करने वाले कर्मचारी-अफसरों की शिकायतें आती हैं, फिर भी जिम्मेदारियों से अलग नहीं किया जाता?
जवाब- किसी को मुफ्त में तनख्वाह नहीं दे सकते। उनसे कुछ न कुछ काम तो करवाना होता है।
सवाल- अभय राठौर के खिलाफ भी कई शिकायतें थीं, उस पर क्या एक्शन लिया?
जवाब - जल यंत्रालय में राठौर की कई गड़बड़ियां मुझे पता थी। मैंने आते ही उसका विभाग छीन लिया और उसे लूपलाइन में भेजा।

मनीष सिंह

 

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