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ईओडब्ल्यू का छापा / पाइप घोटाले में निलंबित हो चुका राठौर ट्यूबवेल खनन घोटाले में था मुख्य आरोपी



गुलाब बाग कॉलोनी में 1800-1800 वर्गफीट के दो प्लॉट जोड़ बनाया तीन मंजिला आलीशान मकान, बहन के नाम पर है यह गुलाब बाग कॉलोनी में 1800-1800 वर्गफीट के दो प्लॉट जोड़ बनाया तीन मंजिला आलीशान मकान, बहन के नाम पर है यह
राठौर ने बेटे जय सिंह के नाम डोयान डेवलपर्स स्थापित किया। राठौर ने बेटे जय सिंह के नाम डोयान डेवलपर्स स्थापित किया।
अभय सिंह राठौर। अभय सिंह राठौर।
गुलाब बाग कॉलोनी स्थित राठौर का तीन मंजिला आलीशान मकान। गुलाब बाग कॉलोनी स्थित राठौर का तीन मंजिला आलीशान मकान।
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गुलाब बाग कॉलोनी में 1800-1800 वर्गफीट के दो प्लॉट जोड़ बनाया तीन मंजिला आलीशान मकान, बहन के नाम पर है यहगुलाब बाग कॉलोनी में 1800-1800 वर्गफीट के दो प्लॉट जोड़ बनाया तीन मंजिला आलीशान मकान, बहन के नाम पर है यह
राठौर ने बेटे जय सिंह के नाम डोयान डेवलपर्स स्थापित किया।राठौर ने बेटे जय सिंह के नाम डोयान डेवलपर्स स्थापित किया।
अभय सिंह राठौर।अभय सिंह राठौर।
गुलाब बाग कॉलोनी स्थित राठौर का तीन मंजिला आलीशान मकान।गुलाब बाग कॉलोनी स्थित राठौर का तीन मंजिला आलीशान मकान।

  • परिषद के हर कार्यकाल में चली राठौर के खिलाफ चली जांच
  • ननि के ही ट्रैफिक घोटाले में भी उलझा था इंजीनियर राठौर
  • हर जलकार्य प्रभारी का करीबी बना, डिग्री सवालों के घेरे में रही

Dainik Bhaskar

Oct 12, 2018, 12:28 PM IST

इंदौर. भ्रष्टाचार के मामले में फंसा नगर निगम का असिस्टेंट यंत्री अभय सिंह राठौर करीब 30 साल से नगर निगम में पदस्थ है और हर परिषद के कार्यकाल में इस पर किसी न किसी मामले में भ्रष्टाचार के आरोप लगे। पूर्व महापौर मधुकर वर्मा की परिषद ने इसे ट्यूबवेल घोटाले में मुख्य आरोपी बनाते हुए लोकायुक्त में केस दर्ज कराया था। हालांकि राठौर ने यहां भी सफाई दिखाई और मामले से जुड़े कई दस्तावेज व सबूत जल गए। इसमें भी आरोप राठौर पर लगा।

 

वर्मा के बाद महापौर बने कैलाश विजयवर्गीय के कार्यकाल में इसके खिलाफ अलग-अलग मामलों में जांच चलती रही। डॉ. उमाशशि शर्मा महापौर बनी तो पाइप घोटाले में और महापौर कृष्णमुरारी मोघे के कार्यकाल में यह ट्रैफिक घोटाले में उलझा। पाइप घोटाले में यह निलंबित भी रहा। इसकी डिग्री भी सवालों के घेरे में रही है।

 

राठौर के फलने-फूलने का सबसे बड़ा केंद्र जल यंत्रालय था, जहां यह हर जलकार्य प्रभारी का करीबी बन गया। उनका और अफसरों का साथ मिलने से इसने जमकर गड़बड़ियां की। पिछले तीन साल से राठौर के पास ही स्वच्छ भारत अभियान के तहत पब्लिक टॉयलेट और केंद्र की योजना के तहत बन रहे एकल शौचालय बनाने का जिम्मा था। पूरे देश में सबसे ज्यादा पब्लिक टॉयलेट इंदौर में ही बने। बताते हैं कि टॉयलेट में लगने वाले फ्लश, नल की टोटियां और अन्य जरूरी सामग्री की खरीदी में भी उसकी अहम भूमिका होती थी।


23 साल की नौकरी में 60 लाख तनख्वाह और बेनामी संपत्ति 15 करोड़ की
अभय सिंह 1995 में नगर निगम में उपयंत्री के पद पर भर्ती हुआ था। फिलहाल वह सहायक यंत्री और स्वच्छ भारत अभियान मिशन में प्रभारी कार्यपालन यंत्री है। उसकी वार्षिक आय छह लाख रुपए है। 23 साल की नौकरी में वेतन से उसकी आय लगभग 60 लाख होना संभावित है। वह भवन बनाने के ठेके भी लेता था। उसके पास से चार अनुबंध पत्र भी मिले। इसके अलावा गुलाब बाग स्थित घर से 20 लाख नकद, 30 लाख कीमत के दो किलो सोने के जेवर, 36 बीमा पॉलिसियां मिलीं, जिनमें 16 लाख का निवेश होना पाया गया।

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