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राजनैतिक मायने / लखनऊ में अटलजी ने शुरू की थी बोहरा समाज से संवाद की परंपरा, गुजरात में मोदी ने इसे आगे बढ़ाया



Atalji started tradition of communicating with Bohra society
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Atalji started tradition of communicating with Bohra society

  • पहली बार ऐसा हुआ जब धर्मगुरु की वाअज़ में पीएम शामिल हुए

Dainik Bhaskar

Sep 14, 2018, 01:23 PM IST

इंदौर.  सैयदना आलीकदर मुफद्दल सैफुद्दीन मौला से मिलने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को इंदौर पहुंचे। पहली बार ऐसा हुआ, जब धर्मगुरु की वाअज़ में प्रधानमंत्री शामिल हुए। वैसे बोहरा समाज के कार्यक्रमों में शामिल होकर उनसे सीधे संवाद की परंपरा भाजपा में पहली बार पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने दो दशक पहले लखनऊ से शुरू की थी।

 

वे बोहरा समाज के कई बड़े आयोजनों में शामिल हुए। बाद में इसी परंपरा को नरेंद्र मोदी ने गुजरात में आगे बढ़ाया। गुजरात के मुख्यमंत्री रहते मोदी लगातार बोहरा समाज के आयोजनों में शामिल हुए। 53वें धर्मगुरु से मोदी ने 27 जनवरी 2014 में मुंबई पहुंचकर खास मुलाकात की थी।

 

 हालांकि 2002 से ही गुजरात के बोहरा समाज के लोग भाजपा के साथ जुड़ने लगे थे। एक खास वजह यह भी मानी गई कि गुजरात में व्यापारिक वर्ग में भाजपा की काफी पैठ है और बोहरा समाज का बड़ा तबका गुजरात के व्यापारिक क्षेत्र में पकड़ रखता है। 

 

इंदौर में 35 हजार, प्रदेश में साढ़े चार लाख, देश में 20 लाख बोहरा समाजजन : मोदी के इंदौर आगमन के राजनीतिक मायने भी हैं। बोहरा समाज के 35 हजार लोग शहर में रहते हैं, जबकि साढ़े चार लाख आबादी प्रदेश में, वहीं देश में 20 लाख बोहरा समाजजन हैं।

 

इसी साल प्रदेश और पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ के साथ ही राजस्थान और तेलंगाना में विधानसभा चुनाव होना हैं। यही वजह है कि चुनावी राज्य के इस शहर में हो रहे इस आयोजन में प्रधानमंत्री की उपस्थिति को राजनीतिक फायदे और चुनावी कैंपेन की अप्रत्यक्ष शुरुआत से जोड़कर देखा जा रहा है। 

 

चुनाव नजदीक, इसलिए निकाले जा रहे हैं राजनीतिक मायने : वाअज़ में पीएम के शामिल होने के संबंध में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय का कहना है मोदी और बोहरा समाज का रिश्ता उस वक्त से है, जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे।

 

बोहरा समाज के 52वें और 53वें धर्मगुरु दोनों से ही मोदी के अच्छे रिश्ते रहे हैं। मोदी का इंदौर आना पहले से ही तय था। चूंकि मोदी राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े हैं, इसलिए उनकी यात्रा के मायने भी राजनीतिक निकाले जा रहे हैं और चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन ऐसा कुछ है नहीं।  

 

इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के भी धर्मगुरुओं से करीबी रिश्ते रहे : कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव सज्जनसिंह वर्मा का कहना है कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी से भी बोहरा समाज के धर्मगुरुओं से काफी करीबी रिश्ते रहे हैं। वे उनके बड़े आयोजनों में शामिल होते थे। 
 

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