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जहां रहते हो उस देश के प्रति ईमानदार रहो, सोचें कि मरने के बाद दो गज जमीन ही चाहिए : सैयदना

दाऊदी बोहरा समाज के 53वें धर्मगुरु सैयदना आलीकदर मुफद्दल सैफुद्दीन मौला की नौ दिनी वाअज बुधवार को शुरू हुई। सुबह 6...

Danik Bhaskar | Sep 13, 2018, 03:11 AM IST
दाऊदी बोहरा समाज के 53वें धर्मगुरु सैयदना आलीकदर मुफद्दल सैफुद्दीन मौला की नौ दिनी वाअज बुधवार को शुरू हुई। सुबह 6 बजे से लोग सैफी नगर मसजिद में जाने के लिए लाइन में लग गए थे। बुरहानी गार्ड और समाज के वरिष्ठ लोग समाजजनों के पास व कार्ड देखकर उन्हें प्रवेश दे रहे थे। वहीं महिलाओं व पुरुषों के जाने के लिए भी अलग व्यवस्था की गई थी। रस्सी और बैरिकेड लगाकर सभी को प्रवेश दिया जा रहा था। जैसे-जैसे वक्त बीत रहा था। वैसे-वैसे हजारों की संख्या में लोग सैफी नगर मसजिद, सैफी नगर ग्राउंड, बुरहानिया सैफिया मवाईद पहुंचे। 8.30 बजे सभी को अंदर प्रवेश दिया गया। सैफी नगर मसजिद के पास सैयदना के घर के बाहर बड़ी संख्या में समाजजनों की भीड़ लगी हुई थी। सैयदना की एक झलक पाने के लिए समाजजन वहां एकत्रित थे। 10.20 बजे सैयदना पालकी में सवार होकर बंगले से बाहर निकले। सैयदना के बाहर आते ही जोर-शोर से समाजजनों ने उनका दीदार किया। हाथ जोड़े समाज के लोग उनकी एक झलक पाने के लिए बेताब थे। पालकी से वे मसजिद में पहुंचे। जहां उनके आते ही मसजिद में मौला-मौला मुफद्दल मौला की मवाईद बुलंद कर रहे थे।

सैफी नगर मसजिद में धर्मगुरु का दीदार होते ही मौला-मौला करने लगे समाजजन।

‘ईमान के रास्ते पर मिलती है रहमत’

वाअज के प्रारंभ में सैयदना के शहजादे सैयदी हुसैन भाई साहब ने कुरान शरीफ की तिलावट की। 11 बजे सैयदना साहब ने वाअज फरमाना शुरू किया। वाअज में उन्होंने कहा- पानी हमेशा धीरे पीएं और तीन सांस में पीएं। पानी पीने से पहले बिस्मिल्लाह पढ़ें। पानी खुदा की नेमत है, इसकी कद्र करें। पानी पीने के बाद खुदा का शुक्र भी अदा करें। सैयदना ने फरमाया कि सभी लोगों को भाईचारा रखना चाहिए। यही नेक नीयत जिंदगी के काम आएगी। जहां रहते हो उस देश के प्रति ईमानदार रहो। इतना सोचकर रखें कि मरने के बाद दो गज जमीन ही चाहिए। बुरहानुद्दीन शकरुवाला ने बताया इंदौर में करीब दो लाख से ज्यादा लोग वाअज के लिए पहुंचे हैं। वाअज के खत्म होने के बाद सामूहिक भोज का आयोजन हुआ।

वाअज सुनने के लिए घर की छतों पर भी खड़े रहे समाजजन

सैफी नगर इलाके में मसजिद के आसपास बने घरों में समाजजन व बुजुर्ग महिलाएं घर की छतों व बालकनियों में बैठकर सैयदना साहब की वाअज सुनते नजर आए। मीडिया प्रभारी मजहर हुसैन सेठजीवाला ने बताया पंडाल और मसजिद में महिलाएं छोटे से छोटे बच्चों को लेकर भी पहुंचीं।

सैयदना के साथ रो पड़े समाजजन

वाअज में कर्बला में तीन दिन के भूखे-प्यासे शहीद हुए इमाम हुसैन पर सलवात पढ़ते रहे। सैयदना साहब ने फरमाया कि मोहर्रम की दो तारीख को इमाम हुसैन का काफिला कर्बला पहुंचा था। सैयदना साहब ने कहा- अाका हुसैन का घोड़ा अपने आप यहां रुक गया था, जिसके बाद वे दस दिन तक वहीं रुके। सैयदना साहब ने इमाम हुसैन की शहादत पढ़ी। शहादत पढ़ते वक्त काफी दुखी हुए, शहादत पढ़ते वक्त उनकी आंखों से भी आंसू छलक पड़े। पूरे पंडाल और मसजिद में गम का माहौल छा गया था। सैयदना के साथ-साथ समाजजन के महिला-पुरुष और बच्चों ने भी अश्क बार आंखों से मातम किया।

हजारों वाहन चालक होते रहे परेशान

सैयदना साहब की वाअज सुनने के लिए लोग सैफी नगर इलाके में पहुंच रहे हैं। वाअज के बाद लोग सामूहिक भोजन कर बाहर निकले। इस कारण दोपहर डेढ़ से साढ़े तीन बजे तक माणिकबाग ब्रिज से चोइथराम चौराहे की ओर जाने वाले रास्ते पर वाहन चालक ट्रैफिक जाम में फंसे रहे। इस दौरान माणिकबाग ब्रिज के समीप निगम की सफाई गाड़ी ने एक बाइक सवार को टक्कर मार दी।

वीजा के चक्कर में पहले लौटाया फिर बुलवाया

पाकिस्तान से आए बोहरा समाज के लोगों को वीजा के चक्कर में पहले वापस लौटाया था। लेकिन अन्य स्थानों से परमिशन मिलने के बाद उन्हें वापस बुलवाया गया। हालांकि पाकिस्तान से आए लोग जा चुके थे।