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भय्यू महाराज की श्रद्धांजलि सभा में बेटी और पत्नी बैठी थीं 3 फीट की दूरी पर, दोनों ने एक-दूसरे से नजर तक नहीं मिलाई

एक ही बंगले में रह रहीं बेटी और पत्नी, लेकिन एक-दूसरे का मुंह तक नहीं देख रहीं।

Danik Bhaskar | Jun 15, 2018, 04:03 PM IST
कुहू के पास पूरे समय विनायक है तो आयुषी के पास उसके परिजन। कुहू के पास पूरे समय विनायक है तो आयुषी के पास उसके परिजन।

इंदौर। भय्यू महाराज की शोकसभा। मंच पर एक-दूसरे से तीन फीट की दूरी पर बैठी महाराज की बेटी कुहू और पत्नी डॉ. आयुषी। एक घंटे चली शोकसभा में इतने करीब बैठने के बाद भी दोनों ने एक-दूसरे को नहीं देखा। तल्खी जस की तस बनी हुई है। शोकसभा शुरू हुई तो दोनों अलग-अलग कार से आईं और मंच के पास दूरी बनाए खड़ी रहीं।

- कुहू को विनायक तो आयुषी को कांग्रेस नेत्री शोभा ओझा ने पास बैठाया। शोकसभा खत्म हुई तो आयुषी एक झटके में उठकर अपने दोस्तों के साथ रवाना हो गईं।

- वे मीडिया में कुछ बोलना चाहती थीं। एक पल रुककर मुड़ना चाह रही थीं, लेकिन फिर कार में बैठकर चली गईं। नक्षत्र ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में गुरुवार शाम 5 बजे शोकसभा शुरू हुई।

- आयुषी को सहारा देकर मंच पर चढ़ाया। वे परे समय गुमसुम रहीं। शून्य को ताकती रहीं। महाराज को श्रद्धा सुमन अर्पित कर लोग आयुषी के सामने आकर हाथ जोड़ते लेकिन आयुषी का ध्यान ही नहीं रहता।

- जब कोई पास जाकर आयुषी को नमस्कार करता तो उसका ध्यान टूटता और वह नमस्कार करती। कुहू ने पूरे समय हाथ जोड़कर संवेदना प्रकट करने वालों का आभार माना।

- उसके हाथ जोड़ने के तरीके को देखकर लोग कहते वह बिलकुल महाराज की तरह प्रणाम करती है।

पिता और पहली पत्नी की अस्थियां नर्मदा में ही की थीं विसर्जित

- गुरुवार सुबह मुक्तिधाम में अस्थि संचय हुआ। कुहू और महाराज के करीबी, रिश्तेदार वहां गए। अस्थि संचय की क्रिया पूरी की।

- महेश्वर में दोपहर 2 बजे कुहू के हाथों अस्थियों का विसर्जन किया गया। भय्यू महाराज भी कुछ साल पहले पिता एवं पत्नी माधवी की अस्थियां नर्मदा में ही विसर्जित करने गए थे।

कुहू का ध्यान विनायक तो आयुषी को संभाल रहे उनके परिजन

- महाराज के निधन के बाद कुहू व आयुषी सुखलिया स्थित महाराज के पहले निवास शिवनेरी में हैं। बंगले में तीन बेडरूम हैं।

- एक कमरा कुहू, दूसरा महाराज और तीसरा आयुषी का है। दोनों एक ही बंगले में रहकर मुंह तक नहीं देख रहीं।

- कुहू के पास पूरे समय विनायक है तो आयुषी के पास उसके परिजन। वहीं आश्रम व परिवार से जुड़े कुछ सेवादारों ने बताया कि बेटे की मौत के बाद से मां कुमुिदनी सदमे में हैं।

- न तो वह किसी से कुछ बोल रही हैं और न आंखों से आंसू आ रहे हैं। सेवादारों को देखकर भी वह कुछ प्रतिक्रिया नहीं दे रही हैं। हालांकि एक नर्स उनका पूरा ध्यान रख रही है।

4 माह की बेटी ने नवाया तस्वीर के सामने शीश|

- महाराज व आयुषी की चार महीन की बेटी भी मंच पर किसी की गोद में थी। मासूम की आवाज हॉल में गूंजती रही।

- वह कभी वह हंसती तो कभी किसी चीज को दखकर चिल्लाती। बार-बार वह नन्हे हाथों स मां को छूने की कोशिश भी करती।

- परिजन न बच्ची को गोद में लेकर महाराज की तस्वीर के आग शीश नवाया। बच्ची को हल्की-हल्की थपकी दी तो वह खले ते-खले ते सो गई।

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