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भय्यू महाराज के आश्रम में भी सब कुछ ठीक नहीं चल रहा था, पत्नी का दखल बढ़ता जा रहा था, करीबी दूर होते गए

ट्रस्ट के चेयरमैन का पद छोड़ चुके महाराज के मौसा का आश्रम से सटकर घर है पर 6 माह से मिलने नहीं आए।

Bhaskar News | Last Modified - Jun 14, 2018, 05:26 AM IST

भय्यू महाराज के आश्रम में भी सब कुछ ठीक नहीं चल रहा था, पत्नी का दखल बढ़ता जा रहा था, करीबी दूर होते गए

इंदौर. खुद को गोली मारकर खुदकुशी करने वाले संत भय्यू महाराज बुधवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। भय्यू महाराज के स्प्रिंग वैली के बंगले में चले जाने के बाद परिवार के लोगों को भी तवज्जो नहीं मिल रही थी। कोई बंगले पर मिलने जाता तो उन्हें अंदर भी नहीं आने दिया जाता था। कह देते थे कि महाराज ध्यान की मुद्रा में हैं। उनकी माताजी की तबीयत ठीक नहीं। वह सो रही हैं। घर में कोई नहीं है। इस तरह की बातें बताकर रिश्तेदारों को लौटा दिया जाता था। रिश्तेदार भी लगभग कट चुके थे। सूर्योदय आश्रम में भी सब कुछ ठीक नहीं चल रहा था।

आयुषी का दखल ट्रस्ट की गतिविधियों में बढ़ता जा रहा था

- महाराज के मौसा शरद एस. पंवार ने डेढ़ साल पहले ही ट्रस्ट का चेयरमैन पद छोड़ दिया था। उनका घर आश्रम से सटकर ही है, लेकिन छह महीने से वह महाराज से मिले तक नहीं थे। आश्रम की गतिविधियों में दखल खत्म हो गया था। ट्रस्ट के सचिव तुषार पाटिल ही सारी गतिविधियां देख रहे थे। हालांकि इसमें भी विनायक का दखल सबसे ज्यादा रहता था। महाराज के शुरुआती समय के साथी संजय यादव भी एक घटनाक्रम के बाद आश्रम की गतिविधि से दूर कर दिए गए थे।

- वहीं शादी के बाद से ही आयुषी का दखल ट्रस्ट की गतिविधियों में बढ़ता जा रहा था। एक साल से तो लगभग हर काम वही तय कर रही थीं। ट्रस्ट को मजबूती देने के लिए महाराज ने जल्द ही बड़ी मीटिंग लेना तय किया था।


बेटी का क्या होगा?
अायुषी से दूसरी शादी के बाद परिवार बिखर गया था। पहली पत्नी माधवी की बेटी कुहू शादी में भी नहीं आई थी। वह पुणे में ही रहकर पढ़ाई कर रही है। महाराज ही उससे मिलने वहां जाते थे। कुहू और आयुषी के बीच कहासुनी होती रहती थी। अब महाराज के निधन के बाद उसकी देखरेख की जिम्मेदारी उम्रदराज दादी पर आ गई है।

आश्रम में पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन के लिए उमड़े अनुयायी, महाराष्ट्र से बड़ी संख्या में पहुंचे

भय्यू महाराज के पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन करने के लिए बुधवार सुबह 8 बजे से सुखलिया में उनके आश्रम के बाहर भीड़ जुटने लगी थी। 9.30 बजे जैसे ही उनका पार्थिव शरीर पहुंचा, उनकी एक झलक पाने के लिए भक्तों का तांता लग गया। महिलाएं वहां से जाने को तैयार नहीं थीं। वे आश्रम के उद्यान में बैठ गईं।


अण्णा महाराज बोले- उनके कामों को आगे बढ़ाएंगे
संत अण्णा महाराज ने भय्यू महाराज को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि देशभर में उन्होंने कई महान कार्य किए। जरूरतमदों और किसानों के लिए उनकी कई योजनाएं चल रही हैं। उनके कार्यों को सब मिलकर बढ़ाएंगे।
अठावले पहले ही आ गए, फोटो पर फूल चढ़ा गए
केंद्रीय मंत्री और महाराष्ट्र के बड़े नेता रामदास अठावले भी श्रद्धांजलि देने पहुंचे। हालांकि वे सुबह जल्दी पहुंचे, तब पार्थिव शरीर आश्रम नहीं पहुंचा था। अठावले ने उनकी तस्वीर पर फूल चढ़ाए और लोगों को ढांढस बंधाया।

बड़े नेताओं ने बनाई दूरी
भय्यू महाराज के अंतिम संस्कार और श्रद्धांजलि सभा में महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के मुख्यमंंत्री के आने की चर्चा थीं, लेकिन वे नहीं आए। इसके अलावा शहर के ज्यादातर पार्षद, विधायक, सांसद व मंत्री भी नहीं दिखाई दिए। धर्मगुरुओं में कम्प्यूटर बाबा ही पहुंचे थे, लेकिन वे भी आश्रम में अंतिम दर्शन करके लौट गए। महापौर मालिनी गौड़ भी अंतिम दर्शन के लिए आश्रम पहुंची थीं।

वे ऐसे संत थे, जिनसे मिलकर सभी में ऊर्जा आती थी
- संत भय्यू महाराज के अंतिम संस्कार के बाद मुक्तिधाम में श्रद्धांजलि सभा हुई। इसमें विशिष्टजनों ने महाराज से जुड़े किस्से सुनाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। महाराष्ट्र की महिला एवं बाल कल्याण मंत्री पंकजा मुंडे ने कहा- जब भी मैं संशय में होती तो वे सदैव बड़े भाई जैसे मेरा मार्गदर्शन करते। उनसे मिलकर नकारात्मक भाव समाप्त हो जाता था।

- महाराष्ट्र सरकार के पीडब्ल्यूडी मंत्री एकनाथ संभाजी ने कहा- संत भय्यू महाराज से मैं जितनी बार मिला उनका ओजस्वी मुख देखकर मेरा सारा तनाव चला जाता था। वे एक पिता, भाई और मित्र की तरह सभी की परेशानियों को सुनते और निराकरण करते थे।

- महाराष्ट्र और गुजरात सरकार की ओर से श्रद्धांजलि देने के लिए उनके ओएसडी आए थे। इसके अलावा कलेक्टर निशांत वरवड़े, डीआईजी हरिनारायणाचारी मिश्र, एसपी अवधेश गोस्वामी, विधायक रमेश मेंदोला, जीतू जिराती, आरएसएस के शैलेंद्र महाजन और कृष्णकुमार अष्ठाना ने भी श्रद्धांजलि दी।

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