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भय्यू महाराज की दूसरी शादी के बाद बेटी ने भी बना ली थी दूरी, वह नहीं रहती थी पिता के पास

भय्यू महाराज लोगों को जीने की राह दिखाते थे, खुद हारे जिंदगी से

Dainik Bhaskar

Jun 13, 2018, 03:44 AM IST
Bhaskar  Exclusive report of  bhayyu maharaj suicide case

- 50 लाख की प्रॉपर्टी को लेकर भी विवाद आ रहा सामने, जिससे भी वह तनाव में थे।

- तनावमुक्ति के लिए पैतृक घर जाने वाले थे, वहीं पर लंबे समय रुकने का था इरादा।

इंदौर. भय्यू महाराज का बुधवार को अंतिम संस्कार कर दिया गया। दूसरी तरफ, आत्महत्या के मामले में पुलिस कई बिंदुओं पर जांच कर रही है। भय्यू महाराज कई दिन से पारिवारिक तनाव में थे। पत्नी आयुषी से उनके विवादों की बात पर पुलिस जांच कर रही है। सूत्र बताते हैं दूसरी शादी के बाद पत्नी का दखल उनके जीवन में काफी बढ़ गया था। इसे लेकर कई बार उनमें कहा-सुनी हो चुकी थी। भय्यू महाराज पहली पत्नी से हुई बेटी कुहू से बहुत प्यार करते थे। दूसरी शादी होने के बाद बेटी ने उनसे दूरी बना ली थी। दूसरी पत्नी से उनकी तीन महीने की बेटी है। कुहू पुणे से मंगलवार को ही इंदौर आई थी। बेटी के कमरे को अस्त-व्यस्त देख पत्नी से उनकी बहस हुई थी। नौकरों को भी इस बात पर उन्होंने डांटा था। कुछ महिला अनुयायी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा वे 50 लाख की प्रॉपर्टी के विवाद और पारिवारिक कलह को लेकर तनाव में थे।

भय्यू महाराज का सूर्योदय आश्रम के नाम से एक एनजीओ चलता है, जो नर्मदा नदी के आसपास विकास कार्य करता है। कई ग्रामीणों के लिए इनके एनजीओ ने एक हजार से ज्यादा तालाब और पानी की टंकियों की व्यवस्था करवाई थी। सूत्र बताते हैं सीएम द्वारा नर्मदा किनारे 6 करोड़ से ज्यादा के 16 लाख पेड़-पौधे लगाने में काफी घपला हुआ है। इसकी जानकारी एनजीओ ने सुबूत भय्यू महाराज तक पहुंचाई थी। इस पर उन्होंने सीएम से चर्चा भी की थी। बताया जाता है इसे लेकर भी वे तनाव में थे।


शादी समारोह में भी नहीं आई थी कुहू
पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि भय्यू महाराज की दूसरी शादी की कुहू को जानकारी ही नहीं थी। वह शादी में भी नहीं आई थी। बाद में पता चलने पर कुहू ने घर में विवाद किया और पूजा का दीया तक फेंक दिया। महाराज ने पत्नी और बेटी को समझाया था। घर की पुताई के दौरान कुहू की मां और भय्यू महाराज की पहली पत्नी माधवी की तस्वीरें हटा दी गई थीं। तब भी घर में झगड़ा हुआ था।


हर घंटे फोन पर दोनों में होती थी बात
घटना के बाद डॉ. आयुषी बदहवास... रोती... चीखती हुई अस्पताल पहुंची। लोगों से पूछा गुरुजी कहां, कहां रखा है उनको। चेहरे पर तनाव था, लेकिन आंसू एक भी नहीं। जैसे ही उन्हें बताया कि आईसीयू में हैं। आयुषी दो-दो सीढ़ी एक साथ चढ़कर आईसीयू की ओर भागीं। उनकी ऐसी हालत देखकर वहां मौजूद रिश्तेदार, शिष्य भी बिलख पड़े। डॉ. आयुषी अस्पताल में रोते, बिलखते हुए कहती रहीं एक भी दिन गुरुजी ने मुझसे नहीं कहा कि कोई तनाव है। मुझे गुरुजी की ऐसी आदत हो गई थी कि हम एक-दूसरे के बिना नहीं रह पाते थे। हर घंटे में मैं उनको फोन लगाती थी या वो मुझे मोबाइल लगाकर हाल जान लेते थे। हम कई मिनटों तक बातें किया करते थे। अब मुझे फोन कौन लगाएगा? सब लोग तो गुरुजी से मिलने घर आते थे। अब हमारे घर कौन आएगा? दो घंटे हो गए। उनका फोन ही नहीं आया। बार-बार मुझे लग रहा है कि अब उनका फोन आता ही होगा।

भय्यू महाराज से जुड़ी आखिरी यादें...

सबसे बड़ी घोषणा... - भय्यू महाराज ने दत्त जयंती के अवसर पर पर्यावरण महायज्ञ कराया था। इसमें घोषणा की थी कि देशभर के ऐसे बच्चे जो अनाथ हैं, ऐसी माताएं जिनके साथ ज्यादती हुई और संतान को मजबूरी में जन्म दिया, उन सबको मैं अपना नाम देता हूं। किसी भी संस्थान में पिता के नाम की जरूरत हो तो ऐसे बच्चे मेरेे नाम का इस्तेमाल कर सकते हैं।

आखिरी कार्यक्रम... - हाल ही में जाति के नाम पर देश के कुछ हिस्सों में हुई हिंसा के बाद इसे खत्म करने के लिए हमसाज नामक आयोजन कराया था। सभी धर्मों के गुरुओं को एक मंच पर भय्यू महाराज लाए थे। वे कार्यक्रम के संरक्षक थे। इसमें किन्नर अखाड़े के महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी, साध्वी प्रज्ञा भारती भी आई थीं।

आखिरी भेंट... आश्रम में कुछ खास लोगों से
रविवार दोपहर डेढ़ बजे आश्रम पहुंचे। गार्ड से मिले। सीधे अपनी गादी पर बैठे। रात तक बैठे रहे। इस दौरान कुछ खास लोगों से ही मिले। आश्रम से जुड़े लोगों का कहना है कि उस दिन उनकी मुद्रा कुछ अलग ही थी।

दिखाई उदारता... हमला करने वालों को माफ किया
पिछले साल पुणे से इंदौर आते वक्त उन पर हमला भी हुआ था। पुलिस ने आरोपी पकड़ भी लिए थे, लेकिन भय्यू महाराज ने उन्हें माफ कर दिया था।


राजनीति में दखल... बड़े नेताओं से मेल-मुलाकात
दत्त जयंती और गुरु पूर्णिमा दो ऐसे आयोजन थे जिसमें देशभर के नेता आते थे। महाराष्ट्र के भाजपा, कांग्रेस नेताओं में उनका अच्छा प्रभाव था। पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, भारत रत्न लता मंगेशकर, देवेंद्र फडनवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, सुशील कुमार शिंदे उनके बेहत करीबी थे।

1.45 पर मौत की पुष्टि 1.57 पर आखिरी ट्वीट
भय्यू महाराज के अधिकृत ट्विटर अकाउंट से मंगलवार दोपहर 1 .57 बजे आखिरी ट्वीट हुआ। इसमें मास शिवरात्रि की बधाई दी। 1 .46 मिनट पर गोपीनाथ कविराज की पुष्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की। 12.13 बजे नरेंद्रसिंह तोमर को जन्मदिन पर बधाई दी। ट्विटर अकाउंट स्टाफ द्वारा संचालित किया जाता है, लेकिन भय्यू महाराज ने खुद यह ट्वीट किए।

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