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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर रोज आ रहे सिर्फ 5 मरीज, वेतन-भत्ते पर खर्च 25 लाख रुपए

शहर के 28 केंद्रों पर हालात यह हैं कि डॉक्टर, स्टाफ के न रहने से वहां दिनभर में चार-पांच से ज्यादा मरीज नहीं आते।

Bhaskar News | Last Modified - May 17, 2018, 03:22 AM IST

  • प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर रोज आ रहे सिर्फ 5 मरीज, वेतन-भत्ते पर खर्च 25 लाख रुपए
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    होलकर कॉलेज : पहचानना ही मुश्किल।

    इंदौर.सरकार ने जिला व एमवाय अस्पताल का बोझ कम करने के लिए शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तो खोल दिए, लेकिन वहां मरीजों को उपचार मिल रहा है या नहीं, यह देखने कोई नहीं जाता। शहर के 28 केंद्रों पर हालात यह हैं कि डॉक्टर, स्टाफ के न रहने से वहां दिनभर में चार-पांच से ज्यादा मरीज नहीं आते। कुछ केंद्र तो इस वजह से एकाध घंटे के लिए खुलकर बंद हो जाते हैं।


    थंब इंप्रेशन मशीन से भी नहीं पड़ा असर, डॉक्टर रहते हैं गायब
    शहरी स्वास्थ्य केंद्रों के स्टाफ की हाजिरी लगाने के लिए बायोमेट्रिक मशीनें लगी हैं, लेकिन मॉनिटरिंग नहीं होने का फायदा उठाकर डॉक्टर नहीं आते। कई स्वास्थ्य केंद्रों में तो डॉक्टर संविदा नियुक्ति पर हैं, पर वरिष्ठ अधिकारियों से नजदीकी का फायदा उठाकर तनख्वाह में कटौती और कार्रवाई से बच जाते हैं। आरटीआई कार्यकर्ता डॉ. आनंद राय कहते हैं कि इन डॉक्टरों के मोबाइल नंबर, लोकेशन निकालेंगे तो सब निजी अस्पतालों में काम करते मिलेंगे।

    होलकर कॉलेज : पहचानना ही मुश्किल

    होलकर साइंस कॉलेज के परिसर में पिछले हिस्से में खंडहरनुमा भवन में स्वास्थ्य केंद्र बना हुआ है। बाहर से देखकर तो पता ही नहीं चलता कि यह स्वास्थ्य केंद्र है, जबकि यहां डॉक्टर और स्टाफ भी पदस्थ है। इनके वेतन, भत्ते पर हर महीने 25 लाख रुपए खर्च होते हैं। भास्कर ने दो दिन यहां पड़ताल की तो दिन में पांच से ज्यादा मरीज नहीं पहुंचे। पता चला कि बमुश्किल दो घंटे स्टाफ रहता है, ऐसे में मरीज यहां के बजाय एमवाय चले जाते हैं।

    खजराना : 4 साल से नहीं हैं डॉक्टर

    खजराना के रामनारायण पाटीदार परिवार ने 6 कमरों की व्यवस्थित डिस्पेंसरी बनवाकर दी थी। इसमें 4 साल से कोई डॉक्टर ही नहीं है। यह क्लिनिक वैक्सीन और दूसरी दवाओं का स्टोर रूम बनकर रह गया है। टीबी मरीजों की देखभाल करने वाले हरप्रसाद बताते हैं कि 2014 के पहले यहां डॉ. रावत पदस्थ थीं। तब 250 से ज्यादा मरीज आते थे, पर अब जांच और दवाइयां मिलना भी बंद हो गई हंै।

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    खजराना : 4 साल से नहीं हैं डॉक्टर।
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Web Title: Bhaskar Ground Report Of Primary Health Center At Indore
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