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भय्यू महाराज का अंतिम संस्कार: पापा...प्यारे पापा... बाबा...उठो बाबा...बोलते-बोलते बेटी ने दी मुखाग्नि

पिता का दाह संस्कार करते वक्त कुहू की हालत ऐसी थी कि वह ठीक से खड़ी नहीं हो पा रही थी।

Bhaskar News | Last Modified - Jun 14, 2018, 10:52 AM IST

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    भय्यू महाराज के पार्थिव शरीर के पास मां, बेटी कुहू और पत्नी आयुषी थीं, लेकिन कुहू और आयुषी ने एक-दूसरे को नजरअंदाज किया।

    इंदौर।खुद को गोली मारकर खुदकुशी करने वाले संत भय्यू महाराज बुधवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। शाम चार बजे मुक्तिधाम में बेटी कुहू ने उन्हें मुखाग्नि दी। पिता का दाह संस्कार करते वक्त कुहू की हालत ऐसी थी कि वह ठीक से खड़ी नहीं हो पा रही थीं। महाराजा के करीबी उसे सहारा देकर क्रियाकर्म की रस्में पूरी करवा रहे थे। वह बस रोती जा रही थी। पापा... प्यारे पापा... बाबा...उठो बाबा... बोलते-बोलते उसने चिता को मुखाग्नि दी। कुहू की बातों को सुनकर वहां मौजूद हर किसी की आंख भर आई। वहीं चार माह की बेटी को पिता के दर्शन के लिए लाया गया तो कुहू और बिलखकर रो पड़ी।

    बेटी बोली- बाबा अब मेरा क्या होगा आपने सोचा ही नहीं

    - आश्रम में महाराज के शव को बॉडी कूलर में रखा गया था। बेटी कुहू बोल रही थी कि एक बार मेरे प्यारे बाबा को मुझे गले तो लगाने दो। बाबा, बस एक बार मुझे देखकर मुस्करा दो..। मैं तो अभी इतनी छोटी हूं। किसके सहारे रहूंगी।

    - मेरा क्या होगा... आपने एक बार भी नहीं सोचा। मैं आपने बस मिलने आ ही रही थी। मैंने क्या-क्या सोच रखा था। आते ही आपको गले लगा लूंगी। बहुत सारी बातें थी जो आपको बताना थी। आप तो मुझसे मिलने आने वाले थे।

    - मेरे साथ घूमने की बात कर रहे थे। मैं क्या करूंगी? मुझे रूठना होगा तो किससे रूठूंगी? आप मुझसे बिना मिले चले गए। मम्मी भी साथ नहीं हैं। आपने भी मुंह फेर लिया। बेटी के साथ कोई ऐसा करता है क्या? मुझे प्यार कर लो। सिर पर हाथ फेर दो ना।

    बेटी का क्या होगा ?

    - अायुषी से दूसरी शादी के बाद परिवार बिखर गया था। पहली पत्नी माधवी की बेटी कुहू शादी में भी नहीं आई थी। वह पुणे में ही रहकर पढ़ाई कर रही है। महाराज ही उससे मिलने वहां जाते थे। कुहू और आयुषी के बीच कहासुनी होती रहती थी। अब महाराज के निधन के बाद उसकी देखरेख की जिम्मेदारी उम्रदराज दादी पर आ गई है।

    पत्नी रोते हुए बोली- हमें किसके भरोसे छोड़ गए, एक बार बोल दो

    - डॉ. आयुषी भी बॉडी कूलर के ऊपर से ही महाराज के सिर पर हाथ फेरने की कोशिश करती रही। वह कभी रोतीं तो कभी यादों में खो जातीं। महाराज को गर्मी पसंद नहीं थी। वह बाडी कूलर पर बार-बार हाथ से हवा दे रही थी। वह बोलती रहीं कि तुमने सुबह (मंगलवार) तो मुझे हंस के भेजा था। तुम एक बार आंखे खोलकर मेरी हालत तो देखो यार। मुझ पर दया करो।

    - अपनी बेटी (चार महीने) को मैं क्या बोलूंगी? वह रात को रोएगी तो कौन उसे घुमाकर सुलाएगा? तुम्हारी आवाज सुनकर तो वह खिलखिला उठती थी।

    - आपका फोटो देखकर वह रोएगी तो मैं उसे कैसे चुप कराऊंगी? तुमको टेंशन थी...मुझे तो बोलकर देखते..। हमें किसके भरोसे छोड़कर गए? एक बार तो बोल दो यार..।

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    रोती-बिलखती बेटी कुहू। और पत्नी आयुषी थीं, लेकिन कुहू
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    भय्यू महाराज की दूसरी पत्नी आयुषी ।
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