मप्र / इनपुट क्रेडिट में बड़ा खेल; मध्य प्रदेश समेत 7 राज्यों की 23 कंपनियों ने किया 1800 करोड़ का जीएसटी घोटाला

 जीएसटी में बोगस बिल काटकर टैक्स चोरी करने का 1800 करोड़ का घोटाला सामने आया। (प्रतीकात्मक फोटो)  जीएसटी में बोगस बिल काटकर टैक्स चोरी करने का 1800 करोड़ का घोटाला सामने आया। (प्रतीकात्मक फोटो)
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 जीएसटी में बोगस बिल काटकर टैक्स चोरी करने का 1800 करोड़ का घोटाला सामने आया। (प्रतीकात्मक फोटो) जीएसटी में बोगस बिल काटकर टैक्स चोरी करने का 1800 करोड़ का घोटाला सामने आया। (प्रतीकात्मक फोटो)

  • इस घोटाले का खुलासा मप्र वाणिज्यिक कर विभाग की टैक्स रिसर्च विंग ने किया
  • टैम्पो, ऑटो के नंबरों पर जारी कर दिए ई वे बिल, एक कंपनी के 600 करोड़ के बिल

दैनिक भास्कर

Mar 07, 2020, 10:07 AM IST

इंदौर (संजय गुप्ता). जीएसटी में बोगस बिल काटकर टैक्स चोरी करने का 1800 करोड़ का घोटाला सामने आया है। इस घोटाले का खुलासा मप्र वाणिज्यिक कर विभाग की टैक्स रिसर्च विंग ने किया और जब गहराई से जांच की गई तो इसमें उत्तरप्रदेश, दिल्ली, बिहार, असम, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा की 23 कंपनियां शामिल मिलीं। इस पर स्टेट टैक्स कमिश्नर राघवेंद्र सिंह ने सभी राज्यों के कमिश्नरों से बात की और तीन दिन पहले सभी राज्यों में एक साथ कंपनियों के ठिकानों पर दबिश दी गई। 

इसमें जांच जारी है और आंकडा लगातार बढ़ रहा है। अफसरों को और भी राज्यों की कंपनियों के शामिल होने की आशंका है, जिनकी जानकारी पकड़ी गई कंपनियों के दस्तावेजों और बिलों से निकाली जा रही है। कई जगह तो कंपनियों के दर्ज पते ही मौके पर नहीं मिले हैं तो कुछ जगह मजदूरों के नाम पर कंपनियां रजिस्टर्ड होने की बात सामने आ रही है। सूत्रों के अनुसार इन कंपनियों ने एक से दो माह पहले ही खुद को जीएसटी में रजिस्टर्ड किया, फिर ई वे बिल जारी कर यार्न-माल की खरीदी-बिक्री दिखाते हुए बिल काटने शुरू किए। मप्र में ये घोटाला 650 करोड़ रुपए के आसपास का है। 

ऐसे हुआ घोटाला- फर्जी कंपनी बनाई, व्यापारियों ने इनपुट क्रेडिट ले लिया

  •  किसी भी व्यापारी को 50 हजार से ज्यादा का माल एक से दूसरे राज्य में भेजना हो तो ई वे बिल जारी किया जाता है। इस पर माल के हिसाब से 5 से 28 फीसदी तक टैक्स लगता है। 
  •  घोटाले में हुआ ये कि कई लोगों ने फर्जी कंपनी बनाकर उनके नाम से ई वे बिल जारी कर दिए। इसके बदले में इन लोगों को व्यापारियों ने कमीशन दे दिया और उधर व्यापारियों ने इस ई वे बिल को सरकार को दिखाकर इनपुट क्रेडिट बैंक खातों में ले लिया। 
  •  सबसे बड़ी बात ये कि कई मामलों में तो माल गया ही नहीं और ई वे बिल जारी हो गए। 
  •  फर्जी कंपनियों ने ई वे बिल जिन वाहनों के नंबरों पर जारी किए, इसमें अधिकांश टेम्पो, ऑटो, लोडिंग व ट्रक के नंबर हैं, जो 20 साल पुराने हैं और भंगार में पहुंच चुके हैं। ऐसा इसलिए किया, ताकि गड़बड़ी पकड़ में न आ सके।  

भोपाल की दो कंपनियां फर्जी मिलीं
वाणिज्यिक कर विभाग इंदौर की विंग ने कुछ दिन पहले भोपाल की एक कंपनी के 29 जनवरी को पंजीयन लेने और फिर एक महीने में ही 600 करोड़ रुपए की बिलिंग करने व ई वे बिल जारी करने का मामला पकड़ा। भोपाल की ही एक और कंपनी घोटाले में सामने आई, जिसने 50 करोड़ से अधिक की बिलिंग की है।

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