लोकसभा चुनाव / कैलाश विजयवर्गीय का इंदौर से चुनाव लड़ने से इंकार, कहा- बंगाल में रहना मेरा कर्तव्य



भाजपा महासचिव विजयवर्गीय बंगाल के प्रभारी हैं। भाजपा महासचिव विजयवर्गीय बंगाल के प्रभारी हैं।
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भाजपा महासचिव विजयवर्गीय बंगाल के प्रभारी हैं।भाजपा महासचिव विजयवर्गीय बंगाल के प्रभारी हैं।

  • कैलाश इंदौर लोकसभा सीट के लिए भाजपा की ओर से सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे थे
  • कांग्रेस ने इंदौर सीट से पकंज संघवी को प्रत्याशी घोषित किया है

Dainik Bhaskar

Apr 17, 2019, 01:45 PM IST

इंदौर. भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने इंदौर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने से इंकार किया है। उन्होंने बुधवार सुबह एक ट्वीट कर कहा, 'पश्चिम बंगाल की जनता मोदीजी के साथ खड़ी है, मेरा बंगाल में रहना कर्तव्य है।' दरअसल, लंबे इंतजार के बाद मंगलवार शाम काे कांग्रेस ने पंकज संघवी को इंदाैर से अपना प्रत्याशी घाेषित किया है। इसके बाद अब भाजपा प्रत्याशी का सभी काे इंतजार है। यहां से कैलाश विजयवर्गीय को मजबूत दावेदार माना जा रहा था। 

 

यह लिखा ट्वीट में... 

"इंदौर की जनता, कार्यकर्ता व देशभर के शुभ चिंतकों की इच्छा है कि मैं लोकसभा चुनाव लड़ूं, पर हम सभी की प्राथमिकता समर्थ, समृद्ध भारत के लिए नरेंद्र मोदी को एक बार फिर पीएम बनाना है। पश्चिम बंगाल की जनता मोदीजी के साथ खड़ी है, मेरा बंगाल में रहना कर्तव्य है... अतः मैंने चुनाव न लड़ने का निर्णय लिया है।"

 

 

इसलिए फंसा भाजपा प्रत्याशी पर पेंच

 इंदौर सांसद और लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन इंदौर सीट से लगातार 8 बार चुनकर संसद तक पहुंची हैं, लेकिन इस बार वे पार्टी के फॉमूले 75 साल के फेर में फंस गई। उनकी उम्र 75 साल होने से इस बार पार्टी उनके विकल्प के बारे में सोच रही है। इसीलिए पार्टी द्वारा अब तक प्रत्याशी घोषित नहीं किया गया। कैलाश विजयवर्गीय के इंकार के बाद अब प्रत्याशी के तौर पर महापौर मालिनी गौड़, विधायक रमेश मेंदोला का नाम चर्चा में है।

 

कांग्रेस का चेहरा संघवी, 21 साल से चुनाव नहीं जीते

कांग्रेस के प्रत्याशी पंकज को पार्टी ने 21 साल बाद दूसरी बार टिकट दिया। इससे पहले 1998 में भी वे कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े थे, पर तब भाजपा उम्मीदवार सुमित्रा महाजन से हार गए। वैसे कांग्रेस को सबसे ज्यादा मशक्कत इंदौर को लेकर ही करना पड़ी। संघवी शुरू से दावेदारी में आगे चल रहे थे, पर भाजपा से किसी बड़े बाहरी नेता के लड़ने की सुगबुगाहट में कांग्रेस ने टिकट रोक दिया।

 

पंकज संघवी के राजनीति सफर पर एक नजर-

  •  संघवी ने पहली बार 1983 में वल्लभ नगर वार्ड से चुनाव लड़ा और जीतकर पार्षद बने। तब वे भाजपा में थे, बाद में कांग्रेस में शामिल हो गए। 
  •  1998 में पहली बार कांग्रेस ने उन्हें लोकसभा का टिकट दिया। सुमित्रा महाजन जो 90 हजार से सवा लाख के अंतर से चार चुनाव जीती थीं, संघवी से कड़े मुकाबले में 49 हजार वोटों से जीत पाईं। 
  • 2009 में वे महापौर का चुनाव लड़े। यह भी कांटेदार मुकाबला रहा। संघवी को भाजपा के कृष्णमुरारी मोघे ने करीब 4 हजार वोटों से हराया। 
  •  2013 में वे क्षेत्र 5 से विस चुनाव लड़े। महेंद्र हार्डिया ने करीब 14 हजार वोट से पराजित किया।
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