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हादसा

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Danik Bhaskar | Jan 28, 2018, 01:35 PM IST
55 साल की पुष्पा छजलानी ने दीक्ष 55 साल की पुष्पा छजलानी ने दीक्ष

इंदौर। गुमाश्ता नगर में 55 साल की पुष्पा छजलानी ने दीक्षा लेकर सांसारिक मोह माया को त्याग दिया। रिंगरोड स्थित विरति मंडपम् में जैन आचार्य दौलतसागर सूरीश्वर और अन्य संतों के सान्निध्य में दीक्षा के बाद उन्हें नया नाम शुद्धि प्रसन्नाश्रीजी मिला। सालभर पहले उनकी दो बेटियां भी दीक्षा ले चुकी हैं।

- गुमाश्ता नगर नाकोड़ा जैन मंदिर ट्रस्ट की मेजबानी में हुए महोत्सव में सुबह 9 बजे दीक्षार्थी अपने घर से वर्षीदान करते हुए निकलीं तो हजारों श्रद्धालुओं ने जयघोष किया। दीक्षार्थी ने संतों को प्रणाम के बाद समवशरण की अंतिम पूजा एवं प्रदक्षिणा की। उन्हें पिच्छी व आसन देकर आचार्यों ने सुरक्षा कवच प्रदान किया। पिच्छी लेकर उन्होंने समवशरण की परिक्रमा नृत्य करते हुए की। चैत्य वंदन, नंदीसूत्र के वाचन एवं श्रीसंघ से अनुमति के बाद उन्होंने साध्वी वेश लिया। उनकी एक झलक पाने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा।


- मंच पर पहुंचने के बाद अन्य साध्वी, जिनमें उनके संसारी जीवन की दोनों बेटियां भी शामिल थीं, उन्हें साध्वी शुद्धि प्रसन्नाश्रीजी नाम प्रदान किया। साध्वी परिवेश के बाद उन्होंने नाकोड़ा पार्श्वनाथ मंदिर में सत्तरभेदी पूजा भी की। धर्मसभा को आचार्य दौलतसागर, हर्षसागर, तीर्थरत्न सागर ने भी संबोधित किया। नाकोड़ा जैन मंदिर गुमाश्ता नगर के सुरेंद्र छाजेड़ एवं भूपेंद्र कटारिया ने बताया रविवार सुबह 8 बजे साध्वी आचार्यों के साथ नाकोड़ा मंदिर से छजलानी निवास के लिए पदार्पण करेंगे।


मेरा स्वप्न साकार हो गया : दीक्षार्थी
दीक्षार्थी पुष्पा ने कहा मेरा दीक्षा लेने का स्वप्न साकार हो रहा है। संयम का मार्ग त्याग का है और संसार का राग का। जहां त्याग होता है, वहां अभय और जहां राग होता है वहां भय होता है। संयम का मार्ग जीवन के सभी भय हटाकर अभय बनाने वाला है। जिसके पास जीने की दृष्टि नहीं, उसका कोई लक्ष्य सफल नहीं हो सकता। गुरु भगवंतों ने जो दृष्टि उन्हें दी, वह मोक्ष मार्ग के मिशन को सफल बनाने वाली वाली है।