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माताओं का दर्द, जिनके कलेजे के टुकड़े चले गए, उनका दर्द कौन समझ सकता है

माताओं का दर्द, जिनके कलेजे के टुकड़े चले गए, उनका दर्द कौन समझ सकता है

Dainik Bhaskar

Jan 08, 2018, 01:00 PM IST
मां ने सीएम से कहा श्रुति हमार मां ने सीएम से कहा श्रुति हमार

इंदौर। डीपीएस बस हादसे में जान गंवाने वाले चार मासूमों की फैमिली से मिलने रविवार को सीएम शिवराज सिंह चौहान उनके घर पहुंचे। सीएम को देखते ही हरमीत की मां का गुस्सा फूट पड़ा। वहीं बाकि बच्चों के परिवार ने भी सिस्टम पर नाराजगी जताई। सीएम हाथ बांधे बात सुनते रहे। इस बीच 8-9 जनवरी को डीपीएस स्कूल में छुट्‌टी घोषित कर दी गई। देखो... मेरी ब्रिलियंट बेटी ने जीती थीं ये सारी शील्ड...


किसने क्या कहा...
- कृति अग्रवाल की मां बोलीं- देखो मेरी ब्रिलियंट बेटी, स्कूल प्रबंधन की लापरवाही से हमेशा के लिए दूर हो गई। शील्ड देख सीएम भावुक हो गए। पति प्रशांत ने कहा कि सर हम तो अपनी बेटी खो चुके हैं। आपसे निवेदन है कि कुछ ऐसा कीजिए, कि एेसा हादसा फिर ना हो। ऐसे नियम बनाइए की कोई गड़बड़ी नहीं कर सके।


स्कूल में मुंह मांगी फीस दे रहे थे
- श्रुति लुधियानी के परिजन बोले- हम बस इतना चाहते हैं कि जिम्मेदारों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करें। सीएम हाथ जोड़ बोले- ऐसा ही होगा। परिजनों ने कहा कि हम स्कूल में मुंह मांगी फीस दे रहे थे। स्कूलवालों का व्यवहार कैसा था आपने देखा ही। मैनेजमेंट अपनी जिम्मेदारी मानने को तैयार नहीं है। पुलिस ने भी छोटे लोगों पर कार्रवाई कर इतिश्री कर ली। जबकि जिम्मेदारी तो बड़े लोगों की थी।

जिनके कलेजे के टुकड़े चले गए, उनका दर्द कौन समझ सकता है
- हरमीत कौर की मां जसप्रीत बोलीं-जानती हूं... 4 दिन का तमाशा है, कुछ नहीं बदलेगा। सीएम ने कहा- सिस्टम सुधारेंगे। जैसे ही सीएम घर पहुंचे हरप्रीत की मां ने बेटी का फोटो उठाकर सीने से लगा लिया। वे बोलीं जिनके कलेजे के टुकड़े चले गए, उनका दर्द कौन समझ सकता है। आपके सारे अधिकारी लापरवाह हैं। महापौर ने कहा पूरा शहर आपके साथ है तो गुस्साई मां बोली मेरी बेटी तो मेरे साथ नहीं है... शहर का क्या करूंगी।

एक लाख 35 हजार रुपए साल की फीस भरती थी
- इकलौते बेटे को गंवा चुकी स्वस्तिक की मां मंजुला बोलीं- अब आप एेसा सिस्टम बना दो कि कोई अपना बेटा न गंवाए। सीएम बोले- वाहनों की फिटनेस जांचेंगे। मां ने कहा कि मैं भी टीचर हूं। सब समझती हूं। एक लाख 35 हजार रुपए साल की फीस भरती थी, लेकिन स्कूलवाले हमेशा बेटे की शिकायत ही करते थे। वह शरारती थी, स्कूलवाले कहते थे स्कूल से निकाल देेंगे। एक बार किसी ने उसकी शिकायत की तो मैंने कहा था तीन महीने बाद स्कूल से निकाल लूंगी। मैंने गलती कि उसी दिन स्कूल से निकाल लेती तो आज ये दिन नहीं देखना पड़ता।

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