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9 माह के बेटे को पीठ पर बांध 2 महीने से घूम रही है ये मां, जानें क्या है कारण

देवास जिले के पोनासा के दंपती ने शादी के 16 साल बाद पुत्र की प्राप्ति पर लिया नर्मदा परिक्रमा का निर्णय।

सुनील तिवारी | Last Modified - Jan 22, 2018, 03:13 PM IST

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    देवास के बागली के रहने वाली लक्ष्मी पति रामचंद्र के साथ नर्मदा परिक्रमा कर रही है।

    इंदौर/मांडू। देवास जिले के पोनासा की लक्ष्मीबाई और रामचंद्र को शादी के 16 साल बाद भी कई मन्न्तों के बाद बच्चा नहीं हुआ तो हताश होकर ये ओंकारेश्वर पहुंचे। यहां बच्चे के लिए इन्होंने मां नर्मदा से गुहार लगाई और संकल्प लिया कि अगर मेरी गोद भर जाएगी तो बच्चे के साथ हम दोनों मां नर्मदा की पैदल परिक्रमा करेंगे।

    - मां नर्मदा की कृपा से 18 फरवरी 2017 को सीजर से लक्ष्मीबाई ने एक पुत्र को जन्म दिया। प्रसव के दौरान डॉक्टरों ने कहा था कि दोनों की जान को खतरा है। यह सुन रामचंद्र और लक्ष्मी ने मां नर्मदा से विनती करते हुए कहा कि मां तूने ही दिया है, अब तू ही हमारी जीवनदायिनी है। रामचंद्र ने कहा कि मां की कृपा से लक्ष्मी ने एक बच्चे को जन्म दिया। अस्पताल से घर आने के बाद दोनों ने सोच लिया कि बच्चे के 9 माह पूरे होते ही मां की परिक्रमा पर निकल जाएंगे।

    - इसके बाद दंपति नवंबर मैं ओंकारेश्वर पहुंचे और यहां से परिक्रमा की शुरुआत की। लक्ष्मी ने अपने 9 माह के बेटे को अपनी पीठ पर बांध लिया और परिक्रमा पर निकल पड़ी। दो महीने बाद रविवार को दोनों परिक्रमा करते हुए मांडू पहुंचे।

    - रामचंद्र ने बताया कि मैं मिस्त्री हूं और पत्नी गृहणी। 16 साल तक हमने हर कहीं बच्चे के लिए माथा टेका। बच्चे के लिए मां नर्मदा से विनती की। मां की कृपा से हमारी इच्छा पूरी हुई है। जब तक मां नर्मदा की परिक्रमा पूरी नहीं होगी हम घर नहीं जाएंगे।


    बच्चे के पीठ पर मगर की आकृति

    - लक्ष्मी ने बताया कि मां की देन इस बालक के पीठ पर मगरमच्छ पर मां नर्मदा का वास है। पीठ पर मगर की आकृति उकरी है, जिस पर मां नर्मदा बहती हुई प्रतीत हो रही हैं।

    पैदल ही करेंगे यात्रा, पूरी होने के बाद करेंगे नामकरण
    - रामचंद्र ने बताया कि वे मिस्त्री का कार्य करते हैं और पत्नी गृहिणी है। ओंकारेश्वर मंदिर से मां नर्मदा की गुहार के बाद मन्नत पूरी होने पर घर बार छोड़कर परिक्रमा पर निकले हैं। पैदल ही पूरी यात्रा करेंगे। लक्ष्मीबाई ने बताया चाहे कैसी भी परेशानी आए हम हमारा संकल्प पूरा करेंगे। परिक्रमा पूरी होने के बाद ही इस बच्चे का नामकरण भी किया जाएगा। मांडू पहुंचे दंपती को अनिल तिवारी, गोकुल प्रसाद शर्मा के निवास पर इन लोगों को भोजन व जलपान कराया।
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    लक्ष्मी अपने बेटे को लेकर निकली है परिक्रमा पर।
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    मां नर्मदा की कृपा से हुआ है पुत्र।
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    नर्मदा परिक्रमा के बाद करेंगे नामकरण।
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    परिक्रम के दौरान मांडू पहुंचे।
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    16 साल बाद हुआ है पुत्र।
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Web Title: Couple Narmada Parikrama With Son Born After 16 Year Indore Mp
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