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हैट्रिक लेने वाले गुरबानी की स्टोरी, इंजीनियरिंग करते-करते ऐसे बन गए क्रिकेटर

मयंक यादव | Last Modified - Dec 30, 2017, 09:58 PM IST

रणजी ट्रॉफी फाइनल मुकाबले के दूसरे दिन हैट्रिक हासिल कर विदर्भ के तेज गेंदबाज रजनीश गुरबानी ने नया रिकॉर्ड बनाया।
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    रजनीश ने विदर्भ टीम के लिए रणजी फाइनल मुकाबले में दिल्ली के खिलाफ हैट्रिक ली। -फाइल

    इंदाैर. इंदौर के होलकर स्टेडियम में शनिवार को खेले जा रहे रणजी ट्राफी के फाइनल मुकाबले में विदर्भ के तेज गेंदबाज रजनीश गुरबानी ने हैट्रिक ले कर दिल्ली को बैकफुट पर ला दिया। गुरबानी रणजी टूर्नामेंट के फाइनल में हैट्रिक लेने वाले दूसरे गेंदबाज बन गए हैं। अब उन्हें भारतीय टीम के लिए एक उम्मीद की तरह देखा जा रहा है। इस खास मौके पर DainikBhaskar.com ने उनसे बात की....

    कैसे जागा क्रिकेट का जुनून?

    - "मैंने बचपन मुंबई में बिताया। पढ़ाई सेंट मेरी स्कूल में हुई। स्कूल टाइम में ही मैंने क्रिकेट खेलना शुरू किया था। मैंने जाइल्स शील्ड ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन करते हुए कई विकेट निकाले, जिसके बाद स्कूल कोच ने मम्मी-पापा को मुझे प्रोफेशनल क्रिकेट ट्रेनिंग दिलावने की सलाह दी। 10 साल की उम्र में मैंने पूर्व भारतीय क्रिकेटर दिलीप वेंगसरकर की टोटल एकेडमी ज्वाइन की। हालांकि, कुछ महीनों बाद पापा का ट्रांसफर नागपुर हो गया। इसके बाद मैंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पर फोकस करना शुरू किया।"

    क्रिकेट पर कैसे फोकस बनाया?

    - "मेरे पिता नरेश गुरबानी रेलवे में डिप्टी चीफ इंजीनियर हैं। मां दिव्या आैर दादा होतचंद स्कूल में प्रिंसिपल हैं। छोटा भाई आईआईटी खड़गपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है। घर का माहौल पढ़ाई वाला था, फिर भी मैंने क्रिकेटर बनने की ठानी।"
    - पापा का ट्रांसफर अलग-अलग शहरों में होने की वजह से मुझे अपने खेल पर फोकस करने में दिक्कत होती थी। हालांकि, मेरे अंदर क्रिकेटर बनने का जुनून था, लिहाजा मैं इस मुकाम पर पहुंचने में कामयाब रहा।"

    कब शुरू हुआ क्रिकेट का सफर?
    - "मेरा क्रिकेट का सफर पांच साल पहले शुरू हुआ। मुझे डाॅ. अंबेडकर एकेडमी के कोच प्रशांत कंटोडे ने गेंदबाजी करते देखा था। उन्होंने प्रशांत बंबल सर को मेरे बारे में बताया। बंबल सर ने मेरी फिटनेस आैर लाइन लेंथ पर काम किया, जिसके बाद मैं अंबेडकर एकेडमी छोड़ इंडियन जिमखाना से खेलना लगा। इसके बाद मुझे विदर्भ अंडर-19 टीम में जगह मिली। मैंने कई कड़े मुकाबले वाले मैचों में विकेट निकालकर टीम को जीत दिलाई। विदर्भ क्रिकेट एसोसिएशन ने अंडर-23 क्रिकेट टूर्नामेंट में अपने पेसर बेंच स्ट्रेंथ को अाजमाया। इसमें सेलेक्टर्स मेरी गेंदबाजी से प्रभावित हुए। अच्छे प्रदर्शन की वजह से मुझे विदर्भ सीनियर वनडे आैर टी-20 में शामिल किया गया। बाद में मैं रणजी टीम में जगह बनाने में भी कामयाब रहा।"

    क्रिकेट के अलावा कौन सा खेल पसंद है?
    - "मुझे क्रिकेट के अलावा फुटबाल काफी पसंद है। स्कूल टाइम में मैंने फुटबाल में 30 ट्राॅफी और 50 मेडल जीते हैं।"


    रणजी के फाइनल में कैसा रहा एक्सपीरियंस?

    - "दिल्ली के खिलाफ फाइनल मैच के पहले दिन मसल्स में खिंचाव आ गया था। मैच के दूसरे दिन शनिवार को भी डी-हाइड्रेशन के कारण मुझे सलाइन लगानी पड़ी। इतनी ज्यादा तबीयत खराब होने के बाद भी मैंने मैदान पर उतकर हैट्रिक ली।"

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    रजनीश गुरबानी पैरेंट्स के साथ। -फाइल
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    रजनीश ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के साथ-साथ क्रिकेट पर फोकस किया। -फाइल
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Web Title: Cricketer Rajneesh Gurbani Takes Hattrick In Ranji Final Vs Delhi Holkar Cricket Stadium Indore
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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