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मां मैं १०वीं में फेल हो गया हूं, ऐसे कैसे चलेगा, पढ़ें एक बेटा का मां के लिए ये संदेश

मां मैं १०वीं में फेल हो गया हूं, ऐसे कैसे चलेगा, पढ़ें एक बेटा का मां के लिए ये संदेश

Dainik Bhaskar

Feb 13, 2018, 10:57 AM IST
Husband Sent A Notice To The Wife Taking Initiation Nagda mp

नागदा (इंदौर)। 22 अप्रैल को पालिताणा गुजरात में सांसारिक जीवन से संन्यास लेने की घोषणा करने वाली नागदा की ऋतु कानूनी घेरे में फंस गई है। उनके पति भेरूलाल ने पत्नी और जैन समाज के सुनील वागरेचा को लीगल नोटिस भेजकर सचेत किया है कि उनका 16 साल का एक बेटा है। तलाक का प्रकरण एडीजे न्यायालय में लंबित है। केस की 15 फरवरी को सुनवाई होना है, जब तक प्रकरण का निराकरण न हो जाए पत्नी ऐसा कोई कदम नहीं उठा सकती। भेरूलाल और ऋतु दोनों नागदा में ओझा कॉलोनी के निवासी है। उधर, बेटे ने मां के नाम संदेश दिया है कि मां तुम लौट आओ... हम अलग रहेंगे मैं कमाकर घर चलाऊंगा।

लौट आओ मां, हम अलग रहेंगे, मैं कमाकर चलाऊंगा घर
- पति का आरोप है कि उसके ससुर सीताराम सुनहरिया ने ऋतु को बहकाकर संन्यास के लिए दबाव बनाया है। तलाक के लिए न्यायालय में प्रकरण भी जबरदस्ती दाखिल किया। साजिश रचकर पत्नी ऋतु को कई माह से उनसे दूर रखा जा रहा है।


- उधर बेटे ने मां के नाम संदेश देते हुए गुहार लगाई है कि वो लौट आए। बेटे धरमेश ने बताया कि ढाई साल पहले मां यह कहकर दिल्ली गई थी कि 15 दिन में लौट आऊंगी, लेकिन आज तक नहीं लौटी। मां बहुत याद आती है...कई बार नाना-नानी के पास जाकर बोला मिला दो मां से। लेकिन कहते हैं मां यहां नहीं है। आप बताओ अंकल बगैर मां के मैं कैसे रहूं, 10वीं में फेल हो गया हूं। ऐसा ही चलता रहा तो मैं कुछ कर लूंगा। अंकल आप ही बोलो न मेरी मां को उनका पापा से झगड़ा है तो रखे...वो बस लौट आए हम अलग घर ले लेंगे। मैं कुछ भी करके घर चलाऊंगा, प्लीज मुझे मेरी मां से मिला दो।

इसलिए फिलहाल तलाक पर चल रहा विचार
- गौरतलब है कि एडीजे न्यायालय खाचरौद ने भेरूलाल के पेशी पर उपस्थित नहीं होने पर एकपक्षीय फैसला देते हुए 8 मार्च 2017 को ऋतु के पक्ष में फैसला देकर तलाश मंजूर किया था। लेकिन मामले में भेरूलाल ने निर्णय के खिलाफ फैसले को निरस्त करने का आवेदन न्यायालय को दिया है। इस पर 15 फरवरी को सुनवाई होना है।


हमारे पास नहीं बेटी, कैसे ले नोटिस
- मामले में भेरूलाल के वकील कमल मालवीय ने बताया उनके पक्षकार की गैरमौजूदगी में न्यायालय ने फैसला दिया था। जैसे ही उनके पक्षकार को एकतरफा आदेश की सूचना मिली उन्होंने न्यायालय में प्रकरण को दोबारा चलाने का आवेदन प्रस्तुत कर दिया था, लेकिन पेशी पर उपस्थित होने का नोटिस ऋतु के माता-पिता स्वीकार नहीं करते।


- ऋतु को भी प्रकरण दोबारा शुरू होने की जानकारी नहीं दी गई। वे यह कहकर नोटिस तामील नहीं करते कि उन्हें बेटी के बारे में जानकारी नहीं है। ऋतु उनके साथ नहीं रहती। लेकिन उनके झूठ की पोल जैन समाज द्वारा सोमवार को निकाले गए जुलूस ने खोल दी है। जिसमें ऋतु और उसके माता-पिता मौजूद रहे।

35 वर्षीस रितू माता-पिता के साथ ओझा कॉलोनी गली नंबर 4 में रहती है। पिता सीताराम सुनहरिया ग्रेसिम उद्योग से सेवानिवृत हो चुके हैं। रितू ने कहा 2015 में शहर में हुए लेखेंद्र सुरी मसा के चातुर्मास के समय मासक्षमण किया था। इसके बाद 2015 से 2017 तक उज्जैन, इंदौर, निबांहेड़ा में डॉ. प्रीति दर्शना मसा के शिविर में शामिल हुई थी। इस बीच वे विहार के समय वे जैन संतों के साथ रही। साथ ही प्रवचन भी सुने। जिससे प्रभावित होकर उन्होंने दीक्षा लेने का निर्णय लिया है।

बेटी ने अपनाया जैन धर्म, परिवार बना शाकाहारी
- रितु के पिता सीताराम सुनहरिया ने बताया मूल रूप से वे वैष्णव धर्म से हैं। उनकी जाति नरवरिया ठाकुर है। मगर बेटी ने जब से जैन धर्म अपनाया। उन्होंने व उनके परिवार के सभी सदस्य शाकाहारी बन गए। अब परिवार का कोई भी सदस्य मांस, मदिरा को हाथ नहीं लगाता। रितु घर की इकलौती बेटी है। 12वीं शिक्षित है। दो भाई मंगेश सुनहेरिया व योगेश सुनहेरिया। मंगेश दिल्ली व योगेश इंदौर में रहते हैं। पिता बोले- दुख तो है कि अप्रैल के बाद बेटी से हमारा कोई संबंध नहीं रहेगा। मगर खुशी इस बात कि है बेटी का यह निर्णय समाज को नई दिशा देगा।

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