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इंदौर लिटरेचर फेस्ट में हुई किताबों पर चर्चा : अनुज खरे ने लेखक बनने को लेकर कही ये बात

इंदौर लिटरेचर फेस्ट में हुई किताबों पर चर्चा : अनुज खरे ने लेखक बनने को लेकर कही ये बात

Rajeev Tiwari | Last Modified - Dec 17, 2017, 02:03 PM IST

इंदौर।किताबें हमारे जीवन की अभिन्न अंग हैं। किताबें हमें जीवन जीने और कुछ कर गुजरने की सीख देती हैं। कोरे कागजों को किताबों का रूप देना कितना मुश्किल है। शब्द और सोच को पन्नों में उकेरने की सीखभरी बातें हमें सुनने को मिली इंदौर लिटरेचर फेस्ट में। dainikBhaskar.com के एडिटर और बातें बेमतलब के लेखक अनुज खरे ने शनिवार को बुक वार्म विषय पर बात की सुधीर आजाद और डॉक्टर अबरार मुलतानी से।


- फेस्ट के दौरान लेखक अनुज खरे ने कहा कि आज हिंदी के लेखकों के लिए किताबें छपवाना उतना भी मुश्किल नहीं, जितना कहा या समझा जाता है। प्रकाशक की मदद के लिए लेखक ने प्रमोशन के ज़िम्मा भी इसलिए उठाया है। नई हिंदी अब इन्हीं प्रयासों से सब तक पहुंच रही है। बशर्ते की लेखक की लेखनी उस स्तर की हो और वे शब्द किताबों का रूप ले सकते हों। यह पूरी चर्चा दैनिक भास्कर के बुक रीडरशिप सर्वे पे आधारित थी।


- अनुज खरे ने विषय को आगे बढ़ाते हुए एक सवाल किया, अब बुक लिखना इतना आसान हो गया है क्या कि पाउच खोला, काटा, धाेया, निचोड़ा, डाला और झकाझक सफेदी पा ली। यानी बेस्ट सेलर हो गए। खरे ने बुक लिखने को लेकर लेखक अबरार से सवाल किया। अबरार ने बताया कि 26 साल की उम्र से मैंने लिखना शुरू किया। उन्हाेंने कहा कि किताब लिखने को लेकर मैंने सपने में भी नहीं सोचा था। 2010 मैंने अपनी मेडिकल की पढ़ाई पूरी की। जब मैंने प्रैक्टिस शुरू की तो मुझे पता चला कि जो मरीज मेरे पास आते थे। उन्हें अपने जीवन के बेसिक कार्य तक करना नहीं आते। उन्होंने उदाहरण देते हुए एक 65 साल की बुजुर्ग महिला की कहानी बताई। उन्होंने कहा कि लोगों को पानी पीने, सांस लेने यहां तक की सही तरीके से चलने की भी जानकारी नहीं है। इसी बात को लेकर मैंने सोचा कि इन लोगों के लिए किताब लिखना चाहिए। किताब लिखना आसान नहीं है। जब हम लोगों से मिलते हैं उसने बात करते हैं तो हमें एक आइडिया होता है और हम उसे किताबों के रूप में लोगों तक पहुंचाते हैं।

- वहीं आज़ाद ने कहा कि हिंदी किताबें न सिर्फ पढ़ी जा रही हैं, बल्कि इनका दायरा भी बढ़ रहा है। भास्कर सर्वे का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हिंदीभाषी राज्यों में बुक स्टोर से किताबें खरीद कर पढ़ी जा रही हैं, जबकि ऑनलाइन मंगवाने वाले पाठकों की संख्या कम है। सेशन के दौरान आज़ाद ने भोपाल से लगाव और गैस कांड पर लिखी अपनी किताब का ज़िक्र कर करते हुए शेरो-शायरी भी की।

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Web Title: indaur litrechr fest mein huee kitaabon par charcha : anuj khre ne lekhk banne ko lekar khi ye baat
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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