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कुछ ऐसी है इस मॉडल की कहानी, सुन-बोल नहीं सकती पर ऐसा पाया ये मुकाम

कुछ ऐसी है इस मॉडल की कहानी, सुन-बोल नहीं सकती पर ऐसा पाया ये मुकाम

Danik Bhaskar | Jan 24, 2018, 12:00 PM IST
सीकर की रहने वाली 28 साल की फूलम सीकर की रहने वाली 28 साल की फूलम

इंदौर। ये लड़कियां हैं जुदा-जुदा और इनका हुनर भी है अलहदा। अपने इसी हुनर के बेहतरीन प्रदर्शन से ये कामयाबी की नई इबारतें लिख रही हैं। इनमें हर विपरीत परिस्थितियों से लड़ने की भरपूर ताकत है और वह जोश भी है जो उन्हेें नया आसमान छूने के लिए उछाल देता है। इनकी कामयाबी के रास्ते में न गरीबी आड़े आती है न अभाव बाधा पैदा करते हैं, न कोई कमजोरी ही। एक ऐसा ही नाम है मॉडल फूलमती लामोरिया का। नेेशनल गर्ल चाइल्ड डे पर dainikbhaskar.com बता रहा है फूलमती की स्टोरी...



- फूलमती लामोरिया सुन-बोल नहीं सकती, लेकिन उसने खुद को उन दायरों में नहीं बांधा, जिनमें मूक बधिरों को अक्सर बांध दिया जाता है। फूलमती ने पढ़ाई की, खुद को इस काबिल बनाया कि वह कहीं जॉब कर सके। इंटरप्रेटर की मदद से हमने फूलमती से बात की। उसने कहा - मुझे बीइंग ह्यूमन स्टोर में काम मिल गया। अपनी पढ़ाई का खर्च मैंने इस तरह निकाला। मॉडलिंग करने की चाह थी मुझे, लेकिन जब यह समझने लगी कि मैं मूक बधिर हूं तब लगा यह सपना अधूरा ही रह जाएगा, लेकिन कुछ दोस्तों ने इस चाहत को परवाज़ दी। पेरेंट्स ने सपोर्ट किया। मैंने मिस डेफ इंडिया पेजेंट में पार्टिसिपेट किया और जीती।

चार भाई बहनों में बस फूलमती बोल सुन नहीं सकती
- 28 साल की फूलमती लामोरिया जन्म से सुन-बोल नहीं सकती। रहने वाली सीकर की हैं, लेकिन वर्ष 2005 से इंदौर डेफ बायलिंग्वल एकेडमी से पढ़ाई कर रही हैं। उन्होंने बताया कि मेरे चार भाई-बहन हैं। सब सुन बोल सकते हैं। पहले मुझे अपनी इस कमी से बहुत तकलीफ होती थी। सीकर में कोई बच्चा मेरी तरह नहीं था। फिर 2005 में अजमेर में मैंने देखा कि हम जैसों ने भी अपनी एक दुनिया बनाई है तो मैंने भी खुद को इस काबिल बनाया। मैंने बीएड किया है। मूक बधिर बच्चों को पढ़ाना चाहती हूं। अभी मैं बीइंग ह्यूमन स्टोर में काम कर रही हूं। मैं चाहती हूं कि सामान्य लोगों की दुनिया को भी समझ सकूं। इसके साथ मुझे मॉडलिंग का शौक है।


- फूलमती ने बताया कि प्राग (यूरोप) में मिस्टर एंड मिस डेफ वर्ल्ड कॉम्पीटिशन में इंडिया को रिप्रेज़ेंट किया। मैंने हियरिंग फैशन शोज़ में पार्टिसिपेट किया। हां, हियरिंग मॉडल्स जैसे मौके हमें नहीं मिलते, लेकिन कोई अफसोस नहीं। पहले दुख होता था अपने इस अधूरेपन पर। लेकिन आज मैं अपनी इस पहचान से बहुत खुश हूं। तकलीफ सिर्फ तब होती है जब लोग दया से देखते हैं... मैं सामान्य लोगों से किसी भी लिहाज़ से कम नहीं हूं।