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आरएसएस प्रमुख ने की च्अद्भूत श्रीमद भागवत गीता-मौत से मोक्ष की कथाज् की सराहना

आरएसएस प्रमुख ने की च्अद्भूत श्रीमद भागवत गीता-मौत से मोक्ष की कथाज् की सराहना

Danik Bhaskar | Jan 08, 2018, 04:53 PM IST
आरएसएस के मोहन भागवत किताब देख आरएसएस के मोहन भागवत किताब देख

इंदौर/झाबुआ। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने आलीराजपुर जिले में आबकारी विभाग के सहायक आयुक्त नागेश्वर सोनकेसरी द्वारा पद्यांश और तुकबंदी के रूप में लिखी गई देश की पहली किताब ‘अद्भूत श्रीमद भागवत गीता-मौत से मोक्ष की कथा’ की सराहना की है।

दरअसल भागवत उज्जैन में आयोजित शैव महोत्सव में शामिल होने पहुंचे थे। यहां भानपुरा पीठ के शंकराचार्य स्वामी दिव्यानंदजी तीर्थ ने सोनकेसरी द्वारा लिखित भागवतजी उन्हें भेंट की। साथ ही बताया कि पंद्यांश स्वरूप श्रीमद भागवत इतने सरल शब्दों में है कि इसके अर्थ को कोई भी व्यक्ति आसानी से समझ सकता है। इसे आबकारी विभाग के अधिकारी ने 7 सालों की मेहनत के बाद लिखा है। आरएसएस प्रमुख ने शंकराचार्य स्वामी दयानंदजी तीर्थ को किताब पढ़ने के बाद पत्र के माध्यम से सोनकेसरी का उत्साहवर्धन करने की बात कही है।


गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल है किताब
- बारह स्कंदो में समायी 500 पृष्ठों की ‘अद्भूत श्रीमद भावगत-मौत से मोक्ष की कथा’ में 700 से अधिक दोहे और 1100 से अधिक चौपाई हैं। चूंकि ये अपनी तरह की एक अलग किताब है, इसलिए इसे गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल किया गया है। साथ ही वर्ल्ड बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड भी मिल चुका है। इसी किताब के लिए फरवरी माह में श्री सोनकेसरी का सम्मान ब्रिटिश संसद-हाउस ऑफ कामंस के साथ हाउस ऑफ लॉर्ड्स में किया जाएगा।

रॉयल्टी का उपयोग गरीबों के उपचार में करेंगे
- श्री सोनकेसरी ने किताब की रॉयल्टी से प्राप्त होने वाली आय को गरीबों के उपचार में खर्च करने का निर्णय लिया है। वर्तमान में वे इंदौर के एमवाय अस्पताल में भर्ती गरीब मरीजों को अपनी तरफ से नि:शुल्क दवाइयां और अन्य आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराते हैं। गौरतलब है कि पेंग्विन के सेल्फ पब्लिकेशन हाउस नोशन प्रेस चेन्नई द्वारा किताब का प्रकाशन किया गया है। अब तक 5 हजार किताबों की बुकिंग हो चुकी है। इसे ऑनलाइन भी लिया जा सकता है।

गीता सबसे बड़ा उपदेश है
- किसी बात को बढ़ा-चढ़ाकर लिखना और विस्तृत करना आसान है पर भागवत जैसे विशाल ग्रंथ को संक्षिप्त में समेटना और उसमें भी सभी आवश्यक बातों का समावेश करना बहुत बड़ी बात है। आबकारी अधिकारी नागेश्वर सोनकेसरी ने अपनी किताब में वही किया है। उन्होंने सरल शब्दों में पूरी गीता का सार उतार दिया। - शंकराचार्य स्वामी दिव्यानंजीतीर्थ