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अरबाज के साथ मिल कर सलमान ने किया था कुछ ऐसा, जानें आखिर क्या था वो राज

अरबाज के साथ मिल कर सलमान ने किया था कुछ ऐसा, जानें आखिर क्या था वो राज

Danik Bhaskar | Dec 27, 2017, 01:01 PM IST
सलमान अपना 52वां जन्मदिन मना रह सलमान अपना 52वां जन्मदिन मना रह

इंदौर। बॉलीवुड स्टार सलमान का बचपन इंदौर की गलियों में गुजरा है। यहां से जुडी यादें आज भी उनके जेहन में रची-बसी हैं। सलमान ने एक फिल्म प्रमोशन के दौरान जब इंदौर आए थे तब उन्होंने DainikBhaskar.com के साथ अपने बचपन के कई राज बांटे हैं। सलमान ने बताया था कि कैसे अरबाज के साथ मिलकर उन्होंने अपने बड़े भाई की बिस्किट उड़ाई थी। सलमान के जन्मदिन के मौके पर पेश है, उनके बचपन के किस्से और कहानी खुद सलमान की ज़ुबानी...

- सलमान खान के दादा अब्दुल रशीद खान की पलासिया में कोठी थी और खंडवा रोड पर खेती। उनका बचपन पलासिया की गलियों में बीता। सलमान बताते हैं कि गर्मी की रातों में हम सारे भाई-बहन गच्ची यानी छत पर सोते थे। तब खेत में दावतें होती थीं। मुझे याद है, एक बार हम सब खेत पर चाय-बिस्किट की दावत पर गए थे। मतिन भाई ने खूब सारे बिस्किट लाकर रखे थे। वे कुछ देर के लिए इधर-उधर हुए और मैंने और अरबाज़ ने चाय में डुबाे-डुबाे कर सारे बिस्किट खा लिए। इसके बाद मतिन भाई का गुस्से से लाल मुंह मुझे आज भी याद है। वह गच्चियां, खेतों की वह दावतें आज भी बहुत याद आती हैं। उफ! क्या दिन थे वे।

खूब चलाते थे साइकिल...
- मैंने इंदौर में इस मोहल्ले से उस मोहल्ले खूब साइकिल दौड़ाई है। यहां की खाली-खाली सड़कों ने ही साइक्लिंग से मेरा रिश्ता जोड़ा है। सच कहूं तो मेरे स्वभाव में जो फियरलेसनेस आई है वह बेबाक साइक्लिंग करने से ही आई है। शुरुआत में गिरा भी हूं, चोट भी आई। साइक्लिंग करने से मुझे वह निडरता मिली, एग्रेशन मिला और बॉडी बनाने की प्रेरणा मिली।

फिर मिलेगी नौकरी, फिर खरीदेंगे बंदूक...
- सलमान ने कहा मुंबई में भी मैं कई बार साइकिल लेकर निकल पड़ता हूं। कभी यूं भी सोचता हूं कि साइकिल से कार तक आया हूं। खुदा न खास्ता कभी कुछ न रहा तब भी यह साइकिल तो मेरे पास रहेगी। इसे चलाने से तो तब भी खुशी ही मिलेगी। वह कहावत मैं कभी नहीं भूलता कि ‘चली गई नौकरी, बेच दी बंदूक, फिर मिलेगी नौकरी, फिर खरीदेंगे बंदूक...’