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धीरज हत्याकांड की पूरी कहानी, महिला ने मारकर लाश के टुकड़े करना चाहा, फिर किया ये

धीरज हत्याकांड की पूरी कहानी, महिला ने मारकर लाश के टुकड़े करना चाहा, फिर किया ये

Dainik Bhaskar

Jan 08, 2018, 11:27 AM IST
उज्जैन के धीरज बैस हत्याकांड म उज्जैन के धीरज बैस हत्याकांड म

इंदौर। उज्जैन के भैरवगढ़ निवासी धीरज बैस हत्याकांड की गुत्थी सातवें दिन सुलझ ही गई। हत्या की वजह महिला ही निकली है। धीरज ने उससे दोस्ती के बाद ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया था और बदनाम करने की धमकी दे रहा था। इसी कारण महिला ने एक जनवरी को उसे घर बुलाया और सोडा मेकर सिलेंडर से सिर पर कई वार किए, जिससे मौके पर ही धीरज ने दम तोड़ दिया। हत्या करने के बाद महिला ने अपने नाबालिग बेटे की मदद से ही लाश को बोरे में भरा और स्कूटी से देवासरोड मतानाकला पहुंचकर बोरे को आग लगा दी।


- पुलिस ने बताया कि धीरज की हत्या करने के बाद उसकी लाश को बोरे में भरकर पेट्रोल से जलाने वाली सिंधी काॅलोनी निवासी पुष्पा पति स्व. विमल वाधवानी है। नरवर पुलिस ने हत्याकांड के बाद कई दिन तक सिंधी काॅलोनी, हाथीपुरा और नानाखेड़ा क्षेत्र में पता लगाया, जिसके बाद पुष्पा का सुराग मिला। मोबाइल काॅल डिटेल में भी उक्त महिला से ही धीरज की अधिक बार बात सामने आई थी, लेकिन महिला का मोबाइल घटना के बाद से ही बंद होने के कारण पुलिस को उस तक पहुंचने में समय लगा। हत्या के बाद लाश को ठिकाने लगाने में मदद करने पर उसके नाबालिग पुत्र को भी गिरफ्तार किया, जो निजी काॅलेज में बीए का छात्र है। वारदात में प्रयुक्त स्कूटी भी जब्त की गई।


धीरज ने जीना मुश्किल कर दिया था, मैंने उसके शव के टुकड़े करने की कोशिश की
- पुष्पा ने बताया कि नई सड़क शाॅपिंग मॉल पर सालभर पहले नौकरी के दौरान धीरज सामान खरीदने आया था, तभी उससे पहचान हो गई। मुझसे बोला इससे अच्छी नौकरी दिलवा दूंगा, अपना नंबर दे दो। फिर मुझे रोज फोन लगाने लगा। रोज मॉल पर मिलने आ जाता। परेशान होकर मैंने वहां से नौकरी छोड़ फ्रीगंज शहीद पार्क के शाॅपिंग मॉल में नौकरी कर ली। वहां भी धीरज ने पीछा नहीं छोड़ा, वह रोज मिलने आने लगा। मॉल प्रबंधन ने उसे लेकर आपत्ति जताई, लेकिन वह समझाने पर भी नहीं माना। इस कारण नौकरी छोड़ना पड़ी। वह मुझसे कहने लगा मिलोगी नहीं या बात नहीं करोगी तो बदनाम कर दूंगा।


- चार साल पहले पति की मौत के बाद से सास व दो बच्चों को मैं ही पाल रही थी। उसकी धमकी से काफी घबरा गई थी। घर से निकलना बंद कर दिया था, लेकिन धीरज घर तक पहुंच गया। मैंने ठान लिया कि अब नहीं समझा तो खुद मर जाऊंगी या उसे मार दूंगी। एक जनवरी की दोपहर घर पर बच्चे व सास नहीं थी। मैंने धीरज को फोन कर घर बुलाया। उससे बोली मुझे परेशान मत करो, लेकिन वह बोला बदनाम करके रहूंगा। यह सुनते ही मैंने आपा खो दिया। सोडा मेकर सिलेंडर से सिर पर कई वार किए। वह वहीं गिर गया और मौत हो गई। अफसोस है कि उसके टुकड़े नहीं कर पाई। लाश को ठिकाने लगाने के लिए चाकू से धीरज के शरीर को काटने की कोशिश की लेकिन यह नाकामयाब रही। कुछ देर में बड़ा बेटा घर आया तो मैं घबराई हुई थी और रो रही थी। उसे सबकुछ सच बता दिया। फिर उसकी मदद से लाश बोरे में भरी।

- रात में एक्टिवा पर बोरा रखा और देवासरोड मताना कला पहुंचे। यहां सुनसान जगह देख बोरे को खोला और पेट्रोल डाल आग लगा दी। फिर बेटे के साथ सीधे महाकाल मंदिर के बाहर पहुंची। वहां बाहर से भगवान के हाथ जोड़े और घर आकर अपने कामकाज में लग गई। मोबाइल भी बंद कर लिया था।

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