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६ घंटे चल ऑपरेशन, लड़की के मुंह ने निकला ३०० ग्राम का ट्यूमर, पहले दिखती थी ऐसी

६ घंटे चल ऑपरेशन, लड़की के मुंह ने निकला ३०० ग्राम का ट्यूमर, पहले दिखती थी ऐसी

Dainik Bhaskar

Jan 16, 2018, 06:45 PM IST
सिंगरौली की रहने वाली 15 साल की सिंगरौली की रहने वाली 15 साल की

इंदौर। बीमारी के कारण परिवार द्वारा छोड़ने, मंदिरों में दिन बिताने, तीन जिलों में भटकने और खंडवा के रतागढ़ स्थित बाल सखा आश्रम में आसरा पाने वाली सिंगरौली जिले के सुलखान निवासी 15 वर्षीय बालिका के चेहरे के ट्यूमर का आखिर मंगलवार को ऑपरेशन हो गया। बांबे हॉस्पिटल में दो न्यूरो सर्जन सहित पांच डॉक्टरों की टीम ने उसका सात घंटे तक ऑपरेशन कर चेहरे से 300 ग्राम का ट्यूमर निकाला। होश में आते ही बालिका रोने लगी, लेकिन बाल सखा आश्रम की काउंसलर बबीता खरारे ने उससे कहा तुम तो अब बहुत सुंदर लग रही हो। इस पर चेहरे पर बंधी पट्टियों के बीच एक आंख से बालिका ने देखा और हौले से मुस्करा दी। उसे खुश देखकर सभी के चेहरे खिल उठे।


- बांबे हॉस्पिटल में न्यूरो सर्जन डॉ. राघवन अयंगर और डॉ. प्रशांत निवारकर, प्लास्टिक सर्जरी विशेषज्ञ डॉ. योगेश तंदवाड़े, नाक, कान, गला विशेषज्ञ डॉ. अनिल ग्वालियरकर सहित आंख और एनेस्थीसिया विशेषज्ञों की टीम ने सुबह 10 बजे से ऑपरेशन शुरू किया। शाम 5 बजे तक ऑपरेशन के बाद दिमाग तक जुड़ा ट्यूमर निकाला जा सका।

बालिका के ऑपरेशन के लिए खंडवा में उसे आसरा देने वाले बाल अधिकार कार्यकर्ता राजेश शुक्ला भी अलसुबह ही इंदौर पहुंच गए। पूरा दिन ऑपरेशन थिएटर के बाहर खड़े रहे। ट्यूमर हटा बालिका का चेहरा देखकर उन्होंने सुकून भरी सांस ली। बोले- चंद दिनों में बालिका को नया जीवन देने का मेरा संकल्प पूरा हुआ। इसमें एसपी नवनीत भसीन सहित सभी का सहयोग और ईश्वर का आशीष मेरे और बालिका के साथ रहा।


माथे से दो बार घूमकर आंख के बगल से ट्यूमर बन निकली थी नस
- बालिका का ट्यूमर सीधे मस्तिष्क से जुड़ा होने के कारण ऑपरेशन काफी जटिल था। न्यूरो सर्जन सहित अन्य विशेषज्ञों के बिना ऑपरेशन संभव नहीं था। ऑपरेशन करने वाले न्यूरो सर्जन डॉ. राघवन अयंगर ने बताया मस्तिष्क की एक नस माथे के आसपास दो बार घूमकर आंख के बगल से ट्यूमर बनकर बाहर निकली थी। इसे निकालना काफी मुश्किल था। इंदौर आने के बाद बालिका का दोबारा सीटी स्कैन सहित अन्य जांचें कराई गईं। इसके बाद विशेषज्ञों के साथ ऑपरेशन किया गया। बालिका फिलहाल आईसीयू में है। चेहरे से पट्टियां हटने में अभी दो हफ्ते लगेंगे। उसे चार-पांच दिन अस्पताल में ही रहना पड़ेगा। ऑपरेशन के दौरान अस्पताल में बालिका के पिता जगन्नाथ सिंह भी मौजूद रहे।


एसपी बोले- शुक्ला जी आपका संकल्प पूरा हुआ
- भटकती हुई गमजदा बालिका 21 दिसंबर को बाल सखा आश्रम लाई गई थी। इसके बाद उसकी तमाम जांच और ऑपरेशन कर स्वस्थ बनाने का बीड़ा बाल अधिकार कार्यकर्ता राजेश शुक्ला ने उठाया। एसपी नवनीत भसीन भी सपत्नीक बालिका को देखने पहुंचे। वे लगातार जांच और इलाज की प्रक्रिया की मॉनिटरिंग करते रहे। ऑपरेशन सफल होने का पता चलते ही उन्होंने राजेश शुक्ला को फोन कर कहा- बधाई हो शुक्ला जी सेवा भावना का आपका संकल्प पूरा हुआ। एसपी भसीन बुधवार को बांबे हॉस्पिटल पहुंचकर बालिका के हालचाल जानेंगे।



ऐसी है लड़की की कहानी... मेरी बीमारी ही मेरी दुश्मन, किसी मंदिर में रह लूंगी...
- लड़की ने रोते हुए बताया था कि वह सिंगरौली जिले की चितरंगी के पास एक गांव की रहने वाली है। मेरा चेहरा क्या बिगड़ा मां-बाप और भाई भी रूठ गए। उन्होंने मारपीट कर घर से निकाल दिया। इसके बाद चार दिन से भटक रही हूं। घर से निकाले जाने के बाद एक मंदिर में रही। उसने कहा कि यदि कहीं आसरा नहीं मिला तो अब भी किसी मंदिर में रह लूंगी। भीख मांगकर गुजर-बसर कर लूंगी। मां-बाप को मेरे मिलने की खबर देंगे तो भी वे लेने नहीं आएंगे। मेरी बीमारी ही मेरी सबसे बड़ी दुश्मन है। हर कोई मुझसे डरता है। खंडवा के बाल सखा आश्रम में ऐसा नहीं है। यहां मुझे घर-सा प्यार और दुलार मिल रहा है।


तीन जिलों में भटकने के बाद पहुंची थी खंडवा
- बालिका दिसंबर में बैतूल में चाइल्ड लाइन को मिली थी। उसे कुछ दिन बाल गृह में रखकर बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया। मामला बुरहानपुर की समिति के पास भी पहुंचा। उसके गृह जिले सिंगरौली की समिति ने भी लापरवाही बरती, जबकि सिंगरौली, बैतूल और बुरहानपुर जिले की बाल कल्याण समिति ने बालिका से पूछताछ कर उसके परिजन और घर-परिवार का पता लगाना था। लेकिन उसकी बीमारी से डर कहें या घिन, बालिका को कहीं भी आसरा नहीं दिया।


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सिंगरौली की रहने वाली 15 साल की सिंगरौली की रहने वाली 15 साल की
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