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आज भी मौजूद है यहां ब्रिटिश अधिकारियों की कब्र, एेसी है ३२०० मौतों की कहानी

आज भी मौजूद है यहां ब्रिटिश अधिकारियों की कब्र, एेसी है ३२०० मौतों की कहानी

Rajeev Tiwari | Last Modified - Dec 16, 2017, 03:44 PM IST

इंदौर। 200 साल पहले अंग्रेज-मराठा युद्ध में मारे गए अंग्रेजों की सामूहिक कब्र आज भी उज्जैन जिले में महिदपुर के दुबली गांव में मौजूद है। 1817 के युद्ध में अंग्रेजों की सेना का नेतृत्व करने वाले 9 महत्वपूर्ण अधिकारियों की मौत होल्कर सेना के बहादुर सैनिकों के हाथों हुई थी। इस युद्ध में नौ ब्रिटेश अधिकारी सहित 174 अंग्रेज मारे गए थे। वहीं तीन हजार मराठा सैनिक भी शहीद हुए थे। दुबली गांव में प्रथम दर्जे के इन अधिकारियों को एक ही स्थान पर एक साथ दफनाया गया था।


- पुरातत्वविद व अश्विनी शोध संस्थान के अध्यक्ष डॉ. आरसी ठाकुर ने बताया कि अंग्रेज-मराठा युद्ध में मराठा सेना के करीब 3000 सैनिक मारे गए थे। अंग्रेजों की सेना के 9 ब्रिटिश अधिकारी सहित 174 सैनिकों की मौत और 604 सैनिक गंभीर घायल हो गए थे। उस रात काफी भयानक बारिश होने से कई सैनिकों ने युद्ध स्थल पर ही दम तोड़ दिया था। यही नहीं युद्ध की शुरुआत के पहले मल्हार राव होल्कर के पास रत्न जड़ित तलवार थी। अंग्रेजी मेजर हार्स ने राजा से रत्न जड़ित तलवार छीनकर अंग्रेज सेना के प्रमुख जाॅन माल्कम को लाकर दी, जो आज भी यूरोप के ब्रिटिश म्युजियम में संरक्षित है।

- ठाकुर के अनुसार अंग्रेजों ने युद्ध में मारे गए हिंदू सैनिकों को जला दिया था, जबकि नौ ब्रिटिश अफसरों को महिदपुर के समीप दुबली गांव में एक साथ एक ही स्थान पर गाड़ दिया था। इनकी कब्र 200 साल बाद भी यहां मौजूद है। इन पर अंग्रेजी में शिलालेख लगे हुए हैं। इनमें अधिकारियों के नाम, पद और उनकी मृत्यु की दिनांक अंकित है। सामान्यत: एक व्यक्ति की एक कब्र का निर्माण होता है, लेकिन युद्ध के कारण अंग्रेज होलकर सैनिकों से इतने भयभीत थे कि जल्दबाजी में एक ही स्थान पर नौ अधिकारियों को एक साथ दफना दिया गया। इन नौ कब्रों को बनाने वाले अंग्रेजी अधिकारी आर.गिबिंस थे। इस युद्ध में आर गिबिंस के दो भाइयों की मौत हुई थी।

30 साल की उम्र में ही शहीद हो गई थीं वीरांगना तुलसाबाई
- पति के विक्षिप्त होने पर तुलसाबाई ने 10 वर्षों तक होल्करों की सत्ता संभाली और अंग्रेजों से संघर्ष करती रही। अंत में अपने ही लोगों ने विश्वासघात कर 20 दिसंबर सन् 1817 को शिप्रा के तट पर गर्दन काट कर हत्या कर दी गई। हत्यारों को पुरस्कार स्वरूप जावरा की नवाबी मिली। कुशल प्रशासक व महान रानी मात्र 30 वर्ष की उम्र में ही देश के लिए शहीद हो गई।

इन 9 ब्रिटिश अधिकारियों की कब्र
- डोनाल्ड मेकालियान सेना प्रमुख, लेफ्टिनेंट चार्ल्स कोलोेमन मद्रास यूरोपियन रेजीमेंट्स, लेफ्टिनेंट हेनकोम मद्रास यूरोपियन रेजीमेंट्स, लेफ्टिनेंट ग्लेन थर्ड पी.एल. आई, कैप्टन मार्टन रायफल क्राॅस, लेफ्टिनेंट शहनाहन रायफल क्रॉस, लेफ्टिनेंट कोर्न रायफल क्राॅस, लेफ्टिनेंट गिबिंस सेकंड बटालियन रेजीमेंट्स, लेफ्टिनेंट जाॅन गिबिंगस आॅफिसर थर्ड डिविजन।


मुख्यमंत्री चौहान ने की थी शहीद दिवस मनाने की घोषणा
- 20 दिसंबर को अंग्रेज व मराठाओं के युद्ध को 200 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इसमें शहीद हुए 3000 सैनिकों को श्रद्धांजलि दी जाएगी। सीएम शिवराजसिंह चौहान ने 20 दिसंबर को शहीद दिवस के रूप में मनाने की घोषणा करते हुए राशि भी स्वीकृत की थी। एसडीएम गोमे ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान महान क्रांतिकारी मंगल पांडे के वंशज रघुनाथजी पांडे और महाराणा प्रताप के वशंज विजयसिंह सिसौदिया मराठा सैनिकों को श्रद्धांजलि देंगे। वहीं शहीद वीरांगना तुलसाबाई की समाधि पर भी पुष्पांजलि दी जाएगी।


ग्रामीणों ने कब्र को किया क्षतिग्रस्त
- अनदेखी के चलते ग्रामीण इन कब्रों के पास लगे हुए शिलालेख निकालकर ले गए। दूसरी ओर कई लोगों ने सोने और खजाने की खोजबीन करने के चलते इन कब्रों को क्षतिग्रस्त कर दिया है। वर्तमान में कब्रों का संरक्षण होना चाहिए।

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Web Title: yaha ek kbr mein dfn hain 9 british afsr, eesi hai 3200 mauton ki ye kahani
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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