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कोर्ट जाने वाली पहली महिला के संघर्ष की कहानी, बेटी ने बताया अबू ये करते थे मां के साथ

कोर्ट जाने वाली पहली महिला के संघर्ष की कहानी, बेटी ने बताया अबू ये करते थे मां के साथ

Rajeev Tiwari | Last Modified - Dec 28, 2017, 01:35 PM IST

इंदौर।तीन तलाक के मुद्दे पर सरकार ने संसद में बिल पेश कर दिया है। बिल पेश करते हुए कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि यह किसी धर्म या मजहब को लेकर नहीं, बल्कि महिलाओं के अधिकारों को लेकर है। कांग्रेस ने बिल के समर्थन की घोषणा कर दी है, जबकि कुछ पार्टियां इसका विरोध कर रही हैं। इंदौर की शाहबानो पहली महिला थी, जिसने तीन तलाक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक लड़कर जीत हासिल की थी, लेकिन राजीव गांधी सरकार के एक फैसले ने उसे उसके हक से दूर कर दिया था। पढ़ें, इस महिला के संघर्ष की कहानी....


 
 - शाहबानो प्रकरण ने 80 के दशक में पूरे देश को हिला दिया था। dainikbahskar.com से चर्चा में शाहबानो की 76 वर्षीय बेटी सिद्दिका बेगम ने कहा कि उनकी अम्मी के लिए कानूनी लड़ाई लड़ना आसान नहीं था। पेशे से वकील पिता के खिलाफ जब मां खड़ी हुईं तो पूरा पुरुष समाज उनके खिलाफ हो गया था। इसके बावजूद मां ने हार नहीं मानी।


 - उन्होंने बताया कि वालिद मोहम्मद एहमद खां ने अम्मी के बाद एक और महिला से शादी कर ली थी। दूसरी शादी के कुछ समय बाद तक उन्होंने अम्मी को खर्चा दिया, लेकिन फिर धीरे-धीरे खर्चा देना बंद सा कर दिया था। जब अम्मी ने इस बारे में बात की तो उन्होंने उन्हें काफी जलील किया और मां को ये बात पसंद नहीं आई।


 - अम्मी नेे वालिद के खिलाफ जाकर गुजारा भत्ता पाने के लिए कोर्ट का रुख किया। इससे नाराज वालिद ने केस चलते हुए ही अम्मी को तलाक दे दिया थ। उस समय उनकी उम्र 62 के करीब थी। इस वाकये ने उन्हें भीतर तक तोड़ दिया था। हमारी तो शादी हो गई थी, लेकिन मां के सामने सबसे बड़ी समस्या मेरे तीनों भाइयों का बेरोजगार होना था। इसलिए घर चलाने के लिए भी उन्हें संघर्ष करना पड़ता था। इस सबके बावजूद उन्होंने लड़ाई लड़ने का सोच लिया था।
 
 - कोर्ट में केस पहुंचने के साथ ही मुल्ला-मौलवियों के अलावा पुरुष समाज अम्मी के खिलाफ हो गया था। कुछ लोगों ने उन्हें समझाने की कोशिश की तो कुछ ने दबाव बनाया, लेकिन अम्मी नहीं झुकीं। अम्मी के सामने सबसे बड़ी समस्या वालिद का बड़ा वकील होना था, क्योंकि मेरे वालिद उस दौर में विदेश से वकालत पढ़े हुए थे। ऐसे में अम्मी को आसानी से वकील भी नहीं मिल रहे थे। इसके बाद जिन वकील साहब ने अम्मी का केस लड़ा वे उज्जैन में रहते थे। इसलिए वकील से मिलने उन्हें उज्जैन जाना पड़ता था। लंबे संघर्ष के बाद अम्मी ने जीत हासिल की और कोर्ट ने अम्मी के हक में फैसला सुनाया।
 
 अरब के शेख ने दिया था प्रलोभन
 - सिद्दिका ने बताया कि उनके स्वर्गीय भाई हामिद ने उन्हें बताया था कि केस की गूंज देश ही नहीं विदेशों तक पहुंच चुकी थी। ऐसे में एक दिन उनके पास सऊदी अरब के एक शेख का संदेश आया था। शेख ने कहा था कि अपनी अम्मी को केस वापस लेने के लिए समझाओ। यदि वे केस वापस ले लेती हैं तो उन्हें हम तुम सब को हज करवा देेंगे और मुंह मांगी रकम भी देंगे। लेकिन अम्मी इसके लिए राजी नहीं हुईं।
 
 कौन थीं शाहबानो
 - इंदौर की रहने वाली पांच बच्चों की मां शाहबानो को उसके पति मोहम्मद खान ने 1978 में तलाक दे दिया था। पति के इस फैसले का विरोध करते हुए शाहबानो ने तलाक के खिलाफ आवाज उठाई और गुजारे भत्ते के लिए अदालत जा पहुचीं। कई सालों की मेहनत के बाद फैसला शाहबानो के पक्ष में आया। शाहबानो के पक्ष में आए फैसले के बाद मुस्लिम समाज ने विरोध शुरू कर दिया। विरोध स्वरूप ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड नाम की एक संस्था बनाई और सरकार को देशभर में उग्र आंदोलन की धमकी दी। इनकी धमकी के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने उनकी मांगें मानते हुए एक साल के भीतर सुप्रीम कोर्ट के धर्म-निरपेक्ष निर्णय को उलटने वाले, मुस्लिम महिला (तलाक अधिकार सरंक्षण) कानून 1986 को पास करा दिया और सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलट दिया। इस कानून के बाद शाहबानो को उसका हक नहीं मिल पाया।

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Web Title: kort jaane vaali 1st mahila ki kahani, beti ne btaayaa abbu ye karte the maan ke saath
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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