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बीजेपी सांसद का विवादित पोस्ट : राहुल गांधी की तुलना नगर वधु से की

बीजेपी सांसद का विवादित पोस्ट : राहुल गांधी की तुलना नगर वधु से की

Rajeev Tiwari | Last Modified - Nov 13, 2017, 07:07 PM IST

इंदौर। फिल्म पद्मावती के विरोध में विवादित बयान के बाद मप्र के उज्जैन सांसद चिंतामणि मालवीय ने अब कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर एफबी पर एक विवादास्पद पोस्ट की है। उन्होंने गुजरात चुनाव में राहुल गांधी के मंदिरों के चक्कर काटने पर तंज कसते हुए लिखा है राहुल गांधी की धर्म निरपेक्षता कहीं नगर वधु जैसी तो नहीं। हाल ही में उन्होंने पद्मावती का विरोध करते हुए एक पोस्ट किया था कि जिन फिल्म वालों की बीवी रोज शौहर बदलती हैं वो जौहर को क्या समझेंगे।


यह लिखा है सांसद ने पोस्ट में...
- यह देखकर बड़ी खुशी हुई कि गुजरात में जाकर राहुल गांधी धार्मिक हो गए हैं। तो क्या अचानक ही राहुल गांधी का हृदय परिवर्तन हो गया ? लेकिन तभी ख्याल आया कि वो केवल गुजरात के मंदिरों में ही क्यों जा रहे हैं, कभी कश्मीर, कर्नाटक, केरल के मंदिरों में क्यों नहीं जाते हैं?
- सवाल उठता है कि ये धार्मिकता सच्ची है या कुछेक दिनों के लिए दिखावा मात्र किया जा रहा है। कहीं ये धर्म निरपेक्षता वैसी ही तो नहीं है, जैसा कि सुनते आया है कि एक नगर वधु ही सबसे ज्यादा धर्म निरपेक्ष होती है।
- मन मे ये प्रश्न भी आता है कि राहुल गांधी वाली धर्म निरपेक्षता कहीं उस नगर वधु के जैसी तो नहीं?
चलो ये भी अच्छा हुआ कि तुम्हारी थोथी ही सही, ओढ़ी ही सही धर्मनिरपेक्षता के छींटे ही सही, मन्दिरों तक तो पहुंचे। अन्यथा अभी तक तो जालीदार टोपी धारण करके रोजा इफ्तारी और दरगाहों पर चादर चढ़ाने के उपक्रम तक ही धर्म निरपेक्षता सिमटी हुई थी।
- कुछ पुरानी यादें भी राहुल से जुड़ी हुई हैं। हां, राहुल गांधी कभी आपने ही तो कहा था कि लोग मन्दिरों में लड़कियां छेड़ने जाते हैं। अब बताइए कि जब आप मन्दिर- मन्दिर भटक रहे हैं तो आप पहले वाले बयान पर ही कायम हैं या उसका खंडन करते हैं ? बस, इसलिये पूछा कि आपने उस ओछी सोच के लिए कभी भी माफी मांगने की जेहमत नहीं उठाई।
- अब यही सत्य सामने आता है कि आपकी मानसिकता केवल गुजरात चुनाव के कारण बदली है। आज कल आप गौशाला भी जा रहे हैं, जाना भी चाहिए। बहुत अच्छी बात है, लेकिन फिर उन कांग्रेसियों पर आप खामोश क्यों हैं, जिन्होंने केरल में एक मासूम बछड़े को बीच चौराहे पर काटकर उसके गौमांस की पार्टी की थी। मतलब केरल में गाय आपके लिए भोजन है, पर गुजरात आने पर वही गाय आपके लिए पूजनीय हो गयी। वोट की खातिर ?
- आप खुलकर बताइये कि आपका कौन सा रूप सही है? वो केरल वाला या ये गुजरात वाला ढोंगी अवतार।
राहुल जी! कहीं ऐसा तो नहीं कि विकास को गाली देते-देते जिहाद पागल हो गया है? कहीं जालीदार टोपी में आपका कॅरियर खत्म तो नहीं हो गया ?
- रामसेतु को काल्पनिक कहने वालों, हिन्दुओ को भगवा आतंकवादी कहने वालों, तुम्हारे पापों को, तुम्हारे पाखंड को जनता भलीभांति जानती है और फिर चुनाव होते ही तुम नानी के घर चले जाओगे या किसी गोपनीय यात्रा पर विदेश।
- अरे हां ! ! ! नानी की बात से याद आया। आपको अपने दादाजी की याद क्यों नहीं आती ? आप भाषणों में दादी-दादी करते हो, नेहरू-गांधी करते हो, उनकी समाधियों पर जाते हो पर कभी दादा की मजार पर नहीं जाते। भला उनसे क्या दुश्मनी हो गयी?
- आप अक्षरधाम मंदिर गए। बहुत अच्छी बात है। जाना चाहिए, पर अक्षरधाम से याद आया कि अक्षरधाम मन्दिर पर हमले में शामिल अब्दुल राशिद का आपकी पार्टी ने बचाव क्यों किया था ? देश पर हमले करने वाले आतंकवादियों को आपके खासमखास अहमद पटेल नौकरी देते हैं और आप मौन धारण किए हुए हो?
इसके पीछे का सच क्या है। श्रीमान? आपकी कांग्रेस सरकार और आप टीपू सुल्तान की जयंती मनाने की बात पर अड़े हो तो इतिहासकारों से पूछ लो कि उस गद्दार टीपू जिहादी ने हजारों मंदिर तोड़े थे।
राहुल जी !!! मुख़ौटे बदलते - बदलते आप अपने ही बनाये जाल में फंस चुके हो।

- इस देश का बच्चा-बच्चा जान चुका है आपकी साजिशों को। कभी जात-पात के नाम पर तो कभी धर्म के नाम पर आप केवल अपने राजनैतिक स्वार्थ के लिए ही राजनीति करते हो। लेकिन अब देश जाग चुका है। जाति के आधार पर देश तोड़ने की साजिश काम नहीं आएगी।
एक नेक सलाह :
- रातदिन मोदी जी को कोसने से बेहतर है कि आप उनसे राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना सीखिए। राहुलजी, अब ढोंग - ढकोसलों से काम नहीं चलनेवाला। कुछ ठोस कुछ बेहतर करके देश को दिखाना होगा।
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