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ज्वालामुखी के लार्वा से बनी चट्‌टानों पर बसे हैं ये शहर, इसलिए जमीन से निकल रही है आग

ज्वालामुखी के लार्वा से बनी चट्‌टानों पर बसे हैं ये शहर, इसलिए जमीन से निकल रही है आग

Dainik Bhaskar

Nov 29, 2017, 11:17 AM IST
मंदसौर और नीमच शहर ज्वालामुखी मंदसौर और नीमच शहर ज्वालामुखी

इंदौर। मंदसौर नीमच जिले लाखों साल पहले की ज्वालामुखी के लावा से बनी चट्टानों पर बसे हैं। क्षेत्र में करीब 4 से 5 लावा निर्मित चट्टान (परत) जमीन के अंदर हैं। इस कारण यहां प्रारंभिक जांच में मिथेन मिली है। यह बहुत कम प्रेशर से निकल रही है। इस कारण 8-10 दिन में खत्म हो जाएगी। यह कहना है गरोठ के सेमली दीवान में ट्यूबवेल से निकल रही गैस की जांच करने पहुंची विशेषज्ञों की टीम का। इन्होंने जीपीएस से लोकेशन अौर फोटाे/वीडियो बनाकर जांच के लिए ओएनजीसी (ऑइल एंड नैचुरल गैस काॅर्पोरेशन) देहरादून भेजे हैं। यहां स्पष्ट होगा कि मौके पर कितनी मात्रा में गैस है और अासपास की संरचना में क्या है।



ये है मामला
- बोलिया रोड स्थित पावटी के पास सेमली दीवान में उदयसिंह चौहान के खेत पर 17 नवंबर को ट्यूबवेल खनन के दौरान पानी की जगह ज्वलनशील गैस निकली थी। इसकी जांच के लिए मंगलवार को जिला खनिज अधिकारी अार.के. कनेरिया की अगुवाई में विशेषज्ञों की टीम पहुंची। टीम ने बताया कि ट्यूबवेल से निकल रही गैस मिथेन है, जो आॅक्सीजन के संपर्क में आते ही ज्वलनशील हो जाती है। जांच के दौरान भौमिकीविद् गजेंद्र डाबर, भूजलविद् जीके वर्मा, पटवारी नितिन कटलाना, सचिव गोपालसिंह चौहान मौजूद थे।

लाखों साल पुरानी परतों के बीच घूम रही है गैस
- जिला खनिज अधिकारी आरके कनेरिया के मुताबिक मंदसौर-नीमच क्षेत्र की भूगर्भीय स्थिति देखें तो यह ज्वालामुखी के लावा से से निर्मित चट्टों पर बसा है। क्षेत्र में 4 से 5 बार ज्वालामुखी फटा है। इसीलिए यहां जमीन में 4 से 5 परत है। यह लाखों साल पुरानी हैं। इनके बीच कई जगह रिक्त स्थान हैं और इनमें मिथेन गैस घूमती है। यदि कहीं मजबूत चट्टान आ जाती है तो वहीं एकत्र होने लगती है। जब गहरी खुदाई के दौरान उक्त पाइंट टच होता है तो होल में से गैस निकलना शुरू हो जाती है।

प्राथमिक स्तर पर गैस का प्रेशर नहीं, मात्रा भी कम
भौमिकीविद गजेंद्र डाबर के मुताबिक यह मिथेन गैस है, लेकिन प्राथमिक स्तर पर प्रेशर के साथ नहीं निकल रही है। इसकी डेंसिटी बहुत कम है। दो दिन पहले के जो फोटो वीडियो क्लिप हैं। उसके मुकाबले आज प्रेशर कम है। इससे यह प्रतीत होता है कि यहां ज्यादा मात्रा में मिथेन नहीं हैं।

ओएनजीसी वैज्ञानिक जांच में ही मात्रा का पता चलेगा
भूजलविद जीके वर्मा के मुताबिक वर्तमान स्थिति की वीडियो, फोटो, ओएनजीसी लैब देहरादून भेजे हैं। वहां से ही वैज्ञानिक उक्त स्थान की लोकेशन के आधार पर जमीन के अंदर मिथेन की कितनी डेंसिटी आदि के बारे में पता करेंगे। अावश्यक हुआ तो वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम आएगी।

आगे की स्लाइड्स में देखें और फोटोज...

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