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मंडे पॉजिटिव / सिर्फ बेटियों वाले 25 परिवारों ने अकेलापन दूर करने बनाई डॉटर्स-पैरेंट्स एसोसिएशन, हर महीने बांटते हैं सुख-दुख



Daughters-Parents Association created 25 families with only daughters to overcome loneliness
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Daughters-Parents Association created 25 families with only daughters to overcome loneliness

  • 65 साल पार वाले दंपती वाट्स एप पर मिले, जुड़ा अटूट नाता

Dainik Bhaskar

Nov 11, 2019, 02:12 AM IST

प्रणय चौहान | इंदौर . 65 साल पार वाले 25 दंपती। अकेलापन दूर करने के लिए पहले एक वाट्सएप ग्रुप पर मिले। फिर ऐसे जुड़े कि 25 परिवारों का यह ग्रुप एक ‘परिवार’ बन गया। सुख-दुख... सब में साझीदार। इनमें कोई डॉक्टर, इंजीनियर ताे कोई बिजनेसमैन। समाज भी अलग-अलग, लेकिन एक ही बात इनमें समान कि सबकी केवल बेटियां हैं। इसलिए वाट्सएप ग्रुप का नाम भी यही रखा- डॉटर्स-पैरेंट्स एसोसिएशन। इस ग्रुप काे निशि गंभीर और डॉ. सुमित्रा शीधये ने बनाया। दाेनाें बताती हैं कि जिन परिजन की सिर्फ बेटियां हैं, उनका अकेलापन दूर करने के लिए 2007 में ग्रुप शुरू किया था।

 

रिश्ता ऐसा : एक आदमी की समस्या सब सुलझाते हैं

निशि ने बताया किसी सदस्य को समस्या होती है तो वह ग्रुप पर सूचित करता है। दूसरे सदस्य तुरंत सहायता के लिए पहुंच जाते हैं। ग्रुप के लोगों ने एसोसिएशन भी बना ली और ये जरूरतमंदों की मदद भी करते हैं। सभी सदस्य मिलकर जन्मदिन, सालगिरह, त्योहार, फादर्स-डे, डाॅटर्स-डे, वैलेंटाइस-डे सहित सभी त्योहार मनाते हैं। किसी की बेटी की शादी होती है तो ग्रुप के सभी सदस्य हर तरह की मदद करते हैं। 

 

इन दो घटनाओं से जानिए... किस तरह जरूरत के वक्त साथ खड़े हो जाते हैं ग्रुप के सदस्य

1. रात 2 बजे तकलीफ हुई, अस्पताल ले गए
एसजीएसआईटीएस के रिटायर्ड प्रोफेसर ओपी भाटिया बताते हैं, 14 फरवरी 2018 की बात है। उनके यहां सदस्यों की पार्टी थी। रात 2 बजे भाटिया को हार्ट में तकलीफ हुई तो पत्नी ने एसोसिएशन अध्यक्ष अशोक मल्होत्रा को कॉल किया। मल्होत्रा उनके घर पहुंचे और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। इस कारण उन्हें समय पर मदद मिल पाई।

 

2. ग्रुप सदस्य की बेटी को  अपने घर में रुकवाया 
रिटायर्ड वरिष्ठ कपास क्रय अधिकारी राजकुमार अग्रवाल ने बताया, उनकी बेटी तानिया मुंबई में सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करती है। पिछले महीने एक इंटरव्यू के लिए इंदौर आना पड़ा। मैं और पत्नी इंदौर से बाहर थे। तब मैंने निशि गंभीर को कॉल किया। तब निशि बेटी को लेने एयरपोर्ट पहुंचीं और उसे दो दिन अपने घर में ठहराया। इस वजह से तानिया को कोई तकलीफ नहीं हुई।

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