मां वाग्देवी की तस्वीर रखने पहुंचीं महिलाएं भोजशाला का दरवाजा खुलवाने पर अड़ीं, सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर भजन गाए

2 वर्ष पहले
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महिलाओं काे भाेजशाला के अंदर जाने से राेकती पुलिस। - Dainik Bhaskar
महिलाओं काे भाेजशाला के अंदर जाने से राेकती पुलिस।
  • प्रशासन ने शाम 4 बजे तक नहीं खाेले भाेजशाला के द्वार, महू विधायक ठाकुर ने नाराजगी जताई
  • प्रशासन ने महिलाओं से दहलीज पूजन कराने के बाद तस्वीर भाेजशाला के बाहर टेबल पर रखवाई

धार. शुक्रवार काे भाेजशाला में जुमे की नमाज के बाद मां वाग्देवी की तस्वीर रखने पहुंचीं महिलाओं ने प्रशासन द्वारा भाेजशाला का द्वार नहीं खाेलने पर नाराजगी जताई। महिलाओं ने प्रदेश सरकार और प्रशासन के खिलाफ आक्राेश व्यक्त किया, भजन भी किए। प्रशासन ने महिलाओं से भाेजशाला का दहलीज पूजन कराकर तस्वीर बाहर टेबल पर रखवाकर लाैटा दिया। मातृ शक्ति सम्मेलन में पहुंची महू विधायक उषा ठाकुर ने भी प्रशासन के रवैये पर नाराजगी जताई। बता दें कि भोजशाला विवाद सदियों से चला आ रहा है। मुस्लिम जहां इसे मस्जिद मानते हैं, तो हिंदू भोजशाला। एक साथ पूजा और जुमे की नमाज को लेकर दो पक्षों के बीच का विवाद की स्थित बन जाती है।


भाेज उत्सव समिति की अगुवाई में भाेज महाेत्सव के तहत अंतिम दिन शुक्रवार काे मातृशक्ति सम्मेलन था। इधर, मुस्लिम समाज को भाेजशाला में जुम्मे की नमाज अदा करना थी। प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की थी। दाेपहर 1 से 3 बजे तक नमाज हुई। इसके बाद प्रशासन ने भाेजशाला का मुख्य द्वार बंद कर दिया। शाम 4 बजे महिलाएं दहलीज पूजन और माता की तस्वीर रखने भाेजशाला पहुंची। मगर यहां द्वार बंद देख वे नाराज हाे गईं। महिलाओं ने प्रशासन और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। बावजूद प्रशासन ने द्वार नहीं खाेला। अंतत: महिलाओं काे दहलीज पूजन और तस्वीर टेबल पर रखकर लाैटना पड़ा।

एक घंटा पहले पहुंची विधायक, महिलाओं के साथ किए भजन
मातृशक्ति सम्मेलन में शामिल हाेने महू विधायक उषा ठाकुर निर्धारित समय से एक घंटे पूर्व 2 बजे पहुंच गईं। विधायक ने महिलाओं के साथ ज्याेति मंदिर में बैठकर भजन भी किए। इसके बाद जब प्रशासन द्वारा भाेजशाला का द्वार नहीं खाेलने की खबर उन तक पहुंची ताे उन्हाेंने भाेजशाला आने से मना कर दिया। विधायक ने संकल्प लिया कि जब तक वे भाेजशाला के अंदर पूजन नहीं करेंगी, तब तक वे भाेजशाला नहीं आएंगी। विधायक का संकल्प भाेजशाला के बाहर हिंदूवादी संगठन के नेता ने सार्वजनिक रूप से भी सुनाया। इससे पहले विधायक ने ज्याेति मंदिर में कार्यक्रम काे संबाेधित करते हुए कहा- लंबे समय से यह सत्याग्रह चल रहा है। मगर एकजुटता नहीं हाेने से हमेशा हिंदू समाज काे प्रशासन की गलत नीतियाें के आगे दबना पड़ता है। भाेजशाला में पूजन, मातृ शक्ति सम्मेलन पर भी पाबंदी लगाई जा रही है। ऐसे में भाेजशाला के लिए चल रहे सत्याग्राह में सभी काे संगठित हाेना पड़ेगा। इसके लिए ज्यादा से ज्यादा लाेगाें काे सत्याग्रह से जाेड़ना पड़ेगा।
 

मुस्लिम समाजजन बाेले- दहलीज पूजन की ये काैन सी नई परंपरा, अफसराें ने बताए नियम
प्रशासन ने दरगाह पर माैजूद मुस्लिम समाज के वरिष्ठाें काे दहलीज पूजन की बात बताई ताे समाजजन नाराज हुए। पहले सिटी मजिस्ट्रेट दिव्या पटेल ने समाजजन से चर्चा की। ताे समाजजन ने उनसे कहा- ये काैन सी नई परंपरा लाए हैं। तब सिटी मजिस्ट्रेट ने समाजजन काे सरकारी नियमाें का हवाला दिया। इसके बाद एसडीएम वीरेंद्र कटारे पहुंचे। उन्हाेंने बाबा कमालुद्दीन की दरगाह के बाहर बैठे लोगों से कहा- आप अंदर बैठिए काेई समस्या नहीं है, लाॅ एंड ऑर्डर संभालना हमारा काम है। इसके बाद भी समाजजन ने प्रशासन के प्रति नाराजगी जाहिर की। इस पर प्रशासन ने दरगाह के सामने बैरिकेडिंग करते हुए टेंट से ढंक दिया। बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। दरगाह परिसर में भी पुलिस अफसराें के साथ एसटीएफ तैनात की गई। इसी तरह कमालुद्दीन बाबा की दरगाह के सामने ही दूसरी दरगाह के सामने बैरिकेडिंग कर वहां पुलिस तैनात की गई।

दाेपहर 12.30 बजे से भाेजशाला से जुड़े रास्ते बंद कर दिए
जुम्मे की नमाज और मातृ शक्ति काे लेकर चिंतित प्रशासन ने नमाज से कुछ समय पहले ही भाेजशाला से जुड़े रास्ताें से वाहनाें की आवाजाही बंद कर दी। दाेपहर 12.30 बजे से प्रशासन ने भाेजशाला के लगभग 50 मीटर दायरे में बैरिकेडिंग कर दी। इसमें से सिर्फ राहगीराें काे ही निकलने की अनुमति थी। दाेपहर 12.40 पर कलेक्टर श्रीकांत बनाेठ और एसपी आदित्य प्रताप सिंह ने भाेजशाला की छत से कमान संभाल ली। दाेनाें अधिकारी शाम तक वहीं रहे। वसंताेत्सव काे लेकर भाेज उत्सव समिति द्वारा बनाया द्वार प्रशासन ने ढंक दिया। दाेपहर 1 बजे से नमाजी भाेजशाला पहुंचना शुरू हाे गए थे। 2.45 बजे वे नमाज पढ़कर निकलने लग गए थे। इसके बाद प्रशासन ने बैरिकेडिंग कर शाम 4 बजे दहलीज पूजन के लिए महिलाओं काे अनुमति दी। माता तस्वीर रखने के लिए भाेजशाला में प्रवेश नहीं करने से एक महिला ने जमकर हंगामा किया। हालांकि हिंदूवादी नेता उसे बाहर ले गए।

यह है भोजशाला का इतिहास
कहा जाता है कि राजा भोज देवी सरस्वती के उपासक थे। उन्होंने धार में 1034 ईस्वी में भोजशाला के रूप में एक भव्य पाठशाला बनवाकर उनकी प्रतिमा स्थापित की। कुछ इतिहासकारों के मुताबिक, 1305 ईस्वी में अलाउद्दीन खिलजी ने भोजशाला को ध्वस्त कर दिया। बाद में दिलावर खां गौरी ने 1401 ईस्वी में भोजशाला के एक भाग में मस्जिद बनवा दी। 1514 ईस्वी में महमूद शाह खिलजी ने शेष भाग पर भी मस्जिद बनवा दी। अंग्रेजी राज से यहां विवाद की स्थिति बन गई, जो आजादी के बाद लगातार तेज होती गई।