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मालवा-निमाड़ में ज्योतिरादित्य से ज्यादा दिग्विजय का होल्ड; भाजपा में अभी नंबर एक पर शिवराज, दो पर विजयवर्गीय

एक वर्ष पहले
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  • मालवा-निमाड़ में 35 सीट पर कांग्रेस और 28 सीट पर भाजपा विधायक है
  • यदि मध्यावधि चुनाव होते हैं तो मालवा निमाड़ में कांग्रेस को हो सकता है नुकसान

इंदौर(पंकज भारती). प्रदेश में चल रहे सियासी घमासान के बीच मालवा-निमाड़ के कांग्रेस नेता कुछ कम चिंतित हैं। हालांकि, कोई खुलकर सामने तो नहीं आ रहा है, लेकिन दबी जुबान से सभी यह कह रहे हैं- यहां ज्योतिरादित्य सिंधिया से ज्यादा दिग्विजय सिंह की कमांड अच्छी है। मालवा-निमाड़ क्षेत्र में 66 सीटें हैं, इनमें ज्यादातर सीटें भाजपा के प्रभाव वाली हैं। 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को यहां 28 सीटें मिली थीं, जो पिछले चुनाव की अपेक्षा 28 कम थीं। कांग्रेस ने यहां 35 सीटें जीती थीं। कहा जाता है- मालवा-निमाड़ में भाजपा के पिछड़ने के कारण पार्टी को सत्ता से बाहर होना पड़ा था।


मध्यप्रदेश भाजपा में नंबर वन और नंबर दो नेता की बात करें तो पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान यहां पार्टी का चेहरा हैं, उनके बाद कैलाश विजयवर्गीय का नाम आता है। लेकिन, सिंधिया के आने के बाद उनकी स्थिति इस नंबर गेम में कहां होगी, यह कह पाना मुश्किल है। कांग्रेस में जहां सिंधिया प्रदेश अध्यक्ष पद के प्रमुख दावेदार माने जाते थे, उनका कद भी कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के समकक्ष ही माना जाता था।

सिंधिया का प्रभाव इंदौर में सिर्फ सांवेर सीट पर
राजनीतिक जानकार अरविंद तिवारी मानना है मालवा-निमाड़ के साथ ही मप्र की कई सीटों पर सिंधिया का असर पड़ेगा लेकिन यह कितना पड़ेगा यह इस बात पर निर्भर करता है कि उनके साथ कांग्रेस के कितने नेता भाजपा में शामिल होते है। यदि इंदौरकी बात की जाए तो यहां की 9 विधानसभा सीटों में से सांवेर विधानसभा सीट को छोड़कर शेष सीटों पर सिंधिया का कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ेगा। सिंधिया गुट के विधायकों ने अब तक भाजपा में जाने का निर्णय नहीं लिया है। जरूरी नहीं भाजपा में शामिल होने के बाद सिंधिया गुट के विधायकों को भाजपा टिकट दे। भाजपा यदि इन्हें अपना उम्मीदवार घोषित भी किया तो स्थानीय नेता और भाजपा के कार्यकर्ता उन्हें  आसानी से स्वीकार नहीं कर पाएंगे। सिंधिया के खास समर्थक तुलसी सिलावट सांवेर से विधायक हैं जो कमलनाथ सरकार में स्वास्थ्य मंत्री बनाए गए थे। वह भाजपा के राजेश सोनकर को हराकर विधायक बने थे। सोनकर और सिलावट के बीच तनातनी चलती रहती है ऐसे में सिलावट के लिए भाजपा में स्थिति बहुत अच्छी बनती दिखाई नहीं दे रही है।

भाजपा ने टिकट नहीं दिया तो करियर खतरे में
सिंधिया के साथ कांग्रेस छोड़ने वाले 22 विधायकों को उपचुनाव या मध्यावधि चुनाव होने की स्थिति में भाजपा टिकट देगी या नहीं, यह बड़ा सवाल है। भाजपा इन्हें टिकट देकर अपने नेताओं को घर बैठाने का रिस्क नहीं उठाएगी। क्योंकि ऐसा होने पर भाजपा के अंदर भी विद्रोह हो सकता है। इसका फायदा कमलनाथ और दिग्विजय कैंप को मिल सकता है। सूत्रों के अनुसार सिंधिया के साथ गए नेताओं में इस बात को लेकर घबराहट है कि कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद भाजपा से चुनाव नहीं लड़ पाएंगे तो उनका राजनीतिक करियर समाप्त हो जाएगा।




सिंधिया के कांग्रेस से इस्तीफे के बाद उनके समर्थकों ने भी इस्तीफा देना प्रारंभ कर दिया। इंदौर शहर कांग्रेस अध्यक्ष प्रमोद टंडन ने कांग्रेस छोड़ दी। इंदौर लोकसभा से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुके सत्यनारायण पटेल, इंदौर-2 विधानसभा से कांग्रेस के उम्मीदवार रहे मोहन सेंगर ने भी कांग्रेस छोड़ दी। देवास के हाटपिपलिया से कांग्रेस विधायक मनोज चौधरी ने भी इस्तीफा दे दिया। इसके अलावा विपिन खुजनेरी, संदीप मेहता, मंजूर बेग, प्रकाश तिवारी, पवन जायसवाल, विनोद कुशवाह आदि भी कांग्रेस को अलविदा कह चुके है।

मालवा-निमाड़ की सीटें
इंदौर (9 सीट)
: इंदौर-1, इंदौर-2, इंदौर-3, इंदौर-4, इंदौर-5, देपालपुर, महू , राऊ, सांवेर
उज्जैन (7 सीट) : नागदा-खाचरौद, महिदपुर, तराना, घटिया, उज्जैन नार्थ, उज्जैन साउथ, बड़नगर
रतलाम (5 सीट) : रतलाम ग्रामीण, रतलाम शहरी, सैलाना, जावरा, आलोट
मंदसौर (4 सीट) : मंदसौर, मल्हारगढ़, सुवासरा, गरोठ
नीमच (3 सीट) : मनासा, नीमच, जावद
धार (7 सीट) : सरदारपुर, गंधवानी, कुक्षी, मनावर, धरमपुरी, धार, बदनावर 
झाबुआ (3 सीट) : झाबुआ, थांदला, पेटलावद
आलीराजपुर (2 सीट) : आलीराजपुर, जोबट
बड़वानी (4 सीट) : सेंधवा, राजपुर, पानसेमल, बड़वानी
खरगोन (6 सीट) : भीकनगांव, बड़वाह, महेश्वर, कसरावद, खरगोन, भगवानपुरा
बुरहानपुर (2 सीट) : नेपानगर, बुरहानपुर
खंडवा (4 सीट) : मंधाता, हरसूद, खंडवा, पंधाना
देवास (5 सीट) : सोनकच्छ, देवास, हाटपिपल्या, खातेगांव, बागली
शाजापुर (3 सीट) : शाजापुर, शुजालपुर, कालापीपल
आगर मालवा (2 सीट) : सुसनेर, आगर