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स्वास्थ्य / मोबाइल और टीवी पर राेज 3 घंटे बिता रहे 80 % बच्चे, फैटी लीवर सहित अन्य बीमारियों का हो रहे शिकार



Eighty percent of children spending three hours on mobile and television, victims of fatty liver and other diseases
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Eighty percent of children spending three hours on mobile and television, victims of fatty liver and other diseases

  • 70 फीसदी बच्चे ऐसे है जो किसी भी प्रकार की शारीरिक गतिविधियों में हिस्सा नहीं लेते
  • हफ्ते में तीन बार या उससे अधिक जंग फूड खा रहे हैं बच्चे

Dainik Bhaskar

Oct 11, 2019, 06:43 PM IST

इंदौर. करीब 80 फीसदी बच्चे रोजाना औसतन 2.7 घंटे टीवी पर और एक घंटा मोबाइल पर बीता रहे हैं। 70 फीसदी बच्चे ऐसे है जो किसी भी प्रकार की शारीरिक गतिविधियों में हिस्सा नहीं लेते। स्कूल, कोचिंग, होमवर्क और टीवी देखने में समय चला जाता है। इनमें से 81 प्रतिशत बच्चे टीवी देखते ही खाना पसंद करते हैं। 80 फीसदी बच्चे हफ्ते में तीन बार या उससे अधिक जंग फूड खाते हैं। यह आंकड़े हाल ही में मोटापे से पीड़ित बच्चों पर की गई स्टडी में सामने आए है। 


मोटापे की गंभीर बीमारी से जूझ रहे बच्चों पर किए गए इस सर्वे में जीवनशैली और कसरत का अभाव प्रमुख रूप से सामने आया है। वर्ल्ड ओबेसिटी डे पर बच्चों में मोटापा, उसके कारण, उसके गंभीर परिणामों व बचाव के तरीकों पर चर्चा के लिए मधुमेह चौपाल द्वारा जागरूकता कार्यक्रम रखा गया। 


एंडोक्रोनोलॉजिस्ट डॉ. संदीप जुल्का ने बताया कि छह माह तक 300 बच्चों पर स्टडी की गई। जिसमें यह जानकारी सामने आई। हमने उनके रोज टीवी देखने की आदत, मोबाइल का उपयोग, फिजिकल एक्टिविटी, पारिवारिक प्रष्ठभूमि, स्कूल में खेल गतिविधियां आदि प्रश्न पूछे गए। 


इसमें यह पाया गया कि बच्चे रोजाना औसतन 2.7 घंटे टीवी और एक घंटा मोबाइल को समय देते हैं। विश्व में 28 लाख लोग मोटापा और उससे होने वाली बीमारियों के कारण अपनी जान खो देते हैं। उन्होंने कहा कि मोटापा सिर्फ आलस, गलत दिनचर्या और खानपान के कारण नहीं होता बल्कि इसके पीछे दूसरी बहुत सारी स्थितियां होती है। 80 प्रतिशत मामलों में उससे अभिभावक मोटे होते हैं, इसलिए माता-पिता को खुद के स्वास्थ्य पर भी ध्यान देने की जरूरत होती है।


11-12 साल में हो रहा फैटी लीवर
फैटी लीवर की समस्या मोटे लोगों में बहुत की कॉमन है। 80 फीसदी मोटे लोगों में फैटी लीवर सामान्य बात है। इसकी शुरूआती अवस्था को चिकित्सकीय भाषा में नैश यानी नॉन अल्कोहलिक स्टिरटीओ हैपेटाइटिस कहा जाता है। इसमें लीवर में इकट्ठी चर्बी उसकी कोशिकाओं को तोड़ने की कोशिश करती है। इसके कारण 15 से 20 साल बाद सिरोसिस होने की संभावना बढ़ जाती है। जिन बच्चों पर यह स्टडी की गई है, उनमें से 20 से 22 प्रतिशत बच्चों को 11-12 साल की उम्र में ही नैश हो चुका था। यानी युवा अवस्था आने पर उनमें लीवर फेल्योर जैसी गंभीर बीमारी होने की संभावना अधिक है।

 

बचाव के उपाय
-रोज कसरत करें
-बच्चों काे रोजाना दाैड़ने-भागने की जगह दें
- जंक फूड को पूरी तरह बंद करना संभव नहीं, इसलिए नियम बनाए कि 15 दिन में एक बार ही खाएंगे
-टीवी व मोबाइल पर कम समय रहने दें। खाना चबा कर खाएं

 

छप्पन दुकान पर 13 अक्टूबर को कार्यक्रम
मोटापा कम करने के लिए 13 अक्टूबर को सुबह 7 बजे छप्पन दुकान पर विशेष मोटिवेशनल प्रोग्राम होने जा रहा है। सीएमएचओ डॉ. प्रवीण जडिया इसका उद्घाटन करेंगे। इसमें जिन लोगों ने डाइट व एक्सराइज के जरिए अपना वजन कम किया है, वे अपनी-अपनी स्टोरी सुनाएंगे।

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