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सफाई से भ्रष्टाचार / राठौर के भ्रष्टाचार की पाइप लाइन; ट्यूबवेल में मेंटेनेंस, टैंकर के अटैचमेंट के बहाने भरी जेब



अभय के मकान की तल मंजिल पर उसने स्वच्छ भारत मिशन का समानांतर दफ्तर खोल लिया था। अभय के मकान की तल मंजिल पर उसने स्वच्छ भारत मिशन का समानांतर दफ्तर खोल लिया था।
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अभय के मकान की तल मंजिल पर उसने स्वच्छ भारत मिशन का समानांतर दफ्तर खोल लिया था।अभय के मकान की तल मंजिल पर उसने स्वच्छ भारत मिशन का समानांतर दफ्तर खोल लिया था।

  • निगम के हर विभाग में भ्रष्टाचार करता गया इंजीनियर, पकड़ में आया फिर भी काम नहीं छीना

Dainik Bhaskar

Oct 13, 2018, 01:06 AM IST

इंदौर. ईओडब्ल्यू की कार्रवाई में पकड़ाए नगर निगम के असिस्टेंट इंजीनियर अभय सिंह राठौर ने पानी से खूब पैसा कमाया। ट्यूबवेल करवाने, सुधारने से लेकर किराए पर टैंकर लगाने और पाइप लाइन बदलने में कमीशन, घपलेबाजी का ऐसा सिस्टम खड़ा कर दिया कि कहीं भी बिना लेन-देन काम नहीं होता। दोषी होने के बाद भी कार्रवाई से बचता गया। 
 

ट्यूबवेल : पैसे निकाले, मेंटेनेंस नहीं
ऐसे किया घपला :
शहर में 12 हजार से ज्यादा सार्वजनिक ट्यूबवेल के मेंटेनेंस पर निगम हर महीने 60 लाख रुपए खर्च करता है। कई ट्यूबवेल का पैसा बगैर सुधरे निगम खजाने से निकाल लिया।
ऐसे आया पकड़ में : 2000 में फर्जी ट्यूबवेल करवाने के मामले में राठौर फंसा तो मेंटेनेंस की गड़बड़ियां सामने आईं। 2005 से 2009 के बीच पार्षदों की शिकायत पर जांच हुई। चर्चित ट्यूबवेल ठेकेदार पर कार्रवाई भी हुई। 2016 में तत्कालीन निगमायुक्त मनीष सिंह ने ऐसे कुछ मामले पकड़े।

 

पाइप : बिना बताए बेच दिए
ऐसे किया घपला : 2007 में यशवंत सागर के फूल कलारिया पंपिंग स्टेशन पर 100 टन पाइप नई लाइनों के लिए आए थे। करोड़ों रुपए के ये पाइप रातोंरात गायब हो गए। जांच में अभय सिंह राठौर का नाम सामने आया। जांच के बात पता चला कि इतने सारे पाइपों को बिना किसी को बताए बाजार में बेच दिया और उन्हें गलाने की तैयार भी थी, ताकि सबूत मिट जाएं, लेकिन पकड़ा गया।
ऐसे आया पकड़ में : अभय के कारनामे का खुलासा हुआ तो उसे कुछ दिन के लिए जल यंत्रालय से हटाया। 
 

 

टैंकर : अटैच किए बगैर भुगतान
ऐसे किया घपला : राठौर का बहनोई राकेश चौहान 2004 से निगम में टैंकर ड्राइवर है। कुछ साल में उसके खुद के चार टैंकर हो गए, जो हर साल गर्मी में निगम में अटैच होते हैं। सबसे बड़ा घपला उन टैंकरों का किराया देने में होता है, जिन्हें अटैच नहीं किया जाता। दस्तावेज में टैंकर की रजिस्ट्रेशन बुक लगाकर बताया जाता है कि ये निगम में पानी सप्लाय में लगा है, पर वैसा कोई टैंकर निगम में होता ही नहीं है। दूसरी बड़ी गड़बड़ी पानी वितरण में होती है।
ऐसे आया पकड़ में : पिछले साल गर्मी में अफसरों ने सांवेर रोड के उद्योगों और बायपास पर निर्माणाधीन इमारतों में निगम के टैंकरों को पानी बेचते पकड़ा। 50 हजार रुपए महीने में 4 टैंकर पानी डाला जा रहा था।
 

ट्रैफिक : सामग्री बगैर भुगतान
ऐसे किया घपला : 2012 में सवा दो करोड़ का ट्रैफिक उपकरण घोटाला हुआ। अफसरों ने ठेकेदार से रबर के स्पीड ब्रेकर, प्लास्टिक डिवाइडर, ब्लिंकर्स, स्टील ब्रेकर्स लगवाए बिना उसे पैसों का भुगतान कर दिया।
ऐसे आया पकड़ में : गड़बड़ी पकड़ाई तो पैसा रोका। राठौर आरोपी है, इसमें जांच और कार्रवाई लंबित है।
 

पाइप लाइन : दो साल पहले नर्मदा लाइन बिछाने के टेंडर में घोटाला
ऐसे किया घपला :
2015-16 में नर्मदा की पाइप लाइन बिछाने के लिए टेंडर हुए। राठौर ने एक साथ सभी का टेंडर करने के बजाय हर जोन में अलग-अलग टेंडर करवाए। इससे हर जोन में अलग रेट आया, इसके बावजूद वर्कऑर्डर कर दिया और करीब 50 लाख रुपए का काम करवा लिया। ऐेसे 4 से 5 करोड़ रुपए के पाइप लाइनों के काम हो गए।

ऐसे आया पकड़ में : तत्कालीन निगमायुक्त मनीष सिंह ने अभय राठौर की धांधली पकड़ ली। तब बतौर सजा राठौर को जल यंत्रालय विभाग से हटाकर जोन भेज दिया।

 

भाई के खाते में मिले 20 लाख रुपए, तीन साल से सैलरी अकाउंट से कभी पैसे ही नहीं निकाले आरोपी के भाई ने : ईओडब्ल्यू की कार्रवाई में फंसे नगर निगम के सहायक यंत्री व स्वच्छ भारत मिशन में कम्युनिटी और पब्लिक टॉयलेट (सीटीपीटी) के प्रभारी कार्यपालन यंत्री अभयसिंह राठौर के घर से मिले 20 लाख रुपए नकद के मामले में ईडी और आयकर विभाग से जानकारी मांगी गई है।

 

ईओडब्ल्यू एसपी सव्यसाची सराफ के मुताबिक अभय सिंह के छोटे भाई आईडीए में टाइम कीपर संतोष सिंह राठौर के आईडीए परिसर स्थित बैंक शाखा में 20 लाख रुपए जमा मिले, जो उसकी तनख्वाह के हैं। वह तीन साल से सैलरी अकाउंट से सैलरी निकालता ही नहीं था। अभय के मकान के तल मंजिल पर चल रहे ऑफिस से प्रोजेक्ट में लगाने वाले मस्टरकर्मियों के मस्टर, रसीद कट्टे आदि दस्तावेज भी मिले हैं। निगम के संबंधित अफसरों को पत्र लिखकर पूछा है कि निगम की फाइलें आरोपी अभयसिंह के निजी निवास पर कैसे पहुंचीं।

 

जांच अधिकारी एवं ईओडब्ल्यू के डीएसपी आनंद यादव के मुताबिक 12 बैंकों में 20 खातों की जानकारी मिली है। ये खाते अभयसिंह, पत्नी शालिनी, पुत्र जयसिंह, बेटी निहारिका, भांजे अमित सिंह तोमर, जीजा राकेश सिंह चौहान, भतीजे हर्ष पिता संतोष राठौर, संतोष की पुत्री मेघा राठौर के नाम हैं।

 

भाई संतोष का वेतन 26 हजार, फिर भी कोठी नुमा बंगले में रहता है : वर्ष 1995 में संतोष अस्थाई कर्मी के रूप में आईडीए में पदस्थ हुआ था। बाद में वह पक्का होकर टाइम कीपर बन गाय। पहले उसका वेतन 20 हजार रुपए से कम था। वर्तमान में वेतन 26 हजार रुपए है फिर भी वह कोठी नुमा बंगले में रहता है। संतोष का इलाहाबाद बैंक विजय नगर शाखा में खाते के साथ लॉकर भी मिला है। शुक्रवार को लाकर फ्रीज करवा दिया गया।

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