'सफाई' से भ्रष्टाचार: स्वच्छ भारत के टॉयलेट प्रभारी के घर से मिली 15 करोड़ की संपत्ति, खुद के नाम सिर्फ एक प्लॉट, बंगला-कार सब बेटा-बेटी और बहन-बहनोई के नाम / 'सफाई' से भ्रष्टाचार: स्वच्छ भारत के टॉयलेट प्रभारी के घर से मिली 15 करोड़ की संपत्ति, खुद के नाम सिर्फ एक प्लॉट, बंगला-कार सब बेटा-बेटी और बहन-बहनोई के नाम

Bhaskar News

Oct 12, 2018, 04:11 PM IST

संपत्ति सामने आने पर अब 'कचरा छांटने' का मिला काम।

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इंदौर। राज्य आर्थिक अपराध अनुसंधान ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) ने नगर निगम जल यंत्रालय के सहायक यंत्री व स्वच्छ भारत मिशन में कम्युनिटी और पब्लिक टॉयलेट के प्रभारी कार्यपालन यंत्री अभय सिंह राठौर व उसके भाई सहित चार जगह गुरुवार को छापे मारे। ईओडब्ल्यू के मुताबिक, 'छापे में लगभग 15 करोड़ की बेनामी संपत्ति मिली। आरोपी के नाम सिर्फ एक प्लॉट मिला। पत्नी के नाम पर किसी तरह की संपत्ति के दस्तावेज नहीं मिले हैं। टीम ने गुलाब बाग कॉलोनी स्थित मकान पर जब तलाशी शुरू की, तभी आरोपी के भाई संतोष, जीजा राकेश सिंह, भांजे अमित के घरों पर भी कार्रवाई की। कार्रवाई के बीच ही निगमायुक्त ने राठौर को हटाते हुए ट्रेंचिंग ग्राउंड में बायोरेमिडिएशन (कचरा छंटाई व निपटान) का काम सौंप दिया है।

पाइप, टैंकर, ट्यूबवेल घोटाले में नाम, हर बार सिर्फ विभाग बदला


1. राठौर 1988 में निगम में मस्टरकर्मी बना। तब इसके मामा आरके सिंह कुशवाह अधीक्षण यंत्री थे। 2000 में राठौर के इलेक्ट्रिकल इंजीनियर के डिप्लोमा सर्टिफिकेट पर सवाल उठे।
2. 2000-01 में जल यंत्रालय में सब इंजीनियर था। कर्मचारियों से मिलकर खुद ही कई कामों की फाइलें बना ली और उस पर निगमायुक्त के फर्जी दस्तखत भी हो गए। परिषद ने एफआईआर का आदेश भी दिया, पर जांच अधूरी रहने से कार्रवाई नहीं हुई।


3. निगम में ट्यूबवेल के नाम पर लाखों का भुगतान हुआ, जो हुए ही नहीं। इसमें भी नाम।


4. 2004 तक विद्युत विभाग में रहा। फाइल संबंधी गड़बड़ी में विभाग बदला तो टैंकर प्रभारी बना।


5. 2007-08 में यशवंत सागर के फूल कलारिया पंपिंग स्टेशन से 100 टन पाइप गायब होने के मामले में सस्पेंड हुआ।


6. 2010-11 में यातायात सामग्री की खरीदी, उसके उपयोग, क्वालिटी और बाद में भुगतान को लेकर सामने आए सवा दो करोड़ रुपए के ट्रैफिक घोटाले में नाम। जांच अभी भी जारी।


बंगला, कार, बिजनेस सब बेटा, बेटी, भाई, बहन-जीजा के नाम

1. राठौर 1988 में निगम में मस्टरकर्मी बना। तब इसके मामा आरके सिंह कुशवाह अधीक्षण यंत्री थे। 2000 में राठौर के इलेक्ट्रिकल इंजीनियर के डिप्लोमा सर्टिफिकेट पर सवाल उठे।

2. 2000-01 में जल यंत्रालय में सब इंजीनियर था। कर्मचारियों से मिलकर खुद ही कई कामों की फाइलें बना ली और उस पर निगमायुक्त के फर्जी दस्तखत भी हो गए। परिषद ने एफआईआर का आदेश भी दिया, पर जांच अधूरी रहने से कार्रवाई नहीं हुई।


3. निगम में ट्यूबवेल के नाम पर लाखों का भुगतान हुआ, जो हुए ही नहीं। इसमें भी नाम।


4. 2004 तक विद्युत विभाग में रहा। फाइल संबंधी गड़बड़ी में विभाग बदला तो टैंकर प्रभारी बना।


5. 2007-08 में यशवंत सागर के फूल कलारिया पंपिंग स्टेशन से 100 टन पाइप गायब होने के मामले में सस्पेंड हुआ।


6. 2010-11 में यातायात सामग्री की खरीदी, उसके उपयोग, क्वालिटी और बाद में भुगतान को लेकर सामने आए सवा दो करोड़ रुपए के ट्रैफिक घोटाले में नाम। जांच अभी भी जारी।

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