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पिनेकल ड्रीम्स टाउनशिप के फ्लैट बेचकर फाइनेंस कंपनी लोन वसूली नहीं कर सकेगी

3 वर्ष पहले
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पिनेकल ड्रीम्स प्रोजेक्ट में निवेश करने वालों को बॉम्बे हाई कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। एक फाइनेंस कंपनी का भी इस प्रोजेक्ट पर लोन बकाया था। कंपनी ने मांग की थी कि गिरवी रखे गए फ्लैट को बेचकर लोन वसूलने की अनुमति दी जाए। हाई कोर्ट ने ऐसी अनुमति देने से इनकार कर दिया। निवेशक अपना फ्लैट हासिल करने के लिए सिविल कोर्ट में भी लड़ाई लड़ सकेंगे।

पिनेकल ड्रीम्स संघर्ष समिति ने भी बॉम्बे हाई कोर्ट जाकर अपना पक्ष रखा था। समिति की ओर से भरत ढेंबला, दिनेश रावत ने पैरवी की थी। फाइनेंस कंपनी ने पिनेकल ड्रीम्स पर जाकर अपना बोर्ड भी लगा दिया था। लगभग 80 करोड़ रुपए का लोन प्रोजेक्ट पर बकाया था। इसके एवज में कंपनी फ्लैट बेचकर वसूली करना चाहती थी। हाई कोर्ट ने रिसीवर भी नियुक्त कर रखा था। हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में दायर की गई याचिका से पहले बॉम्बे हाई कोर्ट में फाइनेंस कंपनी ने मामला लगा रखा था। इंंदौर खंडपीठ ने पहले अंतरिम आदेश देकर जस्टिस दीपक वर्मा की जांच कमेटी बनाई थी। अंत में इस कमेटी के बजाय डीआईजी हरिनारायणाचारी मिश्रा को जांच सौंप दी थी। निवेशकों को रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) में जाकर अपनी बात रखने के आदेश दिए थे।

10 फीसदी काम बाकी है इस प्रोजेक्ट का

प्रोजेक्ट में 90 फीसदी काम पूरा हो चुका है। केवल 10 फीसदी बचा है जो निवेशकों से बकाया पैसा मिलने के बाद पूरा किया जाना बाकी है। 550 से ज्यादा निवेशकों का पैसा इस प्रोजेक्ट में फंसा हुआ है। तकरीबन 800 करोड़ रुपए वसूले जाना हैं।

भास्कर संवाददाता | इंदौर

पिनेकल ड्रीम्स प्रोजेक्ट में निवेश करने वालों को बॉम्बे हाई कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। एक फाइनेंस कंपनी का भी इस प्रोजेक्ट पर लोन बकाया था। कंपनी ने मांग की थी कि गिरवी रखे गए फ्लैट को बेचकर लोन वसूलने की अनुमति दी जाए। हाई कोर्ट ने ऐसी अनुमति देने से इनकार कर दिया। निवेशक अपना फ्लैट हासिल करने के लिए सिविल कोर्ट में भी लड़ाई लड़ सकेंगे।

पिनेकल ड्रीम्स संघर्ष समिति ने भी बॉम्बे हाई कोर्ट जाकर अपना पक्ष रखा था। समिति की ओर से भरत ढेंबला, दिनेश रावत ने पैरवी की थी। फाइनेंस कंपनी ने पिनेकल ड्रीम्स पर जाकर अपना बोर्ड भी लगा दिया था। लगभग 80 करोड़ रुपए का लोन प्रोजेक्ट पर बकाया था। इसके एवज में कंपनी फ्लैट बेचकर वसूली करना चाहती थी। हाई कोर्ट ने रिसीवर भी नियुक्त कर रखा था। हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में दायर की गई याचिका से पहले बॉम्बे हाई कोर्ट में फाइनेंस कंपनी ने मामला लगा रखा था। इंंदौर खंडपीठ ने पहले अंतरिम आदेश देकर जस्टिस दीपक वर्मा की जांच कमेटी बनाई थी। अंत में इस कमेटी के बजाय डीआईजी हरिनारायणाचारी मिश्रा को जांच सौंप दी थी। निवेशकों को रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) में जाकर अपनी बात रखने के आदेश दिए थे।

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